बेटी ही बचाएगी अभियान ने कार्यालयों में दी दस्तक

Jhansi Updated Thu, 23 Jan 2014 05:53 AM IST
झांसी। अमर उजाला की अनूठी पहल ‘बेटी ही बचाएगी’ का कारवां बुधवार को विभिन्न कार्यालयों में पहुंचा। यहां अधिकारियों व कर्मचारियों ने शपथ पत्र भरकर बेटी के हक में शपथ ली।

कलेक्ट्रेट कर्मी आगे आए
बेटी ही बचाएगी अभियान की रंगत बुधवार को कलेक्ट्रेट में भी देखने को मिली। यहां विभिन्न अनुभागों के कर्मचारियों ने शपथ पत्र भरकर बेटी के हक में शपथ ली। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बेटा और बेटी, दोनों ही कुदरत का दिया हुआ उपहार हैं। कन्या भ्रूण हत्या कुदरत के साथ खिलवाड़ है। इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ी को भुगतना होगा। इसके प्रति हमें सचेत होने की जरूरत है, ताकि आने वाले संकट को टाला जा सके। इसमें ऐसे अभियान की महती भूमिका है।

स्वास्थ्य विभाग ने ली शपथ
स्वास्थ्य विभाग में बेटी के हक में शपथ पत्र भरते हुए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. ए के त्रिपाठी ने कहा कि बेटियों की घटती संख्या से सामाजिक संरचना छिन्न - भिन्न हो रही है। जबकि, बेटी ही समाज की धुरी हैं। बेटियों को दबाने या पीछे रखने की परंपरा को समाप्त करना होगा। उन्हें सम्मान व बराबरी का दर्जा देना समय की मांग है। शपथ पत्र भरने वालों में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आर एस वर्मा, डा. सुधीर कुलश्रेष्ठ, डा. एस के खत्री, इंदर यादव, दीपक, आमोद दीक्षित आदि शामिल रहे।

शिक्षिकाएं भी आईं आगे
बेटी ही बचाएगी अभियान का बुधवार को लोकमान्य तिलक कन्या इंटर कालेज की शिक्षिकाएं भी हिस्सा बनीं। उन्होंने बढ़ चढ़ कर अमर उजाला के इस अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। इस अवसर पर शिक्षिकाओं ने कहा कि आज समाज का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है, जहां बेटियों ने अपनी प्रतिभा का परचम नहीं फहराया है। कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराई से लड़ने के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना होगा। यह समाज व देश सभी के लिए श्रेयस्कर होगा।
बेटियों ने ली बेटी के हक में शपथ
झांसी। बुधवार को विभिन्न शिक्षण संस्थानों की छात्राओं ने शपथ पत्र भरकर बेटी के हक में शपथ ली। इस अवसर पर उन्होंने अपने विचार भी रखे।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के उपलक्ष्य में पत्रकार भवन में आयोजित कार्यक्रम में छात्रा विनीता साहू ने कहा कि लड़कियों को शत प्रतिशत शिक्षित होना आवश्यक है। अभिभावकों को अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा प्रदान करनी चाहिए। निशा प्रजापति के अनुसार लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले कतई नहीं करना चाहिए। समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा का खात्मा जड़ से होना चाहिए। इसके लिए लड़कियों को भी विशेष रूप से जागरूक होना आवश्यक है। शहनाज बानो के मुताबिक भारतीय संविधान ने सभी को सामान अधिकार प्रदान किए है। ऐसे में नगरीय क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागृत होना आवश्यक है। छात्रा सोनम ने कहा कि बेटा और बेटियों में अंतर करने की कोई वजह नहीं है। देश, परिवार, समाज के प्रति जिम्मेदारी संभालने के मामले में जितने लड़के गंभीर होते हैं उतनी ही लड़कियां भी गंभीर होती हैं। खेल, वित्त, राजनीति, समाज सेवा सहित सभी क्षेत्रों में लड़कियों ने देश का नाम विश्व में रोशन किया है।

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