नहीं आ रहे बाहरी जिलों के किसान

Kannauj Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
कन्नौज। केके इंटर कालेज खेल मैदान पर कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत एग्रो क्लाइमेटिक मैदानी जोन का तीन दिवसीय मंडल स्तरीय किसान महोत्सव/विराट किसान मेला एवं गोष्ठी के दूसरे दिन भी किसानों की भीड़ नहीं जुटी। कृषक मेले में भीड़ जुटाने के लिए अधिकारियों के सारे प्रयास ढेर नजर आए।
शुक्रवार को कृषक मेले का दूसरा दिन था। मेले में किसानों को वैज्ञानिकों के द्वारा उन्नतशील बीजों, पशुओं के प्रमुख रोग, उनकी पहचान सहित फसलों की अन्य जानकारियां देने के लिए संगोष्ठी शुरू करने की खातिर अधिकारी सुबह से किसानों का इंतजार करते दिखे। दोपहर बारह बजे तक मैदान में लगाए गए 78 स्टालों पर करीब एक सैकड़ा किसान मौजूद थे। इसके अलावा एक दर्जन किसान भारी-भरकम पंडाल में पड़ी कुर्सियों पर बैठे थे। शेष कुर्सियां खाली थीं।
पंडाल में किसानों की कम संख्या देखकर वैज्ञानिक भी संबोधन के लिए नहीं आ रहे थे। करीब 12 बजे अधिकारियों ने विभागीय कर्मचारियों को लगाकर स्टाल पर खड़े किसानों को पंडाल के अंदर लाए जाने को कहा। इसके अलावा कई बार माइक से किसानों को पंडाल में आने का अनुरोध किया गया। दोपहर 2 बजे तक पंडाल के अंदर एक सैकड़ा से अधिक किसान ही जमा हो सके।

खाने की पर्ची रोकने का नुस्खा भी बेअसर
कन्नौज। कृषि मेले में किसानों को कितनी अधिक देर तक रोका जा सके, इसके लिए मेला प्रभारी सुनील कुमार अग्रवाल ने नया तरीका खोजा। सुबह मेले में आने वाले किसानों को पंजियन के बाद उनको खाने व नाश्ता की पर्ची रुकवा दी गई ताकि किसानों को अधिक देर तक रोका जा सके। यह रणनीति भी काम न आई। आसपास के तमाम किसान बिना खाए ही घरों को वापस लौट गए।

डीएम के निर्देश पर लगा इत्र का स्टाल
कन्नौज। कृषक मेले के उद्घाटन के दौरान जिलाधिकारी डा.आदर्श सिंह ने निर्देश दिया था कि इत्र नगरी में आयोजित हो रहे मेले में इत्र से संबंधित कोई स्टाल नहीं लगा है। डीएम के निर्देश पर आयोजकों ने शुक्रवार को इत्र का स्टाल लगाया, जिसमें किसानों को विभिन्न जानकारियां प्रदान की गईं। कृषक मेले में जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार, उप कृषि निदेशक डीएस राजपूत, मेला प्रभारी, महेश वर्मा, पंकज पांडेय मौजूद रहे। पूर्व ब्लाक प्रमुख नवाब सिंह यादव भी शाम के वक्त मेले में पहुंचे।

फसल व पशु सुरक्षा की जानकारी दी
कन्नौज। कृषक मेले में दोपहर 12 बजे कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नतशील बीजों, रबी व दलहनी फसलों की वैज्ञानिक खेती के गुर बताए। उप परियोजना निदेशक जय प्रकाश भारती ने आत्मा योजना के संबंध में किसानों को विस्तार से बताया। योजना के लाभ भी समझाए। उप कृषि निदेशक डीएस राजपूत ने समूहों के गठन, संचालन प्रक्रिया एवं किसान क्लब की जानकारी प्रदान की। डा.वीके कनौजिया ने सिंचाई जल प्रबंधन एवं अधिक सिंचाई से हानियों के बारे में किसानों को अवगत कराया। डा.एसके चर्तुवेदी ने रबी में दलहनी फसलों की वैज्ञानिक खेती, डा.आरजी चौधरी ने दलहनी फसलों के कीटों की पहचान एवं उनके निदान की जानकारी दी। कहा कि फसलों में कीट लग जाने से उत्पादन काफी घट जाता है। किसानों को इससे सतर्क रहना चाहिए। डा.आरपी त्रिपाठी ने शीतकाल में पशुओं की देखलाल एवं उनका नस्ल सुधार, संयुक्त निदेशक शोध सीएसए कानपुर ने पशुओं के प्रमुख रोग, पहचान एवं उनका निदान, मुनीष गंगवार ने औषधीय फसलों की वैज्ञानिक खेती, अरविंद कुमार यादव ने मृदा परीक्षण क्यों कैसे एवं उसका महत्व, डा.विजय बहादुर जायसवाल ने रबी में तिलहनी फसलों पर चर्चा की।

भोजपुरी गानों का भी टोटका आजमाया
कन्नौज। कृषक मेले में सूचना विभाग के कलाकारों द्वारा भोजपुरी गीतों के माध्यम से किसानों को रोके रखने का प्रयास किया गया। गाने की तर्ज पर कलाकारों ने खेती के नुस्खे भी किसानों को समझाए।

तो यहां क्यों करें खरीददारी
कन्नौज। कृषि मेले में लगाए गए विभिन्न 78 स्टालों में कृषि यंत्र, ऊनी सहित विभिन्न कपड़े, ट्रैक्टर, स्प्रे मशीन, समरसेबल, कीटनाशक दवाइयां, जर्मन के कृषि यंत्र की प्रदर्शनी लगाई गई। इन पर किसी तरह की छूट न मिलने से किसान मायूस है। किसानों का कहना है कि मेले में अधिकारियों को खरीद पर छूट प्रदान करनी थी, ताकि किसान खरीददारी कर सकें। जब यंत्र बाजार भाव पर मिलना है तो वह क्यों खरीददारी करेंगे। परिचित की दुकान से खरीदने पर छूट के अलावा कुछ उधारी भी मिल जाएगी।

शुरू हुई आंकड़ों की बाजीगरी
कन्नौज। कृषक मेले में भीड़ न जुटा पाने में अक्षम रहा उप कृषि निदेशक विभाग आंकड़ों की बाजीगरी में जुट गया है। किसानों के पंजीकरण के लिए लगाए गए काउंटरों पर जब शुक्रवार को जानकारी प्राप्त की गई तो उनका कहना था कि पंजीकरण के लिए चार काउंटर बनाए गए हैं। इन काउंटरों पर गुरुवार को करीब 3600 किसानों ने पंजीकरण कराया है। गुरुवार को दोपहर के 1 बजे तक कृषक मेले में तीन सैकड़ा किसानों की भीड़ नहीं थी। अब मेला प्रभारी के निर्देश पर आंकड़ेबाजी का खेल शुरू हो गया है।

बाहरी किसानों के ठहरने की व्यवस्था नहीं
कन्नौज। मंडल स्तरीय कृषक मेले में हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज के किसानों को शामिल होना था। निर्देशों के मुताबिक प्रत्येक जिले से प्रतिदिन 200 किसानों को लाया जाना था, लेकिन बाहरी जनपदों के किसान नहीं पहुंच रहे हैं। गुरुवार को कानपुर नगर के कुछ किसान मेले में जरूर पहुंचे थे, लेकिन उनके ठहरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। इस कारण वे वापस हो गए। इस बाबत उप कृषि निदेशक डीएस राजपूत ने कहा कि लगभग हर जिले में कृषक मेले चल रहे हैं। इस कारण किसान नहीं आए हैं।

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