अब मिलेगी फिजियोथैरेपी विभाग को मान्यता

Jhansi Updated Thu, 25 Oct 2012 12:00 PM IST
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में सन 2002 से संचालित इंस्टीट्यूट आफ रिहैब्लिटेशन साइंस (फिजियोथैरेपी) को अब जाकर स्टेट मेडिकल फैकल्टी से मान्यता मिलने वाली है। इसके लिए अधिकांश औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।
विश्वविद्यालय परिसर में सन 2002 में इंस्टीट्यूट आफ रिहैब्लिटेशन साइंस विभाग की स्थापना की गई। यहां बैचलर आफ फिजियोथैरेपी कोर्स संचालित है, जिसमें 30 सीटें हैं। चार वर्षीय कोर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थी फिजियोथैरेपी की प्रैक्टिस करने के लिए वैध हो जाते हैं। लेकिन, कोर्स के संचालन के बाद से ही विश्वविद्यालय स्तर से बरती जाने वाली लापरवाही के कारण विभाग को स्टेट मेडिकल फैकल्टी से मान्यता नहीं मिल सकी। इससे आक्रोशित विद्यार्थियों ने कई बार आंदोलन किया। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। विगत दिनों विद्यार्थियों की आरपार की लड़ाई और आंदोलन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मान्यता के प्रयास तेज किए। विगत सप्ताह शिक्षकों ने लखनऊ स्थित स्टेट मेडिकल फैकल्टी के उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर मान्यता से संबंधित औपचारिकताओं को पूरा किया। उम्मीद है कि कुछ और औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद विभाग को मान्यता मिल जाएगी।
मालूम हो कि स्टेट मेडिकल फैकल्टी चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक कार्यालय के अधीन कार्य करता है, जोकि फिजियोथैरेपी विभाग का निरीक्षण कर मानकों को चेक कर मान्यता प्रदान करता है। मान्यता मिलने के बाद ही विद्यार्थी सरकारी नौकरी के लिए योग्य होता है। साथ ही विद्यार्थी को कोर्स पूरा करने के बाद प्राइवेट क्लिनिक खोलने का अधिकार होता है। विभाग के हेड डा. श्याम सुंदर सिंह का कहना है कि मान्यता का प्रयास तेज कर दिया गया है।

उपेक्षा का शिकार रहा विभाग
झांसी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरू से ही फिजियोथैरेपी विभाग की उपेक्षा की। पहले परिसर के आखिरी छोर में उपेक्षित से जीर्णशीर्ण भवन में विभाग को संचालित किया जाता रहा, जहां बारिश के समय छतों से पानी टपकता था तथा फर्श जमीन से ज्यादा नीचे होने के कारण गर्मी व सर्दी के समय कक्षाओं में पानी भर जाता था। फिलहाल इसे पुरातन छात्र संगठन के नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं, विभाग को स्टेट मेडिकल फैकल्टी के अलावा इंडियन एसोसिएशन आफ फिजियोथैरेपी से भी मान्यता नहीं थी। दो साल पूर्व छात्रों के आंदोलन के कारण इंडियन एसोसिएशन आफ फिजियोथैरेपी से मान्यता ली गई। लेकिन अभी स्टेट मेडिकल फैकल्टी से मान्यता मिलनी बाकी है।

काम नहीं आया आश्वासन
झांसी। फिजियोथैरेपी विभाग के शिक्षक एक दशक से विद्यार्थियों को डिग्री वैध होने एवं सरकारी नौकरी में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने का आश्वासन देते रहे हैं, लेकिन विगत दिनों राष्ट्रीय ग्राणीण स्वास्थ्य मिशन में संविदा पर फिजियोथैरेपिस्ट की तैनाती के लिए आवेदन मांगे गए। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से पास आउट छात्रों ने फार्म भरा तो उसे अस्वीकृत कर दिया गया। जानकारी करने पर पता चला कि स्टेट मेडिकल फैकल्टी से मान्यता नहीं होने के कारण उनके फार्म को स्वीकार नहीं किया गया।

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