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मंगल की जगह बुध को आईं ट्रेन

Jhansi Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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झांसी। अमृतसर से नांदेड जाने वाली 12716 अप सचखंड एक्सप्रेस शाम 7. 48 बजे झांसी आती है। मंगलवार की शाम आने वाली यह गाड़ी साढ़े सत्रह घंटे बाद बुधवार को अपराह्न डेढ़ बजे झांसी आई। इस गाड़ी से जाने वाले दर्जनों यात्रियों को रात स्टेशन पर गुजारनी पड़ी। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि यह गाड़ी धीरे- धीरे इतनी लेट हो जाएगी। यह एक ट्रेन का हाल नहीं है। दिल्ली से आने वाली डेढ़ दर्जन से अधिक ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं। इस कारण बुधवार को दिन भर यात्री आरक्षण रद कराने के बाद दूसरी ट्रेन को किसी तरह पकड़ने के लिए भागमभाग में लगे रहे।
कोहरे से ट्रेनों की लेटलतीफी का बुधवार को भी बुरा हाल रहा। मंगलवार को जहां गाड़ियां तीन से तेरह घंटे की देरी से आई थीं, वहीं बुधवार को यह लेटलतीफी साढ़े सत्रह घंटे तक पहुंच गई। बुधवार को दिल्ली की तरफ से रात के समय आने वाली 12412 अप गोड़वाना एक्सप्रेस सत्रह घंटे, 12824 अप छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति बारह घंटे, 12616 अप जीटी एक्सप्रेस पौने पांच घंटे, 12156 अप हबीबगंज एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे, 12920 अप मालवा एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे, 12628 अप कर्नाटक एक्सप्रेस साढ़े नौ घंटे, 12622 अप तमिलनाडु एक्सप्रेस साढ़े नौ घंटे, 11058 अप पठान कोट एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे, 12722 अप सदर्न एक्सप्रेस नौ घंटे, 12448 अप यूपी संपर्क क्रांति साढ़े पांच घंटे, 12191 नई दिल्ली जबलपुर एक्सप्रेस साढ़े सत्रह घंटे, 12716 अप सचखंड एक्सप्रेस साढ़े सत्रह घंटे, 12724 अप आंध्रा एक्सप्रेस साढ़े छह घंटे, 18238 अप छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सात घंटे,12138 अप पंजाब मेल छह घंटे, 12190 अप महाकौशल एक्सप्रेस ग्यारह घंटे, 12448 अप यूपी संपर्क क्रांति सवा पांच घंटे, 12280 अप ताज एक्सप्रेस सवा तीन घंटे लेट आई।
इसके अलावा नई दिल्ली से भोपाल जाने वाली 12202 अप शताब्दी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से साढ़े तीन घंटे की देरी से झांसी आई। इस कारण शताब्दी एक्सप्रेस के इंतजार में वीआईपी यात्रियों का बुरा हाल रहा। मजबूरन अधिकांश यात्रियों ने टिकट निरस्त कराने में ही भलाई समझी। शताब्दी एक्सप्रेस के भोपाल विलंब से पहुंचने के कारण वापसी में भी यह ट्रेन चार घंटे विलंब से आई व ताज एक्सप्रेस भी झांसी से अपराह्न साढ़े तीन बजे की जगह शाम साढ़े छह बजे रवाना हो सकी। इसी तरह वाराणसी से आने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस साढ़े तीन घंटे, कानपुर की ओर से आने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस दो घंटे, साबरमती एक्सप्रेस ढाई घंटे आदि गाड़ियां लेट आईं। वहीं, डाउन की पंजाब मेल भी पांच घंटे देरी से झांसी आई।
ट्रेनों की जानकारी लेने के लिए पूछताछ कार्यालय में यात्रियों का जमघट लगा रहा। तीन घंटे से अधिक देरी से आने वाली ट्रेनों के यात्रियों को दूसरी गाड़ी में जाने के लिए परमिट किया गया। ट्रेनों की लेटलतीफी ने दर्जनों यात्रियों को टिकट निरस्त कराने पर मजबूर कर दिया। बुधवार को तीन सौ से अधिक यात्रियों ने अपने आरक्षित टिकट रिफंड कराए।


