बैंकों, दफ्तरों के बीच लाभार्थी बने घनचक्कर

Kannauj Updated Fri, 09 May 2014 05:30 AM IST
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कन्नौज। विभागीय तालमेल में कमी की वजह से विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी घनचक्कर बन गए हैं। मजबूरी में कोई बैंकों के चक्कर लगा रहा है तो कोई सरकारी दफ्तरों की दौड़ लगा रहा है।मामूली खामियां भले ही लाभार्थियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है, लेकिन इससे दलालों और बाबुओं को कमाई का नया जरिया मिल गया है। अमर उजाला की पड़ताल में खुलासा हुआ मामूली खामियों की वजह से खातों में रूपये नहीं पहुंचने से पांच सौ से अधिक विधवाओं को पेंशन नहीं मिल पा रही है। साथ ही सैकड़ों विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति धनराशि भी बैंकों में डंप हो गई है।
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वर्ष 2013-14 में दूसरी किश्त के रूप में जिला प्रोबेशन विभाग ने 14 हजार 473 लाभार्थियों के खाते में 2 करोड़ 60 लाख रुपये की पेेशन धनराशि भेजी। पांच से 13 मार्च की अवधि के दौरान रुपया भेजा गया। करीब दो महीने बीतने वाले हैं, लेकिन लगभग पांच सौ विधवाओं के खाते में चवन्नी तक नहीं पहुंची। किसी के खाता नंबर में गलती हो गई है तो किसी के नाम में मात्रा घट या बढ़ गई है। पते और वल्दियत भी गलत होने के कारण बजट बैंक में डंप है। इसका खुलासा तब हुआ जब जिला प्रोबेशन अधिकारी राजेश कुमार बघेल ने बैंकों से ऐसे लाभार्थियों का ब्योरा मंगाया, जिनके खाते में पेंशन ट्रांसफर नहीं हुई है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग भी इस तरह की गड़बड़ियों से अछूता नहीं है। सेंट्रल गवर्नमेंट स्कालरशिप योजना के तहत कक्षा 11 से ऊपर की कक्षाओं में पढ़ने वाले 3850 विद्यार्थियों के खाते में रुपया भेजा गया। कुछ विद्यार्थियों को वजीफा मिल गया, जबकि बैंक आफ बड़ौदा समेत कई बैंक शाखाओं में छात्र-छात्राएं चक्कर काट रहे हैं। विभाग से भेजी गया वजीफा बैंक में अटक गया है। विभागीय अफसरोां की टालमटोल के के कारण छात्र-छात्राओं को अनावश्यक दौड़ लगानी पड़ रही है। इसी तरह पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में करीब सौ छात्रों का शुल्क प्रतिपूर्ति व वजीफे का भुगतान गड़बड़ा गया है। दशोमत्तर में आईएफएस कोड गलत होने के कारण भुगतान खाते में नहीं पहुंचा तो छात्र इसे ठीक कराने के कभी स्कूल तो कभी सरकारी दफ्तर की दौड़ लगाते देखे जा सकते हैं। पढ़ाई-लिखाई छोड़कर छात्र एक सप्ताह से वजीफे के पीछे भागदौड़ कर रहे हैं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में भी 51 हजार से ज्यादा लाभार्थियों के खातों में दूसरी किश्त कई महीने बाद अब तक नहीं पहुंचने से तमाम लाभार्थी पेंशन से वंचित हैं। अब उन्हें नाम, खाता नंबर ठीक कराने के लिए किसी के आगे हाथ जोड़ने पड़ रहे हैं तो कहीं मजबूर होकर सुविधाशुल्क देना पड़ रहा है। रोज महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग विकास भवन के चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं। केस- एक : बैंक आफ इंडिया की शाखा कन्नौज। 19 महिला लाभार्थियों के खाते में विधवा पेंशन योजना के तहत दूसरी किश्त के रूप में 1800-1800 रुपये भेजे गए। लाभार्थी भटक रहे हैं। प्रोबेशन विभाग ने पेंशन ट्रांसफार होने या न होने वाले लाभार्थियों का डिटेल मांगा तो यह संख्या निकलकर सामने आई। अब इन पेेंशनधारकों को सूचना भेजी जाएगी ताकि वे खाते से लेकर अन्य त्रुटियां ठीक कराकर पेंशन का हक पा सकें केस- दो सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव तेरामल्लू निवासी विधवा विमला देवी की पेंशन काट दी गई। सत्यापन के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ाने वाले अधिकारियों ने उसे कागजों में मृत दर्शा दिया गया। कई दिन बैंक के चक्कर लगाने के बाद जब मायूस विमला सरकारी दफ्तर में पहुंची तो पता चला वह तो कागजों में मृत घोषित हो चुकी है। अब विमला खुद को जिंदा साबित करने के लिए चक्कर लगा रही है। डीएम ने प्रार्थनापत्र पर जांच के आदेश दिए हैं। गलती ठीक होने के बाद विमला देवी को कब न्याय मिलेगा , इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है।
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