फाइलेरिया फैला

Jhansi Updated Sun, 24 Nov 2013 05:44 AM IST
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झांसी। जनपद में फाइलेरिया ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। जिले में सौ से अधिक मरीज इस रोग से पीड़ित पाए गए हैं, जिससे हड़कंप है। मलेरिया विभाग ने प्रभावित इलाकों के मरीजों के खून की जांच का निर्णय लिया है।
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वैसे, जनपद में यह रोग फैलने की जानकारी भी नहीं होती, लेकिन 2015 तक फाइलेरिया रोग को जड़ से समाप्त करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अगस्त माह में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन ने मलेरिया विभाग को जनपद में फाइलेरिया के मरीज चिह्नित करने का कार्य सौंपा। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने सितंबर व अक्तूबर में गांव-गांव सर्वे किया तो 102 मरीज फाइलेरिया से पीड़ित पाए गए। सर्वे के दौरान मरीजों की केस हिस्ट्री तैयार की गई। गांव, नाम, पता, उम्र, लिंग, जाति, रोग प्रभावित अंग, बीमारी का इतिहास, स्थायी निवास की स्थिति व वर्तमान हालात आदि सभी कुछ दर्ज किया गया। विभाग ने जिन गांवों में मरीज मिले हैं वहां के पांच सौ लोगों के रक्त की जांच करने का निर्णय लिया है। रक्त पट्टिका की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। एमडीए (मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) का निर्देश आने के बाद वृहद स्तर पर फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाया जाएगा।
‘ लंबे समय से माना जा रहा था कि झांसी में फाइलेरिया का कोई मरीज नहीं है, लेकिन सर्वे के बाद यह भ्रम टूट गया है। अगले माह से खून के नमूने एकत्रित करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।’
आर के गुप्ता
जिला मलेरिया अधिकारी


क्या है फाइलेरिया?
झांसी। यह वुचेरेरिया बैंकोफ्टाई नामक परजीवी से होने वाली बीमारी है जोकि, क्यूलैक्स फैटीगन्स या क्यूलैक्स क्विनक्यूफैसियेटस मानक मच्छरों द्वारा फैलाई जाती है। यह मच्छर बीमार व्यक्ति का खून चूसने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति का खून चूसते समय खून में कृमियों को छोड़ देता है। एक बार शरीर में जाने के बाद यह परजीवी अपना जीवन चक्र शुरू कर देते हैं। प्रजनन के माध्यम से खून में लाखों परजीवी पैदा होते हैं, जोकि विचरण करते रहते हैं। यह शरीर के लिम्फेटिक प्रणाली (खून प्रणाली) एवं त्वचा के ऊतकों पर प्रभाव डालते हैं।

लक्षण :
- बुखार, कंपकपी, सर्दी,
- शरीर पर चकत्ते
- शरीर के नीचे के हिस्सों में सूजन

बचाव :
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें
- मच्छरों से बचाव के साधन अपनाएं
- पानी के गड्ढों को भर दें

कहां हैं कितने रोगी ------------------
ब्लॉक ---- रोगी
गुरसरांय ---- 05
बंगरा ---- 40
बड़ागांव ---- 18
मोंठ ---- 05
चिरगांव ---- 03
बामौर ---- 01
मऊरानीपुर ---- 20
बबीना ---- 03
झांसी शहर ---- 07
-------------------
कुल ---- 102

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम
झांसी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य पालिसी 2002 के तहत लिम्फैटिक फाइलेरिसेसिस उन्मूलन (फाइलेरिया उन्मूलन ) का संचालन प्रदेश के 75 में से 51 जनपदों में किया जा रहा है। भौगोलिक स्थिति एवं मच्छरों के प्रभाव को देखते हुए शेष 24 जनपदों में इसका संचालन नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर बाकी जनपदों में भी यह अभियान चलाया जाएगा।

अनोखी जांच बन सकती है परेशानी
झांसी। फाइलेरिया के परजीवी दिन में व्यक्ति के हृदय के आसपास रहते हैं, जबकि रात के समय यह खून के माध्यम से पूरे शरीर में खासतौर से प्रभावित अंक में विचरण करते हैं। इस कारण इस रोग की जांच भी अनोखे तरीके से करनी होती है। बीमारी की जांच रात में सोते समय व्यक्ति के खून के नमूने लेकर की जाती है। मलेरिया विभाग ने जांच का समय रात आठ से 12 बजे निर्धारित किया है। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय बिना बिजली व दूसरी सुविधाओं के अभाव में जांच आसान नहीं होगी।
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