बिजली कटौती से मुक्त होंगे डीप फ्रीजर

Jhansi Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
झांसी। टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग कोई कोर- कसर नहीं छोड़ना चाहता है। आमतौर पर कोल्ड चेन के अभाव में कई टीके प्रभावकारी नहीं रह जाते हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जनपद के आठ ब्लाकों में 25 केवीए के नए जनरेटर लगाने का फैसला किया है, ताकि टीका रखे जाने वाले डीप फ्रीजर को 24 घंटे बिजली उपलब्ध हो सके।
शहरों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत कटौती ज्यादा होती है। इस कारण ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जनरेटर लगाए गए हैं। लेकिन, यह जनरेटर दशकों पुराने हैं और डीजल के बजट के अभाव में बहुत मुश्किल से ही चल पाते हैं। वहीं, पल्स पोलियो अभियान एवं नियमित टीकाकरण अभियान में वैक्सिन को सुरक्षित करने के लिए कोल्ड चेन को बरकरार रखने के लिए डीप फ्रीजर को चौबीस घंटे चलाना जरूरी होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूरी भी ज्यादा होती है, जिससे वैक्सिन के खराब होने की संभावना ज्यादा रहती है। चिकित्सकों की मानें तो कोल्ड चेन टूटने से वैक्सिन का असर कम होने लगता है, जिससे टीकाकरण प्रभावी नहीं रह जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय, लखनऊ ने जनपद के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आधुनिक आटोमैटिक जनरेटर लगाने की योजना बनाई है। इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के माध्यम से सभी ब्लाकों में 25 केवीए का जनरेटर स्थापित करने में होने वाला खर्च व डीजल का बजट आदि का पूरा विवरण मांगा है, जिसके मद्देनजर सीएमओ आफिस ने जनरेटर स्थापना का प्रस्ताव भेज दिया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनोद यादव का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध तरीके से संचालित करने की शासन की योजना है। इसी क्रम में डीप फ्रीजर के लिए जनरेटर का प्रस्ताव भेज गया है।

जंग खा रहे हैं जनरेटर
झांसी। स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय, लखनऊ ने एक दशक पूर्व बड़ागांव, बंगरा, चिरगांव व बामौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 10 केवीए के जनरेटर भेजे थे। जनरेटर आने के कुछ दिनों बाद ही मुख्यालय से पत्र आया कि कुछ तकनीकी कारणों से जनरेटरों को संबंधित एजेंसी को वापस करना है, इसलिए उनकी पैकिंग के साथ छेड़छाड़ न की जाए। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा ही किया। लेकिन, आज तक उक्त जनरेटरों को वापस लेने कोई नहीं आया। इनकी पैकिंग खराब हो चुकी है और जनरेटरों के आंतरिक पुर्जों में जंग लग चुका है। सूत्रों की मानें तो यह जनरेटर तकनीकी रूप से खराब थे। यह सिंगल फेज के थे, जबकि जरूरत दो फेज वाले जनरेटरों की थी। हालांकि, अधिकारियों को आज तक तकनीकी खराबी का स्पष्ट कारण पता नहीं चल सका।


कई दशक पुराने जनरेटरों से खर्च बढ़ा
झांसी। स्वास्थ्य विभाग के पास ढाई दशक से भी पुराने जनरेटर हैं। इन जनरेटरों पर लागत से कई गुना मेंटेनेंस पर खर्च हो चुका है। यह प्रदूषण मानकों के विपरीत हैं, जबकि इन्हें चलाने में खर्च बहुत होता है। बावजूद इसके, स्वास्थ्य विभाग दशकों पुराने जनरेटरों को ढोए जा रहा है।

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