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अब लिखा पढ़ी में होगा बिजली का ‘शट डाउन’

jhansi Updated Thu, 23 May 2019 12:53 AM IST
transformer
transformer - फोटो : demo
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झांसी।  बिजली का फाल्ट ठीक करने के लिए लाइनमैन अब मोबाइल पर सबस्टेशन ऑपरेटर से शट डाउन नहीं ले सकेंगे। उनको खुद सबस्टेशन पर जाकर लिखित शट डाउन लेना होगा और फाल्ट ठीक होने पर खुद ही आकर उसको वापस कराना होगा। बिजली विभाग ने यह कदम खंभे पर कार्य के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उठाया है। हालांकि, इस व्यवस्था में बिजली ज्यादा देर तक बंद रह सकती है।
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अभी होता यह है कि बिजली लाइन में फाल्ट आने पर कर्मचारी मौके पर पहुंच जाते हैं। इसके बाद लाइनमैन फाल्ट ठीक करने से पहले मोबाइल पर सबस्टेशन ऑपरेटर (एसएसओ) को बिजली बंद (शट डाउन) करने के लिए कहता है। एसएसओ संबंधित फीडर की ट्राली निकाल देते हैं और इससे संबंधित लाइन का करंट बंद हो जाता है। फाल्ट ठीक होने पर लाइनमैन दोबारा मोबाइल पर एसएसओ को सूचना देकर बिजली चालू करवाता है। मगर, इस व्यवस्था में कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। दरअसल, मोबाइल पर सुनने में थोड़ी सी गलती होने पर बिजली चालू कर दी गई और इससे खंभे पर चढ़े कर्मचारी की करंट लगने से जान चली गई। जिले में पिछले एक साल में चार कर्मचारियों की जान जा चुकी हैं।
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने अब इस व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी शट डाउन मोबाइल पर नहीं लिया जा सकेगा। इसके लिए लाइनमैन खुद सबस्टेशन पर जाएंगे। लाइनमैन फीडर मशीन से ट्राली हटाकर अपनी तख्ती उस पर लटकाएंगे। लॉग शीट/ शट डाउन रजिस्टर पर दर्ज करेंगे। इसके बाद मौके पर पहुंचकर फाल्ट ठीक कराएंगे और खुद वापस आकर फीडर में मशीन ट्राली लगाकर बिजली चालू करेंगे। कर्मचारियों को हेलमेट व सुरक्षा बेल्ट पहनना भी जरूरी है। इस संबंध में प्रबंध निदेशक एसके वर्मा ने निर्देश जारी कर दिए हैं।

‘यह व्यवस्था एक दो दिन में पूरी तरह लागू हो जाएगी। यदि कोई कर्मचारी मोबाइल पर शट डाउन लेने के दबाव बनाता है तो उसकी शिकायत अधिशासी अभियंता या अधीक्षण अभियंता से की जा सकती है।’
गौरव कुमार, प्रभारी अधीक्षण अभियंता।

छह टीमें कर रही हैं काम
महानगर में 15 सबस्टेशन हैं। हर सबस्टेशन पर फाल्ट सुधारने व कनेक्शन कटवाने में सहयोग करने के लिए 18 सरकारी व संविदा कर्मचारी तैनात हैं। फाल्ट सुधारने के लिए एक टीम में तीन कर्मचारी रहते हैं। इनमें एक लाइनमैन, एक कुशल श्रमिक व एक श्रमिक होता है। कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से छह टीमें काम कर रही हैं। दिन में तीन, शाम को दो और रात में एक टीम तैनात  रहती है।

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