ट्रेनों में मची आरक्षण को लेकर मारामारी

Jhansi Updated Wed, 07 May 2014 05:31 AM IST
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झांसी। जो लोग गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं, उनकी यात्रा पर ग्रहण लग सकता है। दरअसल, अगले पचास दिन तक का आरक्षण अधिक तर ट्रेनों में फुल है। यहां तक कि लोग ब्रेक जर्नी कर अलग- अलग ट्रेनें पकड़कर गंतव्य तक पहुंचने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन ऐसा भी संभव नहीं हो पा रहा है।
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बच्चों के स्कूलों में छुट्टियां होनी शुरू हो गईं हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग बच्चों के साथ तीर्थ व पर्यटक स्थलों पर जाने की योजना बना रहे हैं। कोई परिवार के साथ हरिद्वार, वैष्णो देवी, शिरडीके र्साइं बाबा या तिरुपति बालाजी के दर्शनों को जाना चाहता है तो कोई मौज मस्ती के लिए गोवा, शिमला, कुल्लू - मनाली और मुंबई जाना चाहता है। वहीं, दूसरे शहर में सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में काम करने वाले लोग अपने परिवार से मिलने के लिए घर जाने की तैयारी में लगे हुए हैं। लेकिन, ट्रेनों में आरक्षण नहीं मिलने के कारण उनकी परेशानी बढ़ गई है। यहां से गुजरने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों में मई और जून में जगह नहीं है। मजबूरी में लोग वेटिंग में आरक्षण ले रहे हैं।
आरक्षण की सबसे अधिक मांग गोवा एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस, मालवा एक्सप्रेस, कुशीनगर एक्सप्रेस, पुष्पक एक्सप्रेस, उद्योग नगरी एक्सप्रेस, अंडमान एक्सप्रेस, पंजाब मेल, बुंदेलखंड एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस, देहरादून उज्जैनी एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, पठानकोट एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम एक्सप्रेस, इंदौर- राजेंद्र नगर एक्सप्रेस, गोरखपुर लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस, आंध्रा एक्सप्रेस, स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस, आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति तिरुपति एक्सप्रेस में है। इन ट्रेनों में मई व जून माह में वेटिंग चल रही है। इसके बाद भी यात्रा तिथि तक आरक्षण क्लीयर होने के भरोसे में लोग आरक्षण करा रहे हैं। वेटिंग लेने के लिए भी आरक्षण काउंटरों पर लंबी- लंबी कतारें लग रहीं हैं।
मंगलवार को आरक्षण कराने पहुंचे सदर बाजार निवासी सुभाष राय ने बताया कि उसने परिवार के साथ वैष्णो देवी जाने का प्लान बनाया है, लेकिन आरक्षण क्लीयर नहीं मिलने के कारण असमंजस में हैं। वहीं, दोस्तों के साथ गोवा जाने को इच्छुक सिविल लाइन निवासी पंकज अग्रवाल आरक्षण क्लीयर नहीं मिलने के कारण परेशान दिखे।

तत्काल टिकट भी आसान नहीं
झांसी। यात्रा तिथि के एक दिन पहले से मिलने वाले तत्काल टिकट के लिए भी मारामारी चल रही है। यात्रियों को अधिक किराया देने के बाद भी बर्थ नहीं मिल पा रही है। तत्काल टिकट लेने के लिए लोग सुबह चार बजे से ही लाइन में लग जाते हैं, लेकिन बर्थों की संख्या कम होने के कारण उन्हें मायूस होना पड़ रहा है। मालूम हो कि तत्काल टिकट में यात्रा किराए के अलावा सौ से तीन सौ रुपये तक अतिरिक्त देने पड़ते हैं।

ट्रेन की जगह सड़क मार्ग का रास्ता अपना रहे
बुंदेलखंड के दर्जनों लोग प्रतिदिन अस्थियां विसर्जित करने के लिए इलाहाबाद जाते हैं। ग्वालियर व झांसी से जाने वाले ऐसे सभी यात्रियों के लिए ग्वालियर से वाराणसी के मध्य चलने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस सबसे अच्छी गाड़ी है। यह गाड़ी रात में झांसी से चलकर सुबह इलाहाबाद पहुंचा देती है। इसी तरह वापसी में रात के समय इलाहाबाद से चलकर अगले दिन सुबह झांसी आ जाती है। मगर अब बुंदेलखंड एक्सप्रेस में भी अंतिम दिनों में आरक्षण मिलना मुश्किल भरा हो गया है। वेटिंग का टिकट लेने पर यात्रियों को धक्का खाते हुए इलाहाबाद तक पहुंचना पड़ता है। साथ में महिलाएं हों तो यात्रा और भी अधिक मुश्किल हो जाती हैं। इस कारण अब लोग सड़क मार्ग से इलाहाबाद जाना अधिक श्रेयष्कर समझ रहे हैं।
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