शुद्ध पानी के लिए होगी मारामारी!

Jhansi Updated Sat, 25 Jan 2014 05:51 AM IST
झांसी। डा. नीलाय खरे ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण कुछ फसलों के उत्पादन में गिरावट तो कुछ के उत्पादन में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हो जाएगी। समुद्र किनारे स्थित दुनिया के दर्जनों देश डूब जाएंगे। पहाड़ों पर बर्फ पिघलने से मौसम में भयंकर बदलाव होंगे, जिससे मीठे पानी यानी शुद्ध पानी के लिए मारामारी शुरू हो जाएगी। डिपार्टमेंट आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर के गांधी सभागार में चल रहे इंस्पायर विज्ञान शिविर के प्रथम तकनीकी सत्र में शुक्रवार को वह छात्र- छात्राओं को अर्थ साइंस की विस्तार से जानकारी दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि आक्सीजन की कमी एवं कार्बन डाई आक्साइड की अधिकता के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। धरती गर्म होने से आने वाले समय में अलग- अलग देशों के मौसम में व्यापक बदलाव होंगे। फसल उत्पादन इस कदर प्रभावित होगा कि जिन क्षेत्रों में धान का उत्पादन होता है, वहां दूसरे फसलों की जरूरत होगी। ग्लोबल वार्मिंग की मार से पृथ्वी का कोई भी भाग अछूता नहीं रहेगा।
द्वितीय सत्र में डा. शिल्पा पांडेय ने पुरा वानस्पतिक हालात की जानकारी देते हुए कहा कि पृथ्वी पर करोड़ों साल पहले अलग प्रकार के पौधे थे, जो वातावरण में बदलाव के कारण समाप्त हो गए। पौधे भी प्राकृतिक हालात एवं मानवीय समाज से काफी प्रभावित होते हैं। इन पर सबसे ज्यादा प्रदूषण का असर होता है। तृतीय सत्र में डा. राजेश कपूर ने जैव तकनीकी के क्षेत्र में नए शोध एवं उपलब्धियों को बताया। उन्होंने कहा कि जैव तकनीकी का क्षेत्र नया होने के साथ बहुत व्यापक है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय के जैव तकनीकी सलाहकार प्रो. राजेश कपूर ने कहा कि सीखने या प्रयोग की कोई उम्र नहीं होती है। छोटी सी छोटी प्राकृतिक घटना या वस्तु से सीखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों से काफी कुछ सीखने को मिल सकता है। अपनी जिज्ञासा को सतत बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। दिगाम में प्रश्न नहीं उठने का आशय नए विचारों की कमी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पंकज अत्रि ने कहा कि सफलता के लिए कठिन परिश्रम के साथ क्षमता में वृद्धि भी आवश्यक है। पहले विद्यार्थियों को बहुत बेहतर अवसर उपलब्ध नहीं थे। अब इंस्पायर जैसे कार्यक्रम उनकी क्षमता में बहुत तेजी से वृद्धि कर सकते हैं। यहां देशभर के दर्जनों वैज्ञानिक अपने अनुभव एवं ज्ञान को बांटते हैं। कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागी पुरस्कृत किए गए। बाद में अतिथियों ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए।
इस अवसर पर प्रो. वी के सहगल, प्रो. एम एल मौर्या, डा. सौरभ श्रीवास्तव, डा. मुहम्मद शमीम अंसारी, डा. रेखा लगरखा, डा. सतीश साहनी, डा. अनिल केवट, डा. सचिन उपाध्याय, डा. आलोक वर्मा, डा. गजाला रिजवी, उमेश शुक्ल, डा. बी एस भदौरिया, डा. धर्मेंद्र कंचन, डा. अंजली सक्सेना, डा. मधुर श्रीवास्तव, जय सिंह आदि उपस्थित रहे। डा. राजेश सैनी ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

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