जरूरतमंद हुआ फिक्रमंद, मुनाफाखोरों की चांदी

Jhansi Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
झांसी। केंद्र सरकार द्वारा फोड़े गये गैस बम से आम आदमी आहत है, लेकिन कालाबाजारियों की बल्ले- बल्ले है। बड़े सिलेंडर से छोटे सिलेंडर रिफिल करने वालों सहित गैस की कालाबाजारी करने वालों के दोनों हाथों में लड्डू हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बाहर से आकर रहने वालों पर पड़ रहा है।
अभी तक बाजार में ब्लैक से सिलेंडर लेने पर उपभोक्ता को अधिकतम साढ़े छह सौ रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब उसकी जेब पर बोझ बढ़ गया है। ब्लैक मार्केट में अब सिलेंडर 1000 से 1200 रुपये खर्च करने पर मिल रहा है। शहर में कई ऐसे लोग हैं, जो बाहर से आकर यहां बसे हुए हैं। गैस कनेक्शन न होने के कारण उन्हें मजबूरन इन कालाबाजारियों का सहारा लेना पड़ रहा है। कम आय के साथ- साथ अतिरिक्त बोझ पड़ने से उनकी हालत पतली है। यही कहानी बड़े से छोटे सिलेंडरों के रिफलिंग की है। अभी तक 55 से 60 रुपये किलो में छोटे सिलेंडरों में गैस रिफिल की जा रही थी, जो अब बढ़कर 90 रुपये किलो हो गई है। छोटे सिलेंडर का प्रयोग अधिकांश बाहर से पढ़ने आये छात्र करते हैं। दाम बढ़ने से उनके जेब खर्च पर सीधा असर पड़ेगा।

छोटे परिवार के लिए भी नाकाफी हैं साल के छह सिलेंडर
झांसी। चार से पांच लोगों के परिवार में एक सिलेंडर एक माह ही चलता है। ऐसे में उन्हें साल में 12 सिलेंडर की आवश्यकता पड़ती है। सरकार ने सब्सिडी मात्र छह सिलेंडरों पर दी है। बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर 391 रुपये अधिक चुकाने पर मिलेगा। छोटे परिवारों को छह सिलेंडर बिना सब्सिडी में लेने पड़ेंगे, इसके लिए उन्हें 4776 रुपये खर्च करने होंगे, जो उनके निर्धारित बजट से 2346 रुपये अधिक हैं। यानि कि उपभोक्ता के मासिक बजट पर लगभग दो सौ रुपये का अधिभार पड़ेगा।




क्या कहते हैं उपभोक्ता
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‘‘मेरे परिवार में चार सदस्य हैं। महीने में एक सिलेंडर खर्च होता है। बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर करीब आठ सौ रुपये में मिलेगा। ऐसे में हर माह के हिसाब से गैस पर दोगुना बजट खर्च करना पड़ेगा ’’
रंजना शर्मा, शिक्षिका

‘‘मैं प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूं। घर में हम तीन लोग हैं। कनेक्शन न होने के कारण ब्लैक में सिलेंडर लेना पड़ता है। पहले यह 650 रुपये तक में मिल जाता था, लेकिन इस बार हॉकर ने 1200 रुपये में सिलेंडर दिया है।’’
राजीव, आवास विकास कालोनी

‘‘मैं फतेहपुर की रहने वाली हूं। मेरे पिता कानपुर में एक निजी कंपनी में जॉब करते हैं, वह हर माह चार हजार रुपये खर्च को देते हैं, जिसमें किराया, खाना आदि का खर्च चलाती हूं। बुधवार को छोटा सिलेंडर रिफिल कराया तो दो किलो गैस के दुकानदार ने 180 रुपये लिए, जबकि अभी तक वह 110 रुपये ही लेता था।’’
शिखा, छात्रा बीयू



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झांसी में इन दरों पर गैस सिलेंडर
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सब्सिडी वाला सिलेंडर 405 रुपये
बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर 796 रुपये
एक्जंपडेट श्रेणी का सिलेंडर 1050.50 रुपये
कॉमर्शियल सिलेंडर लगभग 1500 रुपये

ब्लैक में सिलेंडर
पहले 550 रुपये से 650 रुपये तक
अब 1000 रुपये से 1200 रुपये तक

छोटे सिलेंडरों में गैस रिफलिंग
पहले 55 से 60 रुपये किलो
अब 90 रुपये किलो
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इनका कहना है
मार्च 2013 तक हमें तीन सिलेंडर उपभोक्ताओं को और देने हैं। उपभोक्ता चाहे माह में एक ले लें या फिर दो माह में एक, यह उनकी मर्जी पर निर्भर करेगा।
-हरेंद्र कुमार
प्रबंधक, नम्रता गैस सर्विस

ग्राहकों को खुद तय करना होगा कि वह हर माह सब्सिडी वाला सिलेंडर लेते हैं या दो माह में एक बार। मेरा मानना है कि सब्सिडी और गैर सब्सिडी के सिलेंडर वाले नियम से गैस का दुरुपयोग कम होगा और गैस की कालाबाजारी पर रोक लगाने में आसानी होगी।
-अनिल श्रीवास्तव
असिस्टेंट मैनेजर, इंडेन गैस सर्विस

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