अब पीएचडी करना आसान नहीं

Jhansi Updated Sun, 07 Oct 2012 12:00 PM IST
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से अब पीएचडी करना आसान नहीं रह गया है। शनिवार को पीएचडी प्रवेश कमेटी ने शोध गुणवत्ता (रिसर्च क्वालिटी) को बनाए रखने के लिए छह माह का कोर्स, उसमें पचास प्रतिशत उपस्थिति और परीक्षा में पचास प्रतिशत अंक के साथ पास होना अनिवार्य कर दिया है। शोध कार्य फुलटाइम करना होगा और फीस भी दस हजार रुपये से ज्यादा वार्षिक देनी होगी। नए नियमों का प्रवेश फार्म अगले सप्ताह नेट पर लोड कर दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय परिसर के प्रशासनिक भवन सभागार में साढ़े बाहर बजे से कुलपति प्रो. सुरेश वीर सिंह राणा की अध्यक्षता में पीएचडी प्रवेश समिति की बैठक शुरू हुई। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में पीएचडी के लिए प्रवेश के दिशा निर्देश तैयार किए गए। बैठक में शोध विभाग ने पीएचडी का कच्चा ड्राफ्ट पेश किया। विचार विमर्श के बाद कमेटी के सदस्यों ने नया ड्राफ्ट तैयार किया। इसमें शोध कार्य के लिए पुराने फार्म की जगह नए फार्म को नेट पर लोड करने पर सहमति बनी। नए फार्म में पीएचडी अभ्यर्थी का पूरा डिटेल, विषय सहित फोन नंबर व ई मेल आईडी दर्ज करनी है। नए फार्म की खास बात यह है कि इसमें विशेष तौर पर लिखा होगा कि आवेदन फार्म मात्र छह माह के कोर्स के लिए है, न कि पीएचडी प्रवेश के लिए। कोर्स पूरा करने व पास होने के बाद पीएचडी में दाखिला प्रक्रिया शुरू होगी। छह माह के रिसर्च क्वालिटी कोर्स के लिए ऐसे कालेजों का चुनाव किया जाएगा, जोकि रिसर्च सेंटर के मानकों को पूरा करते हों। इसके लिए भी एक कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी रिसर्च सेंटर के मानकों की जांच करेगी। कालेजों में छह माह के कोर्स के बाद अभ्यर्थी को विश्वविद्यालय द्वारा मार्च 2013 के आसपास आयोजित परीक्षा में बैठना होगा। परीक्षा में बैठने के लिए 50 प्रतिशत उपस्थिति का प्रमाण पत्र जमा करना होगा। परीक्षा ओएमआर शीट पर होगी। यह सौ नंबरों की होगी। इस परीक्षा में 50 प्रतिशत अंकों के पास होना अनिवार्य होगा। फेल होने की दशा में अभ्यर्थी पीएचडी के योग्य नहीं माना जाएगा। परीक्षा से वंचित अभ्यर्थी एक और मौका मिलेगा। वह दूसरी बार आयोजित परीक्षा में बैठ सकेगा। पूर्व में पीएचडी की फीस करीब पांच हजार वार्षिक थी, जिसे बढ़ा कर दस हजार से ज्यादा कर दिया गया है। यह फीस भी कई स्तरों पर देनी होगी। अभ्यर्थी को कालेज, विश्वविद्यालय, पंजीकरण व परीक्षा के समय शुल्क देना होगा। हालांकि, बैठक में फीस के निर्धारण पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी। संभव है वित्त समिति फीस को कम या ज्यादा कर दे। पीएचडी के लिए गाइड विश्वविद्यालय तय करेगा। नए नियमों के अनुसार अब कोई पार्ट टाइम पीएचडी नहीं कर सकेगा। इसके लिए उसे पूरा समय देना होगा। अगर नौकरी कर रहा है तो उसे तीन साल या उससे ज्यादा का अवकाश लेना होगा। प्रवेश, परीक्षा व पीएचडी का पूरा कार्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग व उच्च शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार होगा।
बैठक में प्रति कुलपति प्रो. पंकज अत्रि, उप कुलसचिव अखिलेश पाल, सहायक कुलसचिव डा. अंशुला सरकार, प्रो. एम एल मौर्या, प्रो. वी के सहगल, प्रो. अपर्णा राज, प्रो. रोचना श्रीवास्तव व सभी विभागों के डीन उपस्थित रहे।

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