वृद्ध दंपति ने सबसे पहले देखी थी आग

Jhansi Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
ग्वालियर। बृहस्पतिवार रात्रि जीटी एक्सप्रेस की वातानुकूलित बोगियों में लगी आग से समूची ट्रेन में चीख पुकार का मंजर था। वातानुकूलित बोगियों में लगी आग की खबर जैसे ही अन्य सभी बोगियों में पहुंची तो हर जगह भयभीत यात्रियों की चीख पुकार थी। ट्रेन के सिथौली स्टेशन पर रुकते ही बोगियों से यात्रियों के कूदने का सिलसिला शुरू हो गया, जो काफी देर तक चलता रहा।
ट्रेन में आग की खबर सबसे पहले बुजुर्ग दंपति दुल्लीचंद और माया देवी को लगी। दोनों ने चीख-चीख कर सबको जगाना शुरू किया। बोगी बी-1 और बी-2 कोचों में लगभग 128 यात्री सवार थे। दुल्लीचंद, मायादेवी और फौजी शिव पण्डया की सजगता से सभी यात्री सकुशल बच गए अन्यथा ट्रेन न रोकी जाती तो बड़ी घटना हो सकती थी। किसी भी ट्रेन को सिथौली से ग्वालियर तक आने में लगभग 15-20 मिनट लग जाते हैं और जीटी एक्सप्रेस का अगला स्टॉपेज झांसी के बाद ग्वालियर ही था। यदि ट्रेन 15-20 मिनट और चलती तो आग तेज हवा से भड़क कर अन्य बोगियों को भी अपनी चपेट में ले सकती थी।
जीटी एक्सप्रेस की तेजगति के कारण आग और अधिक भड़क गई थी। आग के कारण बी-1 और बी-2 कोच में जबरदस्त धुआं और कालिख भर गई थी, जिस कारण यात्रियों को बस धुआं ही धुआं दिखाई दे रहा था। आग ने दोनों कोच को जोड़ने वाली कपलिंग को भी बुरी तरह से अपनी चपेट में ले रखा था, जिस कारण बी-2 के यात्री, बी-1 और अन्य सामान्य कोचों में भाग नहीं सके। बी-1 के यात्री स्लीपर कोच और बी-2 के यात्री ए-1, ए-2 कोचों की ओर गए।
सिथौली स्टेशन पर रात्रि में ट्रेन रुकने के बाद यात्रियों की आधी हालत सर्दी ने खराब कर दी। ट्रेन में आग से घबराए यात्रियों को सिथौली रेलवे स्टेशन पर रेल प्रशासन व स्थानीय ग्रामीणों ने चाय-पानी की व्यवस्था कराई। वहीं एसी कोच के अटेंडर रामचन्द्रन, कृष्णन ने आग बुझाने के लिए फायर फाइटर का भी इस्तेमाल किया, हालांकि फायर फाइटर आग की विकरालता के सामने नकारा साबित हुए। इसी बीच ट्रेन के एसी प्लांट इंचार्ज केपी बालाजी ने इन डिब्बों के बैटरी कनेक्शन काट दिए, ताकि आग से बैटरी फट न जाए। अन्यथा आग और ज्यादा भड़क सकती थी।
आग के कारण यात्रियों में इतनी दहशत थी कि तड़के 6.30 बजे के लगभग जब ट्रेन को सिथौली से ग्वालियर की ओर चली, तो यात्री आग के भय से ट्रेन में बैठने से कतरा रहे थे। इसी कारण एक फायर बिग्रेड की गाड़ी को ट्रेन के साथ-साथ रवाना किया गया, ताकि बीच रास्ते में पुन: आग लगने से ट्रेन रोककर उस पर काबू पाया जा सकें। धीमी गति से चली जीटी एक्सप्रेस सिथौली से ग्वालियर लगभग 6.45 बजे आई और यहां इसकी आग से जली वातानुकूलित बोगियों को काटकर 7.25 बजे के लगभग नई दिल्ली की ओर रवाना किया गया।
वातानुकूलित बोगियों में लगी आग से इतनी अफरा-तफरी मच गई थी कि अन्य कोचों को आग से बचाने के लिए तत्काल अलग कर डाउन व अप ट्रैक की ओएचई लाइन की विद्युत सप्लाई को बंद किया और दोनों मार्गों को ट्रेनों की जहां के तहां रोक दिया गया।
12 गाड़ियों ने फेंका पानी
ग्वालियर। जीटी एक्सप्रेस की आग पर काबू पाने के लिए दमकल की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। लगभग 12 गाड़ियों ने पानी फेंक कर सुबह 5.45 बजे आग पर काबू पाया। वहीं जब दमकल कर्मी रात्रि कोचों में पानी फेंककर आग बुझाने का कार्य कर रहे थे, तभी अप ट्रैक पर जा रही मालगाड़ी से बाधा हुई। मालगाड़ी के आते ही दमकल कर्मियों ने तत्काल पानी के पाइपों को अप ट्रैक से हटाया।

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