रेलवे की खानपान व्यवस्था बे पटरी

Jhansi Updated Sun, 23 Dec 2012 05:31 AM IST
झांसी। दो साल बीतने के बाद भी रेलवे प्रशासन खानपान व्यवस्था को पूरी तरह अपने हाथों में नहीं ले सका है। आधी व्यवस्था रेलवे व आधी आईआरसीटीसी के हाथों में है। दोहरी व्यवस्था होने से न तो रेलवे में वापसी करने वाले कर्मचारियों का सही उपयोग हो पा रहा है और न खानपान व्यवस्था की कमियां दूर हो पा रही हैं।
तत्कालीन रेल मंत्री ने वर्ष 2010 में खानपान व्यवस्था भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के हाथों से वापस लेने की घोषणा की थी। इसके बाद पहले चरण में रेलवे ने झांसी रेल मंडल के ग्वालियर, मुरैना, उरई, बबीना, ललितपुर, मानिकपुर, चित्रकूट, बांदा, खजुराहो व महोबा स्टेशनों की व्यवस्था को आईआरसीटीसी से वापस ले लिया। दूसरे चरण में झांसी स्टेशन पर लगे अलग-अलग कंपनियों के स्टाल भी रेलवे ने अपने हाथों में ले लिए। तीसरे चरण में रेलवे ने प्लेटफार्म पर मौजूद आठ स्टाल अपने हाथों में लिए लेकिन अब तक भोजनालय आईआरसीटीसी से नहीं ले सका है। भोजनालय की व्यवस्था अभी भी पुराने हिसाब से चल रही है। इसके अलावा लंबी दूरी की अधिकांश ट्रेनों में आईआरसीटीसी ही खाने की सप्लाई कर रहा है।
इसमें दिक्कत यह आ रही है कि आईआरसीटीसी के हाथों में कमान जाने के बाद से रेलवे ने खानपान का बजट समाप्त कर दिया। इसके अलावा कर्मचारियों की समस्याएं भी मुंह बाए खड़ी हैं। अगर ऐसे में रेलवे खानपान की व्यवस्था अपने हाथों में लेता है, तो उसे आईआरसीटीसी कर्मचारियों का सहारा लेना होगा। दोनों के वेतन देने के मापदंड अलग- अलग हैं। इस कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि रेलवे अब तक भोजनालय की व्यवस्था अपने हाथ में नहीं ले सका है। वहीं, आधी अधूरी व्यवस्था में न तो आईआरसीटीसी और न रेलवे यात्रियों को खानपान की संतोषजनक सुविधा दे पा रहा है। इतना ही नहीं, कमियां सामने आने के बाद कोई कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी रवि प्रकाश का कहना है कि प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही रेलवे भोजनालय की व्यवस्थाओं को अपने हाथों में ले लेगा।

जनता भोजन को तरस रहे यात्री
झांसी। रेलवे ने आईआरसीटीसी से इकतीस मार्च को प्लेटफार्म पर संचालित स्टाल व ट्रालियों की व्यवस्था अपने हाथ में ले ली थी। इसके बाद से आईआरसीटीसी केवल भोजनालय चला रहा है। झांसी सटेशन पर पहले तीन दिन तो आईआरसीटीसी दो सौ से ढाई सौ जनता भोजन के पैकेट तैयार कर रेलवे को देता रहा, लेकिन इसके बाद आईआरसीटीसी ने जनता भोजन बनाने से साफ इंकार कर दिया। इससे स्टालों पर जनता भोजन बिकना बंद हो गया। खानपान व्यवस्था जब तक रेलवे के हाथों में पूरी तरह नहीं आ जाएगी, तब तक जनता भोजन का पटरी पर आना मुश्किल ही है।

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