विज्ञापन

दफ्तर में बेतरतरीब बिखरा सामान देख खफा हुए सीएमओ

Kannauj Updated Tue, 15 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
कन्नौज। जिला चिकित्सालय से स्थानांतरित होकर विनोद दीक्षित चिकित्सालय पहुंचे सीएमओ कार्यालय में सामान बिखरा देख सीएमओ ने नाराजगी जताई। कर्मचारियों को लगाकर कार्यालयों में सामान रखवाया गया।
विज्ञापन
बीते एक पखवारा पहले विनोद दीक्षित चिकित्सालय परिसर में नवनिर्मित सीएमओ कार्यालय बनाया गया। इसमें सभी कामकाज शुरू कराया गया। जिला चिकित्सालय से डीसीएम व ट्रक में लादकर सामान पहुंचाया गया। तीन मंजिल के इस कार्यालय में बाबुओं ने अपने प्रमुख सामान को तो रख लिया लेकिन बड़ी आलमारी व मेजें बेतरतीब ढंग से मुख्य गेट के आसपास ही पड़ी रहने दिया।
सोमवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राकेश रमन का पारा अचानक चढ़ गया। उन्होंने कार्यालय के सभी बाबू व कर्मचारियों को नीचे बुलाया। कड़े निर्देश दिए कि अपनी-अपनी आलमारी व फाइलें तत्काल उठाकर अपने-अपने कमरों में रखवा लें। यदि गैलरी में पड़ा सामान मिला तो संबंधित बाबू के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ का आदेश मिलते ही कर्मचारियों को लगाकर बाबुओं ने अपनी-अपनी फाइलें, कंप्यूटर व आलमारी अंदर रखवाईं। यही नहीं टूटी कुरसियां व मेजें पीछे कमरे में जमा कराईं। सफाई कर्मचारियों को निर्देश दिए कि पूरे कार्यालय की बेहतर सफाई की जाए।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Kanpur

बस स्टैंड पर बैठा मिला लापता बीएसएफ जवान, बोला- कुछ पता नहीं कैसे यहां आ गया

राजस्थान के बाड़मेर से घर आते समय लापता हुआ बीएसएफ जवान ब्रजेश अग्निहोत्री रविवार को इटावा बस स्टैंड पर बैठा मिला।

23 सितंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

स्कूल होने के बावजूद यहां खेतों में पढ़ाई कर रहे हैं बच्चे, जानिए वजह

सरकार बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए जहां कई उपक्रम अपना रही है, वहीं यूपी के इटावा में बच्चे खेतों में पढ़ने को मजबूर है। जानिए आखिर क्यों खेतों में पढ़ रहे बच्चे।

12 जुलाई 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree