गुरु मंत्र बदल देता है जीवन की दिशा: संत आसाराम

Jhansi Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
झांसी। संत आसाराम बापू ने कहा कि गुरु मंत्र सभी सिद्धियों का मूल है। यदि व्यक्ति के जीवन में गुरु नहीं है तो वह ईश्वर के समीप नहीं पहुंच सकता है। भगवान राम और कृष्ण ने भी गुरु से मंत्र दीक्षा ली थी। गुरु दीक्षा और गुरु की शिक्षा व्यक्ति को मौत से भी बचाती है। मरना तो एक दिन सभी को है, परंतु गुरु दीक्षा लेकर गुरु शिक्षा पर चलने वाले अपनी अंतिम सांसें घर पर ही लेते हैं, अस्पताल में नहीं। यह उद्गार उन्होंने दो दिवसीय प्रवचन के अंतिम दिन सोमवार को गुरु दीक्षा कार्यक्रम में प्रकट किए। इस दौरान बापू से तकरीबन तीन हजार लोगों ने गुरु दीक्षा ली।
क्राफ्ट मेला ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में बापू ने कहा कि गुरु दीक्षा ईश्वर से जोड़ती है। लेकिन, बिना जप के गुरु मंत्र प्रभावहीन होता है। गुरु मंत्र का एक करोड़ जप जन्म कुंडली के एक घर को बदल देता है। यदि गुरु मंत्र के 12 करोड़ जाप किये जायें तो जीवन की दिशा ही बदल जाती है, फिर मौत भी मुक्ति लेकर आती है। उन्होंने कहा कि दुनिया स्थूल है, इसमें सुख की कल्पना करना व्यर्थ है। सोने की लंका में रहने वाला रावण भी सुखी नहीं था। इसलिये अपने आप में मस्त रहो और गुरु व ईश्वर के भरोसे अपने आप को छोड़ दो। भक्तों को इंद्रियों पर काबू रखने की सीख देते हुए बापू ने कहा कि इन्द्रियों का स्वामी मन है। मन पर काबू पा लिया तो हर चीज बस में हो जायेगी।
नए दीक्षित होने वाले लोगों को ऊँ नम: शिवाय:, हरि ऊँ, ऊँ गुरु गायत्री मंत्र, ऋम रामाय नम:, ऊँ क्लीं कृष्णाय नम: गुरु मंत्र दिये तथा दस माला प्रतिदिन करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि जो जिसका इष्ट है वही उसका गुरु है और यही मंत्र उसका गुरु मंत्र है। इसलिए आज से ही अपने मंत्र का उच्चारण करना शुरू कर दो और भव से पार हो जाओ। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों को सारस्वत मंत्र ऊँ एं: नम: दिया। उन्होंने कहा कि इस मंत्र को पढ़ने से बच्चों की बुद्धि तेज होती है। इसका प्रयोग दुनिया के हजारों बच्चों पर किया जा चुका है। यह मंत्र बच्चे अपनी शिखा पर हाथ रखकर पढ़ें। इसके चौंकाने वाले परिणाम सामने आएंगे। संत आसाराम बापू के मंच पर पहुंचने से पूर्व उनके कृपा पात्र संत सुरेशानंद ने प्रवचन किए।

गुरु आशीष से बचा जीवन
झांसी। प्रवचन के दौरान संत आसाराम बापू ने बताया कि उनके जन्म के बाद चिकित्सकों ने उनकी मृत्यु की घोषणा कर दी थी। इससे आहत होकर उनकी मां उन्हें गुरु चरणों में ले गईं थीं। गुरु कृपा से ही उनका जीवन बचा और गुरु की भविष्यवाणी के अनुसार ही उन्हें संत बनने का अवसर मिला।

साधकों को सिखाईं यौगिक क्रियाएं
झांसी। प्रवचन के दौरान संत आसाराम बापू ने बीच - बीच में साधकों को यौगिक क्रियाएं सिखाईं। उन्होंने वज्रासन, श्वांस क्रिया व त्रिदोष नाषक क्रिया साधकों से कराईं। बापू ने कहा कि रोग रहित जीवन जीना है तो यौगिक क्रियाओं को अपनाना होगा। बेहतर होगा कि रोग लगने से पहले ही योग शुरू कर दिया जाए।

भक्तों ने ली चरण रज
झांसी। क्राफ्ट मेला ग्राउंड पर भारत की गुरु शिष्य परंपरा के अद्भुत उदाहरण देखने को मिले। कोई गुरु के दर्शन मात्र से भाव विहल हो आंखों से आंसू टपका रहा था, तो कोई गुरु के चरण छू आशीष लेने को बेताब था। इसके अलावा तमाम भक्त बापू के कार्यक्रम स्थल से गुजरने के बाद उनकी गाड़ी के नीचे की धूल अपने माथे पर लगाते देखे गए।

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