उपसभापति: आसान नहीं भाजपा की राह

Jhansi Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
झांसी। नगर निगम कार्यकारिणी के उपसभापति के चुनाव की तिथि जैसे - जैसे नजदीक आती जा रही है, वैसे - वैसे सियासी घमासान भी बढ़ता जा रहा है। जो हालात हैं उसमें भारतीय जनता पार्टी की राह आसान नजर नहीं आ रही है।
उपसभापति का चुनाव 22 सितंबर शनिवार को है। इसमें कार्यकारिणी के बारह सदस्य समेत महापौर को वोट देने का अधिकार है। कार्यकारिणी एक तरह से महापौर का मंत्रिमंडल कहलाता है, जिसकी सहमति से नगर के विकास कार्यों को गति दी जाती है। भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि उपसभापति की कुर्सी पर पार्टी का ही कोई व्यक्ति बैठ जाए, ताकि सदन चलाने और प्रस्ताव पास कराने में आसानी रहे। 12 सदस्यीय कार्यकारिणी में भाजपा के पांच सदस्य हैं। एक कांग्रेस और बाकी छह निर्दलीय हैं। इस हिसाब से महापौर और सदस्यों के वोट मिलाकर संख्या छह तक पहुंचती है, जबकि जीत के लिए आंकड़ा सात का चाहिए।
भाजपा को चुनौती देने के लिए निर्दलीय सदस्य पुष्पेंद्र सिंह ने ताना बाना बुन लिया है। सूत्रों पर भरोसा करें तो निर्दलीय को अन्य निर्दलीयों के साथ कांग्रेस सदस्य का समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, भाजपा भी निर्दलीयों में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन पार्टी की राह इतनी आसान नहीं है। सूत्रों की मानें तो पार्टी के एक- दो सदस्य असंतुष्ट चल रहे हैं। या यूं कहें कि अत्यधिक महत्वाकांक्षा के चलते वह पार्टी की निष्ठा को दरकिनार भी कर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगेगा। पार्टी में सेंध की चरचाओं को एक पूर्व पार्षद की भविष्यवाणी ने भी हवा दे दी है। पूर्व पार्षद अजय श्रीवास्तव पिछले पांच साल से उपसभापति चुनाव से पूर्व भविष्यवाणी करते चले आ रहे हैं और हर बार उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई है। इस बार भी उन्होंने भविष्यवाणी को लेकर एक बैनर नगर निगम में टांग दिया है, जिसमें निर्दलीय पुष्पेंद्र सिंह के जीतने की घोषणा की है। यदि ऐसा हो गया तो यह भाजपा के लिए तगड़ा झटका होगा। हालांकि पार्टी अंतिम समय में असंतुष्ट को भी प्रत्याशी बना सकती है।

डिप्टी मेयर नहीं, सिर्फ उपसभापति
झांसी। उपसभापति को लेकर पार्षदों समेत अन्य लोगों में धारणा है कि जीतने के बाद डिप्टी मेयर बन जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं होगा। वर्षों पूर्व नगर निगमों में डिप्टी मेयर का पद था, बाद में शासन ने उसे समाप्त कर दिया था। अब सिर्फ उपसभापति होता है। उपसभापति सिर्फ कार्यकारिणी की बैठक में महापौर के बगल वाली सीट पर बैठने का अधिकारी होता है। सदन की बैठक में अन्य पार्षदों के साथ ही बैठना पड़ता है।

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