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बेहद खतरनाक है तारों का जाल

Jhansi Bureauझांसी ब्यूरो Updated Wed, 26 Jun 2019 01:03 AM IST
नरियाबाजर में बिजली के तारों का मकड़जाल। अमर उजाला
नरियाबाजर में ‌बिजली के तारों का मकड़जाल। अमर उजाला
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झांसी। बरसात आ गई है लेकिन विद्युत सुरक्षा के मद्देनजर जिले में पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। कई जगह असुरक्षित तरीके से रखे ट्रांसफार्मर और बेतरतीब लटके-उलझे तार मौत को दावत दे रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार विद्युत सुरक्षा निदेशालय और बिजली विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। न तो कोई सर्वे रिपोर्ट बनी है और न ही लोगों को करंट से बचाने के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं।
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जिले में तीन हजार से अधिक ट्रांसफार्मर हैं। इनमें कई ट्रांसफार्मर असुरक्षित तरीके से रखे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी संख्या सबसे अधिक है। रखरखाव पर ध्यान न दिए जाने के कारण ये जानलेवा हो सकते हैं। बरसात में ट्रांसफार्मर जलने और उनके नजदीक में लगे विद्युत खंभों में करंट दौड़ने की संभावना बढ़ जाती है। इससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। इसी तरह कई क्षेत्रों में हवा में झूल रहे बेतरतीब तार बेहद खतरनाक हैं। पिछले साल मूसलाधार बारिश के दौरान सीपरी बाजार क्षेत्र के जर्मनी अस्पताल के पास रखे ट्रांसफार्मर और खंभे में करंट उतर आया। चपेट में आने से दो गायों की मौत हो गई थी। इसी तरह अन्य स्थानों पर भी करंट की चपेट में आने से कई जानवर मर गए थे।
नियम है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अवर अभियंता व कर्मचारी हर तीन माह में सर्वे कर ऐसे ट्रांसफार्मरों और बेतरतीब तारों की रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विद्युत अधिकारियों को सौंपें, ताकि समय रहते उनको पूर्ण रूप से सुरक्षित किया जा सके। लंबे समय से विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने ऐसी कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की है।
जिले के ज्यादातर ट्रांसफार्मरों को चबूतरे पर रखने के बाद फेंसिंग कराई जा चुकी है, जो बचे हैं उनको भी सुरक्षित किया जा रहा है। बारिश में कभी- कभी ट्रांसफार्मर के पास लगे खंभे का इंसुलेटर क्रेक होने के बाद करंट बाहर बहने लगता है। हालांकि, ऐसे मामलों में लाइन तुरंत बंद हो जाती है।
आरएन सिंह, मुख्य अभियंता (वितरण)।
ट्रांसफार्मर रखने के ये हैं मानक
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- ट्रांसफार्मर के आसपास दस फीट तक कोई भवन नहीं होना चाहिये।
- ट्रांसफार्मर को दो फुट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित करना चाहिए।
- ट्रांसफार्मर के चारों तरफ लोहे की जाली की फेंसिंग होनी चाहिए।
- ट्रांसफार्मर की नियमित पेट्रोलिंग (देखरेख) होनी चाहिए।
- बिजली के तार भवनों से कम से कम पांच फीट दूरी पर होने चाहिये।
सतर्क रहिए
बारिश के दौरान ट्रांसफार्मर और विद्युत खंभों के आसपास नहीं खड़े हों। विद्युत खंभों को नहीं छूना चाहिए। ट्रांसफार्मरों के आसपास दुकान नहीं लगाएं। ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखें। झूलते तारों के नीचे न तो खुद खड़े हों न ही वाहन खड़े करें।
सुरक्षा किट नहीं
बिजली के तार और ट्रांसफार्मर दुरुस्त करने वाले कर्मचारियों के पास दस्ताने, कवर्ड प्लास, सेफ्टी बेल्ट, बरसाती जूते, रेनकोट, टार्च आदि होना आवश्यक है। लेकिन ज्यादातर को ये सुरक्षा किट नहीं उपलब्ध करवाई गई है।
मुआवजा ले सकते हैं
करंट लगने से होने वाली मौतों पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा मिलता है। शासन ने इंसान की मौत पर डेढ़ लाख रुपये और जानवर की मौत पर पांच हजार रुपये मुआवजे का प्रावधान कर रखा है। इसके लिए हादसे में मारे गए या घायल व्यक्ति के परिजन निर्धारित फार्म भरकर सुरक्षा निदेशालय को देना होगा। इसकी जांच होगी। यदि विद्युत विभाग की गलती से हादसा हुआ है तो संबंधित व्यक्ति को मुआवजा मिलेगा।

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