चौहरा हत्याकांड राजनीतिक कारणों से नहीं: डीआईजी

Jhansi Updated Sat, 25 Jan 2014 05:51 AM IST
झांसी। कानपुर हाईवे के पिछोर लिंक रोड पर हुए सनसनीखेज चौहरे हत्याकांड को किसी राजनीतिक कारण से नहीं बल्कि अपने चहेतों को ही ठेका देने की वजह से उपजे आक्रोश के कारण अंजाम दिया गया। अब तक की तफ्तीश और हत्याभियुक्त से हुई पूछताछ के बाद शुक्रवार को झांसी रेंज के डीआईजी ने साफ किया है कि इस मामले में पुलिस की जांच सही दिशा में है और कदम दर कदम सफलता भी हाथ लग रही है। इससे पहले जोनल आईजी सुनील गुप्ता ने भी हत्याकांड के लिए राजनीतिक कारणों को जिम्मेदार मानने से इनकार कर दिया था।
डीआईजी विजय कुमार गर्ग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस वारदात को गिरफ्तार किए गए नामजद अभियुक्त हरीओम अड़जरिया ने अपने भतीजे सत्यव्रत अड़जरिया और भांजे शीलू के साथ मिल कर अंजाम दिया था। हरीओम की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त शेवरोले कार यूपी 80 एजे 1315 और बंदूक को पुलिस ने बरुआसागर थानांतर्गत अंजनी माता मंदिर के जंगल से बरामद कर लिया है।
डीआईजी ने बताया कि वर्ष 2005 और 2010 के सरपंच का चुनाव मृतक बृजेश तिवारी के परिवार के लोगों ने जीता था। इससे पहले आरोपी पक्ष अड़जरिया परिवार चुनाव जीतता रहा था। लगातार हार और पंचायत के ठेके तिवारी परिवार द्वारा अपने चहेतों को देने की वजह से उनके बीच उपजी रंजिश खूनी हो गई। उन्होंने बताया कि हरीओम के पास 315 बोर की लाइसेंसी राइफल व पत्नी मारा अड़जरिया के पास 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक है। इस हत्याकांड में हरीओम व उसके भांजे तथा भतीजे ने इन दोनों ही असलहे से फायरिंग की। हत्याकांड को अंजाम देने के बाद तीनों कार से दिल्ली की ओर भाग निकले। बंदूक के बैरल में फंसे दो जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस दौरान एसएसपी श्रीपर्णा गांगुली, एसपी देहात दिनेश सिंह, इंस्पेक्टर जेपी यादव, राजेश कुमार, राकेश कुमार आदि मौजूद थे।
सत्ताधारी दल पर आरोप से देनी पड़ रही सफाई
झांसी। चौहरा हत्याकांड में आरोपी अड़जरिया परिवार के समाजवादी पार्टी से कथित निकटता के कारण सत्ताधारी दल विरोधियों के निशाने पर है। खासकर भाजपा ने सपा पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप जड़ा है। पिछले दिनों भाजपा नेत्री उमा भारती ने खुल कर बयान भी दिया था। माना जा रहा है कि इस तरह के आरोपों को देखतेे हुए ही पुलिस ने स्थिति स्पष्ट की है।

यह था मामला
झांसी। बीते 19 जनवरी की शाम कानपुर हाईवे के पिछोर लिंक रोड पर कार संख्या एमपी 36 सी- 1177 से अपने रिश्तेदार के घर आयोजित टीका समारोह में हिस्सा लेने जा रहे टीकमगढ़ के सेंदरी थानांतर्गत गढ़कुंडार निवासी बृजेश कुमार तिवारी, उनकी सरपंच पत्नी बबली, पुत्र सुनीत व भतीजे मयंक की कार सवार हत्यारों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी थी। इस मामले में मृतक बृजेश के भतीजे नीरज तिवारी ने ओमप्रकाश अड़जरिया, हरीओम अड़जरिया, ओमकार अड़जरिया पुत्रगण रामस्वरूप अड़जरिया, सत्यव्रत अड़जरिया पुत्र ओमप्रकाश अड़जरिया, नाजिर खां पुत्र रसूल खां, तौफीक खां पुत्र रुस्तम खां, तेज सिंह पुत्र श्रीपत पाल, पप्पू पुत्र सरू खंगार व तीन अन्य के खिलाफ रिपोर्ट कराई थी। इस मामले में पुलिस ने अब तक तेज सिंह और हरीओम अड़जरिया को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य अभियुक्तों की तलाश जारी है।

शिकायत पर प्रशासन ने नहीं किया था गौर
झांसी। हत्याभियुक्त हरीओम अड़जरिया ने पुलिस को बताया कि तिवारी परिवार के सरपंचों के कार्यकाल में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्रशासन से शिकायत की गई थी, लेकिन प्रशासन ने अज्ञात कारणों से कोई कार्रवाई नहीं की। इस बात से आक्रोश गहरा गया। पुलिस तफ्तीश में यह भी सामने आया है कि तिवारी परिवार की मजबूत हो रही आर्थिक स्थिति ने भी आग में घी का काम किया। ईर्ष्या और गुस्से में आरोपियों ने इस कांड को अंजाम दिया।

कार के रंग का होगा मिलान
झांसी। हत्या में प्रयुक्त कार का एक हिस्सा पीछे से क्षतिग्रस्त मिला है। इससे स्पष्ट है कि हमलावरों ने ओवर टेक कर कार को रुकवाया। एसएसपी श्रीपर्णा गांगुली ने बताया कि भिड़ंत के समय पीड़ित पक्ष की कार पर लाल रंग के निशान मिले थे। साक्ष्य के लिए हमलावरों की कार के रंग और मृतक की कार पर मिले रंग की जांच फोरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा की जाएगी।

पुलिस ने डॉक्टर को झांसी तलब किया
झांसी। डीआईजी वीके गर्ग ने बताया कि हत्या में प्रयुक्त कार संख्या यूपी 80 एजे- 1315 को सत्यव्रत अड़जरिया ने कुछ समय पूर्व आगरा के नेत्र रोग विशेषज्ञ से खरीदी थी। वहीं, पुलिस सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर ने यह कार डेढ़ लाख रुपये में बेची थी, जिसकी कागजों में लिखा पढ़ी की गई, मगर आरटीओ को सूचना नहीं दी गई। पुलिस ने चिकित्सक को पूछताछ व बयान दर्ज कराने के लिए झांसी तलब किया है।

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