ड्राइवरों को थमाए एमटीआरसी सेट
कोहरे में फूंक- फूंक कर उठाए जा रहे हैं कदम
आटोमेटिक सिगनलिंग प्रणाली सेक्शन में बरती जाएगी सतर्कता
झांसी। रेल प्रशासन कोहरे में ट्रेनों के संचालन में फूंक -फूंक कर कदम उठा रहा है। इसी के तहत झांसी - दिल्ली के मध्य जिन स्टेशनों पर मोडीफाइड आटोमेटिक सिगनलिंग प्रणाली को लागू किया गया है वहां कोहरे के दौरान कोई हादसा न हो, इसको ध्यान में रख कर दिल्ली जाने वाले मेल व एक्सप्रेस ड्राइवरों को मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्यूनिकेशन हैंड सेट दिए गए हैं। इस सेट की मदद से ड्राइवर अगले स्टेशन के स्टेशन मास्टर से टोकन नंबर लेगा, तभी गाड़ी को आगे बढ़ा सकेगा।
यदि दो स्टेशनों के बीच तीनों आटोमेटिक सिगनल (एडवांस स्टार्टर सिगनल, मोडीफाइड सेमी आटोमेटिक सिगनल व होम सिगनल) हैं तो ट्रेन का संचालन मोडीफाइड आटोमेटिक सिगनलिंग प्रणाली के अंतर्गत हो रहा है। कोहरे के दौरान ऐसे रेल खंडों में अगर चालक को कोई आटोमेटिक सिगनल या सेमी आटोमेटिक सिगनल लाल आन की स्थिति में मिलता है तो गाड़ी रोकने के बाद ड्राइवर अगले स्टेशन मास्टर से मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्यूनिकेशन हैंड सेट से बात करेंगे। तत्पश्चात रिसीविंग स्टेशन के स्टेशन मास्टर परिस्थिति के अनुसार सिगनल को लाल आने की दशा में पार करने हेतु एक प्राइवेट नंबर देंगे। इसके बाद चालक दस किलोमीटर की रफ्तार से अगले सिगनल तक गाड़ी ले जाएगा। ताकि अगर आगे गाड़ी खड़ी हो तो ड्राइवर को ब्रेक लगाने में दिक्कत न हो। यदि किसी कारणवश सिगनल पोस्ट टेलीफोन से रिसीविंग स्टेशन के स्टेशन मास्टर से लोको पायलट की बात नहीं होती है तो वह पांच मिनट तक इंतजार करने के बाद अधिकतम दस किलोमीटर प्रति घंटा की गति से गाड़ी को अगले सिगनल तक ले जाएगा।
मालूम हो कि नई सिगनलिंग प्रणाली में दो स्टेशनों के मध्य दो गाड़ियां दौड़ती हैं। यह कदम कोहरे के दौरान इस कारण उठाया गया है कि अगर आगे चल रही गाड़ी में कोई खराबी आ जाए या सिगनल में प्रोब्लम हो तो मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्यूनिकेशन हैंड सेट से अगले स्टेशन मास्टर से संपर्क कर परिस्थिति का पता लगाया जा सके।

सिगनलों के पहले लगाईं जिगजेक पट्टियां
झांसी। रेल मंडल में पूर्ण ब्लाक पद्धति (एक सेक्शन में एक गाड़ी का चलना) काम करती है। कोहरे से निपटने के लिए सिगनल के दो खंभे पहले ओएचई पोल पर जिगजेक पट्टियां लगा दी गई हैं। इंजन की रोशनी पड़ते ही यह पट्टियां चमकने लगती हैं, जिससे चालक को पता लग जाता है कि सिगनल आने वाला है। परिचालन अधिकारियों ने सभी चालक व सह चालकों को निर्देशित कर दिया गया है कि कोहरे में वह अधिकतम साठ किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार से गाड़ी नहीं चलाएंगे। इसके लिए लोको इंस्पेक्टर व यातायात निरीक्षकों को निगरानी सौंपी गई है, जो रात के समय गाड़ियों पर चलकर चालकों की स्पीड की जांच कर रहे हैं। साथ ही चालक व सह चालकों की एल्कोहल की भी जांच शुरू हो गई है। पच्चीस से इकतीस दिसंबर तक मंडल के अलग अलग अधिकारियों को अचानक पहुंचकर चालक, सह चालक व गार्ड को जांचने का आदेश दिया गया है।

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