फिर सामने आया रीबोर लायक हैंडपंप का सच

Jhansi Updated Fri, 22 Nov 2013 05:45 AM IST
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झांसी। पेयजल समस्या के समाधान के लिए पानी नहीं देने वाले हैंडपंप का रीबोर कराने के लिए बनाई गई सूची फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिला विकास अधिकारी हीरालाल द्वारा की गई रैंडम जांच में करीब आधे हैंडपंप रीबोर लायक नहीं पाए गए। इतना ही नहीं, सूची में दर्ज कुछ हैंडपंप मौके पर भी नहीं मिले।
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ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या के समाधान के लिए जरूरत के अनुसार हैंडपंप रीबोर कराए जाने हैं। इसके लिए जल निगम ने रीबोर लायक हैंडपंप की सूची तैयार की। मुख्य विकास अधिकारी अशोक कुमार ने सूची का सत्यापन कराने का निर्णय लिया। इसकी जिम्मेदारी डीडीओ को सौंपी गई। एक सैकड़ा से अधिक हैंडपंप की सूची में से डीडीओ ने बड़ागांव ब्लाक के ग्राम तैंदाल, बबीना ब्लाक के ग्राम डेली और बमेर में पांच- पांच हैंडपंपों की जांच की। ग्राम तैंदाल में करन सिंह के चबूतरे पर लगे हैंडपंप की जांच के दौरान पाया गया कि गली के उस पार रघुवीर यादव के घर के पास लगे हैंडंपप का हत्था हटाकर सबमर्सिबल मोटर लगाकर पानी निकाला जा रहा था। इस पर जल निगम को हैंडपंप से अनधिकृत कब्जा हटवाने के निर्देश दिए गए। उक्त हैंडपंप सही पाए जाने के कारण करन सिंह के चबूतरे के हैंडपंप को रीबोर लायक न मानकर उससे 75 मीटर की दूरी पर स्थित सहरिया बस्ती में हैंडपंप लगाने की सिफारिश की गई। बरुआ नाला शंकर जी मंदिर के पास लगे हैंडपंप को भी रीबोर की जरूरत बताई गई थी, लेकिन मौके से हैंडपंप गायब था। इस कारण निरस्त कर दिया गया।
ग्राम डेली में चंदन सिंह के घर के पास लगे हैंडपंप की जांच के दौरान डीडीओ ने पाया कि हैंडपंप से सट कर मकान बनाया जा रहा है। हैंडपंप पर कब्जा की संभावना के मद्देनजर उसे निरस्त कर दिया गया तथा बदले में लखन राजपूत के बाडे़ के बाहर हैंडपंप लगाने के निर्देश दिए गए। कामता साहू के मकान के पास लगे हैंड पंप का कन्वर्जन हेड ( ऊपरी हिस्सा) निकाल कर दूसरे हैंडपंप में लगा पाया गया। हैंडपंप पानी देने की स्थिति में होने के कारण उसे रीबोर योग्य नहीं पाया गया।
ग्राम बमेर के हालात भी अन्य गांवों से अलग नहीं थे। यहां नंदराम अहिरवार के चबूतरे पर लगे हैंडपंप की जांच में पाया गया कि गायब होने के डर से नंदराम ने उसका हत्था और हेड घर के अंदर रख लिया था। मुहल्ले वालों ने बताया कि हैंडपंप पानी देता है। इसलिए उसे भी रीबोर लायक नहीं पाया गया। डीडीओ ने कहा कि यदि छोटी- मोटी मरम्मत कराना हो तो ग्राम पंचायत से कराई जा सकती है। इसी तरह, माते बाबा मंदिर के पास हैंडपंप के बारे में ग्रामवासियों ने बताया कि वह पानी तो देता है, लेकिन पाइप लाइन नीचे गिर जाने के कारण बंद है। इस पर जलनिगम को मरम्मत कराकर ग्राम पंचायत से भुगतान के निर्देश दिए गए। फूटी गढ़ी के पास विधायक निधि से लगाए गए हैंडपंप की जांच में पाया गया कि उक्त हैंडपंप गांव से काफी दूर जंगल में है। उसका उपयोग नहीं होने के कारण रीबोर कराए जाने की आवश्यकता नहीं है। रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंप दी गई है।
गौरतलब है कि पूर्व में इसी तरह की जांच के दौरान रीबोर लायक हैंडपंप की सच्चाई सामने आने पर सीडीओ ने सूची निरस्त कर नए सिरे से बनाने के निर्देश दिए थे। एक बार मामला पकड़े जाने के बाद भी स्थिति जस की जस है।

एक का सामान दूसरे में डाला जा रहा
झांसी। डीडीओ की जांच में कई जगह पाया गया कि एक हैंडपंप खराब होने की स्थिति में ग्राम पंचायत द्वारा दूसरे हैंडपंप में उसका सामान डलवाया जा रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए उन्होंने जिला पंचायत राज विभाग को पत्र लिखने को कहा है, ताकि इस प्रवृत्ति पर रोक लगे। साथ ही ग्राम पंचायतों को यह निर्देश देने को भी कहा गया है कि अकुशल मिस्त्रियों से हैंडपंप ठीक न कराएं।
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