आखिर दर्द जुबां पर आ ही गया प्रो. चंद्रा के

Jhansi Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
झांसी। एक छोटी सी बिल्डिंग में स्थापित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को भव्य स्वरूप प्रदान करने वाले पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चंद्रा यहां के आज के हालात देख दुखी हैं। एक समय यहां शुरू किए गए ढाई सौ कोर्स में अध्ययनरत हजारों छात्रों की जगह बुंविवि कैंपस के सिमटते स्वरूप को देख उनका दर्द जुबां पर आ ही गया। उन्होंने कहा कि सन 2005 के बाद के कुलपतियों में विजन व क्रिएटिविटी की कमी के कारण ऐसा हुआ। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस का विकास पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के अंबेडकर सेंटर आफ बायोमेडिकल रिसर्च के संस्थापक निदेशक प्रो. चंद्रा वर्ष 2000 से 2005 तक विश्व विद्यालय के कुलपति रह चुके हैं।
शनिवार को बायो मेडिकल साइंस की बोर्ड आफ स्टडीज की बैठक में शामिल होने आए विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चंद्रा ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान कहा कि उनके कार्यकाल वर्ष 2005 तक यहां 220 कोर्स चलते थे, लेकिन अब मात्र 75 कोर्स ही बचे हैं। उस समय यहां18 हजार छात्र - छात्राएं अध्ययरत थे। अब कैंपस सिमट कर मात्र 7 हजार विद्यार्थियों पर आ गया है। कृषि विज्ञान विभाग, टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट विभाग व आईटी जैसे आधुनिक व बहु उपयोगी विभागों पर ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण यहां एक - एक कर कोर्स बंद होते चले गए। विकास अवरुद्ध होने से परिसर को विद्यार्थियों के लाले पड़ गए हैं। जिस भवन को चार मंजिला बनना था, उनके जाने के बाद निर्माण कार्य ही रुक गया। कम्युनिटी सेंटर सात साल बाद भी अधूरा पड़ा है।
गहरी सांस लेते हुए पूर्व वीसी कहते हैं कि सन 2005 के बाद से विश्व विद्यालय में अफरा तफरी का जो माहौल रहा उसका विवि के शैक्षिक माहौल और विवि के निकास कार्यों पर गहरा प्रभाव पड़ा। वर्तमान कुलपति प्रो. सुरेश वीर सिंह राणा ने अपने कार्यकाल में काफी कुछ सुधार के काफी प्रयास किए हैं , लेकिन अभी और प्रयास की जरूरत है।
अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनका विश्वविद्यालय को छोड़ना एक दुखद अनुभव रहा पर आज भी वह विश्व विद्यालय को आगे बढ़ते रहना देखना चाहते हैं। वह कहीं भी रहें , उनकी आत्मा विश्व विद्यालय में ही बसी रहती है , क्योंकि एक छोटे से पौधे को पुष्पित - पल्लवित कर एक बट वृक्ष बनाया था। आने वाले समय में भी वह विश्वविद्यालय के विकास की योजना पर काम करेंगे। वह सीधे कोई पद न लेकर अप्रत्यक्ष तरीके से विश्वविद्यालय के उच्चाधिकारियों की मदद करेंगे। विश्वविद्यालय के विकास के लिए उन्होंने एक प्रोजेक्ट बनाकर प्रदेश सरकार को सौंप भी दिया है। प्रस्ताव में बुंदेलखंड अंतर्राष्ट्रीय गेस्ट हाउस को अत्याधुनिक व भव्य बनाते हुए किसी बड़े होटल ग्रुप को सौंपना एवं टूरिज्म एवं होटल मैनेजमेंट विभाग को विकसित करने के सुझाव हैं। उनके अनुसार गेस्ट हाउस व टूरिज्म विभाग को टूरिज्म हब बनाना उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है। आयुर्वेदिक इंस्टीट्यूट को हर्बल मेडिसिन एवं आधुनिक मेडिसिन विषयों को जोड़कर नए पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से कुछ नियमित पाठ्यक्रम व शिक्षकों के पद मांगे हैं, जिससे बंद कोर्स को पुन: शुरू किया जा सके। क्षेत्र के हिसाब से यहां पर नर्सिंग व डेंटल इंस्टीट्यूट शुरू करने की योजना भी आने वाले समय में रंग लाएगी।

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