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गबन के आरोपी दो हेडमास्टर सस्पेंड

Kannauj Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। अब तो गुरुजनों ने भी कमाई के चक्कर में नैतिकता ताक पर रख दी है। छत का लेंटर तक खराब डलवा रहे हैं, जिससे बच्चों की जान पर खतरा है। इसकी पोल खुद बेसिक शिक्षा विभाग ने ही खोली है। फिलहाल दोनों हेडमास्टरों को सस्पेंड कर दिया गया है। इनसे करीब दो लाख रुपये की रिकवरी भी की जाएगी।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एपी सिंह ने निलंबन आदेश में लिखा है कि हसेरन विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय किशनपुर का निर्माण कराने का जिम्मा प्राथमिक विद्यालय ललियाभोज के हेडमास्टर मुलायम सिंह को सौंपा गया था। जिलाधिकारी के आदेश पर 28 अप्रैल को विद्यालय निर्माण की जांच ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) के अवर अभियंता को सौंपी गई। जांच में पाया कि विद्यालय में बनाए रसोई घर में एक दीवार बनाई ही नहीं गई। प्राइमरी स्कूल की ही एक दीवार का इस्तेमाल कर लिया गया। दीवार की अनुमानित लागत 10 हजार रुपये बचा ली गई।

इसी तरह विद्यालय की चौखट, खिड़की, फ्रेम लोहे की बजाय लकड़ी के लगाए गए हैं। इस कार्य में करीब 14100 रुपये बचाए गए। विद्यालय भवन का बरामदे एवं कमरों की छत में सरिया 15 के स्थान पर 30 सेमी पर डाली गई है। इससे छत कमजोर है। छत का लेंटर दुबारा डालने में करीब 91000 रुपया खर्च होगा। जेई ने रिपोर्ट में कहा है कि मुलायम सिंह से कुल एक लाख 15 हजार 100 रुपये की रिकवरी होनी चाहिए।
इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय रामपुर कर्सा के हेडमास्टर उमेश कुमार ने प्राइमरी स्कूल चौहानपुर का निर्माण कराया है। जांच में जेई आरईएस ने पाया कि विद्यालय की चौखट, खिड़की व फ्रेम लकड़ी के लगाकर 14100 रुपये बचाए गए हैं। बरामदा व कमरों की छत का लेंटर मानक के अनुसार नहीं है। छत को दुबारा बनाने में करीब 91000 रुपया खर्च होगा। इस तरह भवन प्रभारी उमेश कुमार ने 105100 रुपया बचाकर बच्चों के लिए हादसे को दावत दी है। बीएसए का कहना है कि इन भवन प्रभारियों ने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा से नहीं किया। उन्हें इमानदारी से काम न करने व शासकीय धन का गबन करने में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है।
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पूरे जिले के भवन प्रभारियों का ब्यौरा तलब
कन्नौज। जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने पूरे जिले में 12 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 167 परिषदीय व 8 जूनियर हाईस्कूल भवनों का ब्यौरा, उनकी प्रगति व भवन प्रभारियों के नामों की सूची तलब की है। सीडीओ के जरिए यह सूची बीएसए दफ्तर ने भेज भी दी है। सूची से पता किया जाएगा कि कितने शिक्षक ऐसे हैं जो एक से ज्यादा भवन बनवा रहे हैं। साथ ही नाम किसी का और जमीन पर कौन सा काम दूसरे शिक्षक करा रहे हैं ? यह भी पता किया जाएगा। गोपनीय तौर पर एबीएसए की भूमिका भी जांची जाएगी। कई ऐसे विद्यालयों के नाम भी सामने आए हैं जिनका अभी तक निर्माण शुरू ही नहीं हो सका है। इनका जमीनी सत्यापन दूसरे विभागों से कराने की तैयारी चल रही है।

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