वैश्विक स्तर बने पेटेंट कानून : हेनरिच

Jhansi Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
झांसी। लंदन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल हेनरिच ने कहा कि हर देश अपने भौगोलिक, सांस्कृतिक व आर्थिक हालात से अनुरूप पेटेंट व कापीराइट कानून बनाता है, इस कारण नियमों को तोड़ना- मरोड़ना आसान हो गया है। वैश्विक जरूरत के अनुरूप विश्व स्तर पर पेटेंट एवं कापीराइट कानून की जरूरत है। वह सोमवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंटलेक्चुएल प्रोपर्टी सेल द्वारा बौद्धिक संपदा अधिकार : आवश्यकता एवं संरक्षण विषय पर आयोजित सेमिनार में पेटेंट व कापीराइट कानून की बारीकियों पर प्रकाश डाल रहे थे। इससे पहले परिसर स्थित गांधी सभागार में आयोजित इस सेमिनार का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सुरेश वीर सिंह राणा ने कहा कि देश में हजारों सालों से वेदों व दूसरे किताबों में विज्ञान व कृषि के क्षेत्र से जुड़े ज्ञान संरक्षित हैं, लेकिन आज के समय में इन्हें पेटेंट कराने की जरूरत है। आईपीआर सेल के नोडल आफिसर प्रो. आर के सक्सेना ने सभी का स्वागत करते हुए सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की।
प्रथम व्याख्यान सत्र के मुख्य वक्ता माइकल हेनरिच ने सर्चिंग फार ग्रीन गोल्ड? एंथ्रोपोलोजिकल, फार्मोकोलॉजिकल एंड एनालिटिकल चैलेंजेज इन द फील्ड आफ मेडिसिन प्लांट रिसर्च विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक जड़ी बूटियों को संरक्षित करने एवं उनके नए- नए प्रयोग को पेटेंट कराने की प्रक्रिया बहुत तेज हो गई है। इसमें अलग - अलग देश के पेटेंट कानून बाधा बन रहे हैं। कुछ जड़ी- बूटियां एक देश में पेटेंट हैं, तो दूसरे देश में इनका जन साधारण आसानी से प्रयोग करता है। देखा जाए तो वैश्विक स्तर पर पेटेंट कानून असफल है। अब ग्रीन टेक्नोलाजी के कारण इकोफ्रेंडली व हर्बल प्रोडक्ट के पेटेंट की बाढ़ सी आ गई है। इसे ग्रीन गोल्ड कहा जा रहा है।
नई दिल्ली स्थित टेक्नोलॉजी इनफार्मेशन फारकास्ट एसेसमेंट काउंसिल के वाई डी पंवार ने कहा कि बौद्धिक संपदा के पेटेंट व कापीराइट के प्रति समाज को जागरूक करना जरूरी है, जिससे इसके प्रयोग को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके।
द्वितीय तकनीकी सत्र में इंडियन पेटेंट आफिस के सुशांत दास ने कहा कि भारत में और देशों की अपेक्षा पेटेंट प्रक्रिया ज्यादा आसान है। लंदन विश्वविद्यालय, लंदन के एंथोनी बूकर ने लंदन के अंदर दवाओं में बौद्धिक संपदा व इससे जुड़े अधिकार संरक्षण के नियमों व सीमाओं पर प्रकाश डाला। काउंसिल आफ द साइंस एंड टेक्नोलॉजी, यूपी की नोडल आफिसर शशि राणा ने कहा कि विश्वविद्यालय में रिसर्च का काम तो होता है, लेकिन इसके पेटेंट या कापीराइट पर बहुत कम काम हो रहा है, जिससे हमारी बौद्धिक संपदा को नुकसान हो रहा है। कार्यक्रम का संचालन डा. रामवीर सिंह ने किया।
इस अवसर पर प्रो. एस पी सिंह, मुकुल सक्सेना, डा. डी के भट्ट, डा. आर वी सिंह, सतीश साहनी आदि उपस्थित रहे।

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