न्यू बोर्न बेबी कार्नर ठंडे बस्ते में

Jhansi Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
झांसी। एक साल पूर्व प्रदेश भर में शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए शुरू की गई न्यू बोर्न बेबी कार्नर योजना जिले में ठंडे बस्ते में चली गई है। बजट के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बेबी कार्नर स्थापित ही नहीं हो सके।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन ने एक साल पूर्व शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए जनपद में न्यू बोर्न बेबी कार्नर योजना लांच किया था। इसके तहत जिले के आठों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक न्यू बोर्न बेबी कार्नर स्थापित किया जाना था। जिन केन्द्रों पर पर्याप्त जगह थी, वहां पर डिलीवरी रूम के बगल में पांच बेड का एक बेबी कार्नर बनाना था और जहां जगह की कमी थी, वहां डिलीवरी रूम में ही एक कोने में बेबी कार्नर तैयार किया जाना था। बेबी कार्नर में रेडिएंट वार्मर, बच्चों के लिए जीवन रक्षक दवाएं व दूसरे उपकरण रखे जाने थे। इसका उद्देश्य यह था कि नवजात शिशु में अगर किसी प्रकार की रोग संबंधी जटिलता प्रकट हो तो बच्चे को बचाया जा सके। लेकिन, इसके लिए शासन ने अलग से बजट नहीं दिया। पीएचसी व सीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिया गया कि वह रोगी कल्याण समिति के बजट से बेबी कार्नर तैयार करें। इस समिति को एक साल में मात्र एक लाख रुपये मिलते हैं, जबकि बेबी कार्नर तैयार करने में एक लाख से ज्यादा के उपकरण की आवश्यकता थी। इसमें रेडिएंट वार्मर ही 50 हजार रुपये का है। ऐसे में रोगी कल्याण समिति से साल भर तक होने वाले विभिन्न मदों मेंहोने वाले खर्च की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कुछ नहीं कहा गया। ठोस गाइड लाइन के अभाव में केन्द्र प्रभारियों ने बेबी कार्नर की स्थापना को लेकर रुचि ही नहीं दिखाई।
डीसीएम ऋषिराज सिंह के मुताबिक बजट के अभाव में बेबी कार्नर तैयार नहीं हो सकी।

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