हवाई अड्डा की हलचल से भूमाफिया सक्रिय

Jhansi Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
झांसी। जिला प्रशासन ने हवाई अड्डा के लिए जमीन का प्रस्ताव क्या तैयार किया, भूमाफियाओं को मालामाल होने का मौका मिल गया। हवाई अड्डा कहां बनेगा यह तो सरकारें तय करेंगी, पर जमीन के कारोबारियों की जेबें जरूर भरने लगी हैं। हालातों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौजा डंगरिया रूंद व आसपास पुनर्वास की जमीन भी खतरे में पड़ गई है।
शहर में हवाई अड्डा बनाने की कवायद चल रही है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण जमीन का चयन है। ग्वालियर रोड स्थित आर्मी के एअरबेस के विस्तारीकरण के अलावा अन्य स्थानों पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए पिछले दिनों जिला प्रशासन ने तीन स्थलों का चयन कर प्रस्ताव तैयार किया था, इसमें से एक ग्राम डंगरिया रूंद के आसपास की जमीन का भी था। बिजौली रेलवे स्टेशन से होते हुए बल्लमपुर के आगे मौजा डंगरिया रूंद में पुनर्वास की करीब डेढ़ सौ एकड़ सरकारी जमीन पड़ी है। इसके अलावा काश्तकारों की भी जमीन है, जिसको मिलाकर करीब दो सौ एकड़ के क्षेत्र में हवाई अड्डा बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। प्रस्ताव को शासन की अनुमति मिलेगी या नहीं, यह बाद का विषय है। लेकिन, प्रस्ताव तैयार होने मात्र से इस क्षेत्र में भूमाफिया सक्रिय हो गए हैं। काश्तकारों की जमीन औने- पौने दाम पर खरीद कर उन्होंने प्लाटिंग करनी शुरू कर दी है। इतना ही नहीं, प्लाटिंग की जमीन के आसपास की पुनर्वास वाली जमीन को भी वह अपनी बताकर भोले- भाले लोगों को बेच कर मुनाफा कमा रहे हैं। इससे वहां पर जमीन के रेट आसमान की ओर भाग रहे हैं। कई लोगों की बंजर जमीनें भी अब सोने की कीमत में बिकने लगी हैं। प्लाट के इच्छुक लोग आंख मूंद कर बिना जांच पड़ताल किए जमीन खरीदने में लगे हैं।

भविष्य में बढ़ेगी कीमत
झांसी। भूमाफियाओं का जमीन बेचने का अपना अंदाज है। उनके आदमी शहर में घूमते रहते हैं और प्लाट खरीदने की इच्छा रखने वालों को टारगेट बनाते हैं। किसी के पास ब्लैक मनी है तो उसे समझाया जाता है कि एक- दो प्लाट डाल दो, बैंक में रकम डालने से प्लाटिंग में ज्यादा फायदा है। किसी को लड़की की शादी के लिए अभी से एक प्लाट खरीदने की बात कही जाती है तो किसी को बेटे की हायर एजूकेशन के लिए प्लाट रिजर्व करने के लिए कहा जाता है। यदि कोई प्लाट खरीदने में नानुकर करता है तो उससे कहा जाता है कि छह महीने बाद हमें दुगने दाम पर वापस कर देना। कुल मिलाकर ग्राहक फंस ही जाता है।

सौ से शुरू होकर सौदा पच्चीस पर खत्म
झांसी। पुनर्वास की जमीन बेचने वाले भूमाफिया सौ रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से जमीन का दाम बताते हैं। फिर कम होते- होते सत्तर रुपये, पचास रुपये से गिरकर रेट तीस और पच्चीस रुपये प्रति वर्ग फुट तक आ जाता है। ग्राहक समझता है कि प्लाट बहुत सस्ता मिल गया है, जबकि बेचने वाला जानता है कि मुफ्त की जमीन का जो मिल जाए सो अच्छा है।

‘पुनर्वास की जमीन बेचने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’
- राजेंद्र बहादुर, तहसीलदार

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