स्वास्थ्य बीमा योजना: पुरानी सूची बन रही बाधा

Jhansi Updated Sat, 23 Nov 2013 05:44 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
झांसी। शुरू होते ही स्वास्थ्य बीमा योजना लड़खड़ाने लगी है। एक दशक पुरानी सूची के कारण गांवों में पचास प्रतिशत से भी कम कार्ड बने हैं। बड़ागांव ब्लॉक में 33 व चिरगांव में मात्र 44 प्रतिशत कार्ड बने हैं। मोंठ में भी यही स्थिति है।
विज्ञापन

राष्ट्र्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 10 अक्तूबर से कार्ड बनाने का कार्य शुरू किया गया। कार्ड ब्लॉकवार बनाए जा रहे हैं। सबसे पहले बड़ागांव एवं चिरगांव ब्लॉक में कार्ड बनाने के शिविर लगाए गए। यहां पर कार्ड बनाए जाने का कार्य एक माह तक चला। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बड़ागांव में 6,624 लाभार्थियों के कार्ड बनाए जाने थे, लेकिन यहां 2,210 (33 प्रतिशत) लोगों के कार्ड बने। इसी तहत, चिरगांव ब्लॉक में 9,349 लाभार्थियों के सापेक्ष मात्र 3,841 (44 प्रतिशत) के बीमा कार्ड बने।
अधिकारियों का कहना है कि कम कार्ड बनने की मुख्य वजह सूची का एक दशक पुराना होना है। गांव में लगाए जा रहे शिविर में उन्हीं लाभार्थियों के कार्ड बनाए जा रहे हैं, जिनके नाम पुरानी सूची में दर्ज हैं। यह सूची श्रम एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा सन 2002 में तैयार की गई थी। इसमें उस समय दर्ज किए गए बीपीएल एवं अंत्योदय लाभार्थियों के नाम हैं, जबकि एक दशक के दौरान में इसमें काफी बदलाव आ चुका है। इस सूची में दर्ज कई लोग दिवंगत हो चुके हैं। सूची पुरानी होने के कारण गांव में लाभार्थी ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। स्थिति यही रही तो इस बार भी पचास प्रतिशत से कम लोगों के बीमा कार्ड ही बनाए जा सकेंगे। 11 नवंबर से कार्ड बनाने का कार्य मोंठ ब्लाक में शुरू किया गया है। अधिकारियों की मानें तो यहां पर भी स्थिति अच्छी नहीं है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनोद यादव का कहना है कि सूची पुरानी होने के कारण लाभार्थियों को ढूंढने में समस्याएं आ रहीं हैं।



केंद्र व राज्य सरकार की सूची में अंतर
झांसी। केंद्र सरकार के श्रम एवं मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा सन 2002 में बीपीएल एवं अंत्योदय लाभार्थियों की सूची तैयार की गई थी। राज्य सरकार ने जनपद के बीपीएल एवं अंत्योदय लाभार्थियों की सूची अलग से तैयार की है। दोनों सूची में लाभार्थियों की संख्या भी अलग-अलग है। राज्य सरकार द्वारा बनाई गई सूची में बीपीएल एवं अंत्योदय लाभार्थियों की संख्या करीब सवा लाख है, जबकि केंद्र की सूची में मात्र 94,501 लाभार्थी दर्ज हैं। बीमा योजना के लिए केंद्र की सूची को आधार बनाया गया है। सूची पुरानी होने के कारण कार्ड मेकिंग शिविर में हंगामे की स्थिति बनी रहती है। यहां पर क्षेत्र के बीपीएल लाभार्थी पहुंच जाते हैं। वह भी कार्ड बनाने की मांग करते हैं, जबकि सूची में उनका नाम नहीं होता है। अधिकारी कार्ड बनाने से मना करते हैं तो गांव वाले उनसे उलझ जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us