रानी का राजदंड झांसी लाने के लिए गंभीर पहल शुरू

Jhansi Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
झांसी। सन् 1857 के स्वतंत्रता समर में अपने शौर्य और वीरता से अंग्रेजी हुकूमत के दांत खट्टे करने वालीं वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के राजदंड को झांसी वापस लाने की गंभीर पहल शुरू हो गई है। मंडलायुक्त सत्यजीत ठाकुर जल्द ही इस संबंध में शासन को पत्र लिखेंगे, ताकि रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेकर उसे वापस लाया जा सके।
बृहस्पतिवार को मंडलायुक्त सभागार में आयोजित बैठक में समाजसेवियों, व्यापारियों और अन्य गणमान्य नागरिकों की समिति ने मंडलायुक्त को पत्र सौंपा, जिसमें कहा गया कि वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के समय झांसी राज्य का प्रतीक राजदंड सन् 1857 के युद्ध में अंग्रेजी सेना ने अपने कब्जे में ले लिया था, जो अब कुमाऊं रेजीमेंट के रानीखेत स्थित संग्रहालय में सुरक्षित है। यह झांसी के गौरव और प्रशासन का प्रतीक है, अत: इसे वापस लाया जाना चाहिए। मंडलायुक्त ने जनभावनाओं का ध्यान रखते हुए प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव को पत्र लिखने का आश्वासन दिया। वहां से पत्र को रक्षा मंत्रालय भिजवाया जाएगा।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त मेजर टकसाल निवासी राजेंद्र मोहन ने जानकारी देते हुए बताया कि 03 अप्रैल 1857 को अंग्रेज अफसर ह्यूरोज और देश भक्तों के बीच युद्ध हुआ था। तात्या टोपे करीब 06 हजार सैनिक व 90 तोपों के भारी भरकम बेड़े के साथ झांसी आए थे। रात में उन्होंने जहां विश्राम किया, वहां आग जलाकर महारानी लक्ष्मीबाई को सेना के आने संकेत दिया, लेकिन इसे ह्यूरोज ने भांप लिया और सुबह चार बजे तात्या टोपे की सेना पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से सब गड़बड़ हो गई। रानी और उनके सिपहसालार किसी तरह कालपी पहुंचे, उनके साथ राज्य शासन का प्रतीक चांदी का राजदंड भी था। ह्यूरोज ने रानी का पीछा किया और चालाकी से राजदंड कब्जे में ले लिया। उस समय अंग्रेजी सैन्य टुकड़ी हैदराबाद पलटन के नाम से जानी जाती थी, जो बाद में कुमाऊं रेजीमेंट बन गई। मेजर ने रानी के राजदंड को झांसी वापस लाने के लिए रक्षा मंत्रालय में पहल करने का आश्वासन दिया। उन्होंने समिति के सदस्यों से भी आग्रह किया कि केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन ‘आदित्य’ को भी इसके लिए तैयार किया जाए कि वह रक्षा मंत्रालय में पहल करें। वहीं, समिति के सदस्यों ने कहा कि जब तक राजदंड वापस नहीं आ जाता, इसके लिए आंदोलन किया जाएगा।
इस मौके पर जिलाधिकारी गौरव दयाल, मुकुंद मेहरोत्रा, हरगोविंद कुशवाहा, धन्नूलाल गौतम, रामतीर्थ सिंघल, निरंकार नाथ पांडेय, रामप्रकाश शर्मा, संतोष साहू, हमीदा अंजुम, जमुना झा, डा. नीति शास्त्री, रामेश्वर मिश्रा, अरुण द्विवेदी, मोहन नेपाली, मुकेश अग्रवाल, मोहन सिंह, एएसपी सिटी अवधेश कुमार समेत विभिन्न विभागों के अफसर और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

झंडा दिल्ली से गया था चोरी
झांसी। मेजर राजेंद्र मोहन ने बताया कि झांसी राज्य का ध्वज (झंडा) दिल्ली में रखा गया था, जहां से चोरी चला गया था। केंद्र सरकार ने इसकी सीबीआई जांच भी कराई थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ था। कुछ समय बाद पता चला कि उसे लंदन में किसी ने खरीद लिया है।

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