किसानों को पंप खरीदना लग रहा फायदे का सौदा

Jhansi Updated Thu, 21 Nov 2013 05:44 AM IST
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झांसी। प्रदेश सरकार की अनदेखी के कारण किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। सिंचाई विभाग ने किसानों को अस्थाई फसली संयोजन देना शुरू कर दिया है, लेकिन किसान बढ़े रेट के कारण कनेक्शन लेने की जगह डीजल संचालित पंप खरीदने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। अब तक मात्र पचास किसानों ने ही विद्युत संयोजन लिए हैं।
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विद्युत विभाग फसली सिंचाई के लिए किसानों को सिंगल फेस पर एक किलोवाट, दो किलोवाट व तीन किलोवाट का अस्थायी विद्युत संयोजन (तीन माह के लिए) प्रदान करता है। किसानों को कम से कम दो किलोवाट का संयोजन लेना पड़ता है। विभाग ने इस साल से अस्थायी संयोजन शुल्क बढ़ा दिया है। पिछले साल दो किलोवाट के संयोजन का शुल्क 7701 रुपये से बढ़ाकर 7950 रुपये व तीन किलोवाट का 10,396 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये कर दिया है। इस कारण गरीब व मध्यम वर्गीय किसान संयोजन लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। पिछले साल इस समय तक जनपद के सात सौ गांवों के चार सौ से अधिक किसान संयोजन ले चुके थे, जबकि इस बार यह संख्या सिर्फ पचास तक ही पहुंच सकी है। इसका सबसे बड़ा कारण बिजली का समय पर नहीं मिलना है। विभाग ने इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह आठ बजे से दस बजे तक, अपराह्न एक बजे से शाम पांच बजे तक व रात ग्यारह बजे से दो बजे तक का रोस्टर निर्धारित कर रखा है। लेकिन विभाग इस रोस्टर का पालन नहीं कर पा रहा है। इस रोस्टर के अलावा बिजली की आवाजाही बनी रहती है। यही कारण है कि किसान अस्थाई संयोजन लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। उनकी रुचि पंप सेट खरीदने में अधिक है। किसानों का कहना है कि जितनी धनराशि संयोजन लेने में लग रही है, उससे भी कम डीजल पंप सेट को चलाने में लग रहा है। साथ ही वह जब चाहे डीजल पंप चलाकर सिंचाई कर सकते हैं, जबकि विद्युत संयोजन में लाइट के इंतजार में बुरा हाल रहता है। दूसरा, अगर ट्रांसफार्मर फुंक जाए, तो उसे बदलने में कम से कम एक माह का समय लग जाता है। यह भी तब जब वह विभाग का बराबर चक्कर लगाया जाए। किसान पंद्रह दिसंबर तक ही संयोजन लेते हैं, ऐसे में विभाग को पिछले साल के एक हजार संयोजन के लक्ष्य को छू पाना भी मुश्किल लग रहा है।
मिलीभगत मिली तो निलंबित होगा कर्मचारी
झांसी। विद्युत विभाग के उपखंड अधिकारी ग्रामीण मुकेश कुमार ने कहा कि उम्मीद से कम संयोजन होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि संयोजन लेने के लिए किसान दलालों के चक्कर में न पड़ें। विधिवत संयोजन लेकर ही बिजली का उपयोग करें। अगर मुफ्त में बिजली जलाने के मामले में उनके कर्मचारी की मिलीभगत पायी जाती है तो उसको तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा। सभी लाइनमैन को अपने क्षेत्र के फीडर पर पड़ रहे लोड की स्थिति जांचने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि चेकिंग के लिए आगरा व आस पास क्षेत्रों से विजिलेंस टीमें बुलाई गईं हैं। यह टीमें जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में चेकिंग शुरू कर देगी।

किसानों को मुफ्त मिलने चाहिए बिजली
झांसी। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश मंत्री चंद्रप्रकाश मिश्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने चुनाव के समय किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। लेकिन, सरकार ने मुफ्त बिजली देने की जगह रेट और बढ़ा दिए। इससे किसानों में आक्रोश है। अगर किसान संयोजन ले भी ले तो उसे पर्याप्त बिजली ही नहीं मिल पा रही है।
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