रोने- धोने नहीं, आंसू पोंछने का विश्वास दिलाने आया हूं

Jhansi Updated Sat, 26 Oct 2013 05:43 AM IST
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झांसी। सधे कदम। आत्मविश्वास से लबरेज चेहरा और बेबाक अंदाज। नरेंद्र मोदी ने भले ही प्रधानमंत्री नहीं चौकीदार की तरह काम करने की बात कही हो, पर उनका अंदाज भावी प्रधानमंत्री से कमतर नहीं था। उन्होंने जिस तरह से अपने भाषण की शुरूआत की व खुद को रोने- धोने वाला नहीं, बल्कि आंसू पोंछने का विश्वास देने वाला बताते हुए बुंदेलखंड के युवाओं को सुनहरे भविष्य के सपने दिखाए तो पूरा प्रांगण मोदी जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा।
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70 से 80 हजार की विशाल भीड़ के समक्ष वीर प्रसूता बुंदेली धरा को प्रणाम करके मोदी ने भाषण की शुरूआत की। उन्होंने सन् 1857 की क्रांति की प्रतीक रोटी व कमल और महारानी लक्ष्मीबाई द्वारा लगाए गए नारे ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बार फिर वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की धरती से आजादी की बिगुल बजेगा। हम लक्ष्मीबाई की धरती पर कमल लेकर आए हैं। लक्ष्मी कमल पर विराजतीं हैं। अत: जहां कमल होगा, वहां लक्ष्मी आएंगी और जहां लक्ष्मी होंगी, वहां रोटी अपने आप आ जाएगी। बुंदेलखंड की बदहाली के लिए उन्होंने कांग्रेस, बसपा और सपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वह न तो आंसू बहाने आए हैं और न आंसू बहाने वालों की कथा सुनाने आए हैं। संकल्प लेने आया हूं कि बुंदेलखंड की कठिनाइयों में पनप रही गरीबी को दूर करूंगा। जनसमूह से सवाल किया कि क्या बुंदेलखंड का विकास नहीं हो सकता? क्या यहां की जनता में दम नहीं है? क्या किसानों में दम नहीं है? उन्होंने कहा कि दम दिल्ली और लखनऊ में नहीं है। फिर सवाल दागा कि यहां नदियां हैं, पानी है, लेकिन फिर भी लोग प्यासे हैं और खेत प्यासे हैं। यहां के किसान क्यों आत्महत्या को मजबूर होते हैं? जवाब भी खुद दिया कि इसकी वजह दिल्ली सल्तनत है, जिसे किसान एवं गरीब की कोई परवाह नहीं है।
उन्होंने बेरोजगारी पर प्रहार करते हुए गुजरात का बुंदेलखंड और उप्र से कनेक्शन जोड़ा। सवाल उठाया कि यहां का नौजवान अपना गांव, बूढ़े माता- पिता को छोड़कर रोजी की तलाश में गुजरात जाता है। यहां के नौजवानों के पसीने से गुजरात चमक रहा है। अगर यही पसीना यहां गिरा होता तो प्रदेश व बुंदेलखंड चमक जाता। बीच - बीच में युवाओं से सवाल करने का अंदाज उन्हें आपस में जोड़ता रहा। यही कारण था कि जमकर तालियां बजीं। कुल मिलाकर नरेंद्र मोदी बुंदेलखंड के विकास का संदेश देने में सफल रहे।
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