आखिर कहां हैं चिकित्सक

Kannauj Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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तिर्वा (कन्नौज)। बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज में कहने को तो 31 संविदा व 9 सीनियर रेजीडेंट चिकित्सक हैं। पर अधिकांश नदारद रहते हैं। मरीजों की मानें तो प्रतिदिन ओपीडी में महज आधा दर्जन चिकित्सक की नजर आते हैं। कालेज प्रशासन का दावा है कि प्रतिदिन 18 चिकित्सक ओपीडी करते हैं। हकीकत कुछ भी हो पर सैकड़ों मरीज बगैर इलाज के ही बैरंग लौटने को मजबूर होते हैं। हर मरीज की जुबान पर एक ही सवाल रहता है कि आखिर डाक्टर हैं कहां? राजकीय मेडिकल कालेज आज से तीन वर्ष पहले मई में शुरू कराने के लिए आनन-फानन में ओपीडी की शुरुआत हुई थी। महज चार चिकित्सकों से शुरु हुई ओपीडी आज 40 चिकित्सकों के बावजूद कछुआ चाल से चल रही है। जबकि प्रतिदिन यहां एक हजार से ज्यादा मरीज आमद दर्ज कराते हैं। इस बावत सूत्रों की मानें तो कई चौंकानेवाले तथ्य सामने आए हैं। यहां पर वर्तमान में 31 संविदा और नौ वरिष्ठ चिकित्सकों की तैनाती है। इसमें आर्थोपैडिक माइक्रो सर्जरी स्त्री रोग, बाल रोग, नाक, कान गला रोग, एवं मेडिसिन व पैथोलाजी के चिकित्सक भी शामिल हैं। हकीकत इसके विपरीत है। कनपुरा निवासी राज कुमार, हरेईपुर निवासी महेश चंद्र की मानें तो वे दो दिन से अपने मरीज को दिखाने के लिए ओपीडी में जाते हैं पर चिकित्सक मौजूद नहीं मिल पा रहे हैं। बिनौरा निवासी रामजी कहते हैं कि चिकित्सकों के पास मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगती हैं। इससे दो बजे के बाद काफी मरीज बिना दिखाए ही बैरंग लौट रहे हैं। कांग्रेस सूचना अधिकार संगठन के जिला संयोजक दीपक सिंह बघेल की टीम ने लगातार एक पखवारे तक ओपीडी का निरीक्षण किया। उनका कहना है कि उ्नहें किसी भी दिन आधा दर्जन से ज्यादा चिकित्सक ओपीडी में मौजूद नहीं मिले। उधर सीएमएस डा. आईए अंसारी का कहना था कि 18 चिकित्सक प्रतिदिन ओपीडी कर रहे हैं। प्रश्न यह उठता है कि आखिर ये डाक्टर ओपीडी में मौजूद क्यों नहीं मिलते।
फोटो...20....नर्सिंग हास्टल परिसर में खड़ी खराब एंबुलेंस

एंबुलेंस बनी शो-पीस
तिर्वा (कन्नौज)। मेडिकल कालेज में मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाओं का टोटा पड़ा है। कालेज में दी गई एंबुलेंस जहां पहले ही दिन से शो-पीस बनकर नर्सिंग हास्टल परिसर में खड़ी है वहीं मरीजों को ओपीडी या वार्ड तक पहुंचाने के लिए स्टेचर व व्हील चेयर भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उधर कालेज प्रशासन का दावा है कि स्ट्रेचर का लाभ मरीजों को मिल रहा है। एंबुलेंस छह महीने के बाद भी उन्हें शासन से नहीं मिल पाई है। मेडिकल कालेज इस सत्र में एमसीआई की मान्यता मिल जाने का दावा कर रहा है। इसी हफ्ते में एमसीआई की टीम भी आनी है पर कालेज मे आपात कालीन सेवाओं का बुरा हाल है। इंडोर सेवा शुरू होते ही मेडिकल कालेज को कानपुर मेडिकल कालेज से एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी। तकनीकी खराबी के चलते यह गाड़ी पहले ही दिन से नर्सेस हास्टल परिसर में खड़ी है। यही हालत गंभीर मरीजों को ओपीडी व वार्ड तक पहुंचाने के काम में आने वाले स्ट्रेचर व व्हील चेयर का है। उधर सीएमएस डा. आईए अंसारी की मानें तो कालेज प्रशासन ने छह महीने पहले ही शासन को पत्र लिखकर दो एंबुलेंस गाड़ी की मांग की थी। उनका प्रस्ताव आज भी शासन स्तर पर लंबित है। ओपीडी गेट पर स्टेचर व व्हील चेयर उपलब्ध हैं।

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