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ट्रेनें फुल, नहीं मिल रहा आरक्षण

Jhansi Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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झांसी। होली पर जो लोग जम्मू, शिर्डी, मुंबई, कुल्लू मनाली जैसे धार्मिक व पर्यटक स्थलों पर जाने की योजना बनाए हुए हैं, उनको निराश होना पड़ेगा। इन स्थानों को जाने वाली ट्रेनों में आरक्षण मिलना बंद हो गया है। पच्चीस से उनतीस मार्च तक एक भी ट्रेन में आरक्षण नहीं मिल रहा है। ऐसे में लोगों को आरक्षण कार्यालय से निराश लौटना पड़ रहा है।
इस बार होली 26 मार्च को है। अनेक लोग होली पर वैष्णो देवी (जम्मू), शिरडी के सांई बाबा (मनमाड), हरिद्वार आदि तीर्थ स्थानों के अलावा मुंबई, गोवा, शिमला, कुल्लू मनाली आदि पर्यटक स्थलों पर जाते हैं। लेकिन अब तक आरक्षण न कराने वाले लोग रेल गाड़ी से अपने पसंदीदा स्थल जा सकेंगे, यह संभव दिखाई नहीं दे रहा है।

दरअसल, इन स्थानों के लिए जाने वाली सभी ट्रेनों में कन्फर्म आरक्षण नहीं मिल रहा है। जम्मू की तरफ जाने वाली झेलम एक्सप्रेस, अंडमान एक्सप्रेस, हिमसागर एक्सप्रेस, मालवा एक्सप्रेस, जम्मूतवी- जबलपुर एक्सप्रेस, नवयुग एक्सप्रेस में अगले दो महीने तक कोई कन्फर्म सीट उपलब्ध नहीं है। इन ट्रेनों के एसी कोचों में तो अगले सौ दिन तक जगह नहीं है। हां, स्लीपर में अवश्य तीस अप्रैल के बाद कंफर्म आरक्षण मिल रहा है। वहीं शिमला, कुल्लू मनाली के लिए अंबाला, चंडीगढ़ तक जाने वाली पठानकोट एक्सप्रेस व छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस का भी यही हाल है। मनमाड, मुंबई व गोवा की तरफ जाने वाली पंजाब मेल, लखनऊ- मुंबई एक्सप्रेस, लखनऊ- लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस, पुष्पक एक्सप्रेस, गोवा एक्सप्रेस, पठान कोट एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस आदि ट्रेनों में होली के तीन दिन पहले व पांच दिन बाद तक आरक्षण फुल चल रहा है।
जो लोग तिरुपति, चेन्नई, रामेश्वरम जाना चाहते हैं, उनकी इच्छा पूरी हो सकती है। फिलहाल स्वर्ण जयंती, तिरुपति एक्सप्रेस, जी टी एक्सप्रेस, तमिलनाडु एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में बर्थ खाली मिल रही है।


अब तत्काल का ही सहारा
सीमित वेटिंग से बढ़ी यात्रियों की परेशानी

झांसी। रेलवे द्वारा ट्रेन की सभी श्रेणियों में वेटिंग सीमित किए जाने से अब तत्काल टिकट का ही सहारा रह गया है।
दस मार्च 2012 से ट्रेनों में एक सौ बीस दिन पहले आरक्षण टिकट देने की व्यवस्था की गई थी। यह व्यवस्था इसलिए की गई, ताकि लोग समय रहते सीट बुक करा लें, जिससे ऐन मौके पर मारामारी न रहे। लेकिन, आरक्षण खुलने के एक सप्ताह के अंदर ही अधिकांश ट्रेनों में सीटें फुल हो जाती हैं। यात्री इस प्रत्याशा में वेटिंग टिकट ले लेते कि अंतिम समय तक सीट कन्फर्म हो जाएगी। इस वजह से ट्रेनों के स्लीपर कोचों में तीन सौ और वातानुकूलित कोचों में सौ तक वेटिंग टिकट जारी हो जाते थे। टिकट कन्फर्म नहीं होने पर भी ऐसे यात्री ट्रेन में सवार हो जाते, जिससे पहले से आरक्षण लेने वालों को परेशानी होती। इतना ही नहीं, कोचों में भीड़ का फायदा उठाकर बदमाश आपराधिक वारदातों को भी अंजाम देते हैं। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने पिछले माह से टिकटों की लंबी प्रतीक्षा सूची पर लगाम कसकर ट्रेन की सभी श्रेणियों में वेटिंग टिकट देना सीमित कर दिया है। स्लीपर में तीस से पैंतीस और एसी में बारह से पंद्रह तक वेटिंग दी जा रही है। इससे आवश्यकता पर अंतिम समय वेटिंग का टिकट लेकर यात्रा करना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। साथ ही तत्काल आरक्षण की मांग बढ़ गई है। सुबह दस बजे खुलने वाले तत्काल आरक्षण के लिए यात्री तड़के से ही कार्यालय के बाहर कतार लगाकर खड़े हो जाते हैं।

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