पांच साल में दोगुने हो गए टीबी के मरीज

Jhansi Updated Wed, 23 Oct 2013 05:43 AM IST
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झांसी। पिछले पांच साल में जनपद में क्षय रोगियों (टीबी) की संख्या दोगुनी हो गई है। वर्ष 2008 में जहां 450 मरीज चिह्नित किए गए थे, वहीं अब यह आंकड़ा एक हजार के पार पहुंच चुका है। संख्या बढ़ने की मुख्य वजह संक्रमित मरीजों द्वारा बीच में ही इलाज छोड़ देना है।
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डाट्स प्रोग्राम के तहत जनपद में प्रति वर्ष टीबी के मरीजों को चिह्नित कर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। कुल मरीजों में से करीब दस प्रतिशत मरीज बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं। ऐसे मरीजों पर बाद में डाट्स की दवाएं भी असर नहीं करती हैं। उक्त मरीजों को विशेष प्रकार की जांच के बाद नई दवाएं लेनी पड़ती हैं, जो काफी महंगी हैं। जटिल प्रक्रिया व महंगी दवाओं के कारण ये मरीज दुबारा इलाज नहीं लेते हैं। ऐसे मरीज एक साल में अपने आसपास के 10 से 15 स्वस्थ लोगों को संक्रमित कर टीबी का रोगी बना देते हैं। जिला क्षय रोग नियंत्रण विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2008 में 450 मरीज, 2009 में 605, 2010 में 785, 2011 में 816, 2012 में 920 व वर्ष 2013 में अब तक 1022 मरीज चिह्नित किए जा चुके हैं। जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डा. डी के गर्ग का कहना है कि टीबी रोग से बचाव के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन, बीच में इलाज छोड़ने वाले मरीज परेशानी का कारण बने हुए हैं।
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