रैन बसेरा : यहां एक भी यात्री नहीं ठहरा

Kannauj Updated Mon, 20 Jan 2014 05:47 AM IST
छिबरामऊ (कन्नौज)। शासन के कड़े निर्देश पर नगरपालिका ने रात के समय यात्रियों को शीतलहर के प्रकोप से बचाने को रैन बसेरा बनाने की औपचारिकता तो पूरी कर दी लेकिन यात्रियों की बात तो दूर नगर के लोगों को ही नहीं पता कि रैन बसेरा है कहां। पालिका ने जिस बारातघर को रैन बसेरा बनाया है वहां हमेशा ताला पड़ा रहता है और गंदगी व्याप्त है।
नगरपालिका परिषद ने 6 जनवरी को अस्पताल रोड तिराहे के पास पीछे की तरफ बने बारातघर में रैन बसेरा की स्थापना कर दी। यहां पर एक पालिका कर्मचारी सर्र्वेश कुमार की ड्यूटी लगा दी गई। यहां ठहरने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए 2 दरी, 10 गद्दा, 10 रजाई तथा इतनी ही तकियों की व्यवस्था एक टेंट हाउस से कर दी गई। करीब 15 दिन बीत जाने के बाद भी आज तक यहां एक भी राहगीर या भूला भटका यात्री नहीं ठहरा। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लोगों को इसकी जानकारी न होना है। लोगों का कहना है कि नगरपालिका ने कहां पर रैनबसेरा बनाया उन्हें नहीं पता। यह सब प्रचार प्रसार के अभाव के कारण है।
शनिवार की देर रात मालवीय नगर वार्ड के सभासद मनोज कुमार सिंह राठौर एडवोकेट, जवाहर नगर के सभासद हरिशरण शाक्य अपने कई अन्य साथियों के साथ जब रैन बसेरा का जायजा लेने पहुंचे तो वहां ताला पड़ा हुआ था। यहां ड्यूटी पर तैनात पालिकाकर्मी सर्वेश कुमार बारात घर के पास बने ट्यूबवेल की कोठरी में लेटे थे। काफी प्रयास के बाद उन्होंने गेट खोला। जब उनसे पूछा गया कि अभी तक रैन बसेरा में कितने लोग आकर रुक चुके हैं तो उसने बताया कि एक भी नहीं। जब उन्होंने रैन बसेरा का ताला खुलवाकर देखा तो वहां गंदगी पड़ी हुई थी। कमरे के अंदर एक कोने में रजाई गद्दा रखे थे। बरामदे में भी गंदगी व्याप्त था।
रात करीब 10.35 बजे रोडवेज बस स्टेशन के बाहर बंद पड़ी दुकानों की पट्टियों पर कुछ लोग ठंड से सिकुड़ कर लोई और शाल ओढ़े बैठे थे। जब उन लोगों से जाकर पता किया गया तो वहां बैठे खड़िनी क्षेत्र के ग्राम गढ़िया पाह निवासी रावेंद्र कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी की दवा लेकर आगरा से लौटा। देर हो जाने से उसे बस नहीं मिल सकी। मजबूर होकर यहां रात काटनी पड़ रही है। जब उससे कहा गया कि रैन बसेरा में चले जाओ तो इस पर उसने अनभिज्ञता जता दी। यही कुछ हाल ग्राम ईजलपुर के श्रीकृष्ण व उनके दो अन्य साथियों तथा नगला पसा के राजेंद्र कुमार का था। यह लोग देर से दिल्ली से लौटे कोई वाहन न मिल पाने से गांव नहीं पहुंच सके। मजबूर होकर अब उन्हें यहीं रोडवेज स्टेशन के बाहर खुले में रात बितानी पड़ रही है। उन लोगों का भी यही कहना था कि रैनबसेरा की उन्हें जानकारी नहीं है। उधर रोडवेज बस स्टेशन के बाहर दुकान किए लोगों से जब जानकारी चाही गई तो दुकानदार राजेश, अमित, बोवी आदि ने भी बताया कि उन्हें ही नहीं पता कि रैन बसेरा कहां है तो भला बाहर के यात्रियों को कैसे पता होगा।
उधर इस संबंध में जब नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी केपी पांडेय ने बताया कि वह फिलहाल अवकाश पर हैं। प्रभारी ईओ सफाई इंस्पेक्टर बहोरन सिंह का कहना था कि वहां पर एक कर्मचारी सर्वेश कुमार की ड्यूटी लगा दी गई है। उसका प्रचार भी करा दिया जाएगा और एक दो स्थानों पर बैनर टंगवा दिए जाएंगे।

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