झांसी में हर साल मिलते डेढ़ दर्जन थैलेसीमिया के नए मरीज

अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 08 May 2016 01:17 AM IST
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hospital, jhansi news - फोटो : demo
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झांसी। लाइलाज बीमारी थैलेसीमिया का प्रकोप देश में बढ़ता ही जा रहा है। इस बीमारी से हीमोग्लोबिन बनने की प्रक्रिया गड़बड़ाने लगती है। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के शरीर में खून की भारी कमी हो जाने से उसे बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। इलाज में थोड़ी सी भी देरी बच्चे को मौत के मुहाने तक पहुंचा देती है। झांसी में भी हर साल एक से डेढ़ दर्जन थैलेसीमिया के नए मरीज मिलते हैं।
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हीमोग्लोबिन अल्फाग्लोबिन और बीटाग्लोबिन प्रोटीन से बनता है और थैलेसीमिया इस प्रोटीन में ग्लोबिन निर्माण की प्रक्रिया में खराबी होने से होता है। इससे लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से नष्ट हो जाती हैं। रक्त की भारी कमी के कारण रोगी के शरीर में बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता है। रक्त की कमी से हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता है। माता-पिता दोनों के जींस में थैलेसीमिया होने से बच्चे को होने वाला रोग मेजर थैलेसीमिया होता है।


वहीं, थैलेसीमिया माइनर उन बच्चों को होता है, जिन्हें प्रभावित जीन माता-पिता में से किन्हीं एक में होता है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओम शंकर चौरसिया ने बताया कि झांसी में थैलेसीमिया के हर साल 12 से 18 नए मरीज मिल जाते हैं। ऐसे मरीजों को ब्लड बैंक से बिना डोनर के साल में कई बार रक्त चढ़ाया जाता है।

ऐसे पता चल सकती है बीमारी
माता-पिता को यदि अपने बच्चे में थैलेसीमिया के लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूर्ण रक्त कण गणना, कंप्लीट ब्लड काउंट यानी सीबीसी से रक्ताल्पता या एनीमिया का पता लगाया जाता है। वहीं, हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस से असामान्य हीमोग्लोबिन का पता लगता है। इसके अलावा म्यूटेशन एनालिसिस टेस्ट, एमटी द्वारा एल्फा थैलेसीमिया की जांच के बारे में जाता जा सकता है। मेरुरज्जा ट्रांसप्लांट से भी इस बीमारी के उपचार में मदद मिलती है।

देश में दस लाख थैलेसीमिया मरीज
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल सात से दस हजार थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का जन्म होता है। देश की राजधानी दिल्ली में ही यह संख्या 1500 है। देश की कुल जनसंख्या का साढ़े तीन प्रतिशत हिस्सा थैलेसीमिया ग्रस्त है। मौजूदा समय में भारत में दस लाख तो पाकिस्तान में एक लाख बच्चे इस रोग से पीड़ित हैं। पेश है वर्ल्ड थैलेसीमिया डे पर एक रिपोर्ट।  

बचाव एवं सावधानी
- विवाह से पहले महिला-पुरुष रक्त जांच कराएं।
- गर्भावस्था के दौरान इसकी जांच कराएं।
- रोगी की हीमोग्लोबिन 11 या 12 बनाए रखने की कोशिश करें
- समय पर दवाइयां लें और इलाज पूरा कराएं।

खुल गई बोन मैरो डोनर रजिस्ट्री
थैलेसीमिया के मरीजों के मेरुरज्जु, बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए अब भारत में भी बोन मैरो डोनर रजिस्ट्री खुल गई है। मैरो डोनर रजिस्ट्री इंडिया, एमडीआरआई में बोन मैरो दान करने वालों के बारे में सभी आवश्यक जानकारियां होंगी। यह केंद्र मुंबई, चेन्नई, एवं सीएमसी बैंगलोर में स्थापित है। जल्द ही इसकी शाखाएं महानगरों में भी खुलने की योजना है।

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