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बिल जमा न होने पर उपभोक्ताओं ने किया हंगामा

Jhansi Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
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झांसी। विद्युत वितरण खंड एक के उपभोक्ताओं ने मंगलवार को सुकुवां- ढुकुवां कालोनी स्थित विद्युत बिल सेंटर पर बिल जमा न होने पर जबर्दस्त हंगामा किया। बाद में लोगों ने अधिशासी अभियंता का घेराव भी किया। अफसरों द्वारा समस्या पर खेद जताने पर उपभोक्ता शांत हुए। इसी तरह, मुन्नालाल सब स्टेशन व अन्य काउंटरों पर लंबी- लंबी कतारें लगी रही। समय खत्म होने पर दर्जनों उपभोक्ताओं को बिना बिल जमा किए ही वापस लौटना पड़ा।
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विद्युत विभाग ने इस माह से शहर में आनलाइन बिलिंग व्यवस्था शुरू की है। इसकी कमान एचसीएल कंपनी को सौंपी गई है। कंपनी ने बिल जमा करने के लिए मुन्नालाल पावर हाउस में दो, सुकुवां ढुकुवां कालोनी में एक, सीपरी बाजार में एक, गल्ला मंडी पर एक, रानी महल पर एक, सदर बाजार में एक, आवास विकास आरोग्य सदन में एक, प्रेमनगर में एक कलेक्शन काउंटर खोला है। चूंकि, कंपनी इस बार बाइस अगस्त से बिलिंग शुरू कर सकी, इस कारण बिल जमा करने के लिए काउंटरों पर लंबी- लंबी कतारें लग रहीं हैं। पहले जहां उपभोक्ता का तुरंत बिल जमा हो जाता था, वहीं आनलाइन बिलिंग में एक बिल जमा होने में कम से कम पांच मिनट का समय लग रहा है। इसी कारण मंगलवार को शहर के सभी कलेक्शन काउंटरों पर उपभोक्ताओं की लंबी लंबी कतारें लगी रही।
वहीं, सुकुवां ढुकुवां कालोनी में चार बजे के बाद कर्मचारी ने काउंटर पर बिल जमा करने से मना कर दिया। इस पर कई घंटे से बिल जमा करने के लिए कतार में लगे लोगों का गुस्सा भड़क गया। खिड़की बंद होेने पर गुस्साए उपभोक्ता अधिशासी अभियंता वी के वर्मा के चैंबर में पहुंच गए और उनका घिराव कर अव्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त की।
अधिशासी अभियंता ने उपभोक्ताओं की समस्या को देखते हुए एसडीओ एस के टांक व गिरराज शर्मा को काउंटर थोड़ी देर और चलवाने का आदेश दिया, लेकिन कर्मचारी के हाथ खड़े कर देने पर बात नहीं बन सकी। बाद में अधिशासी अभियंता ने समस्या पर खेद जताया। मजबूरन तीन दर्जन से अधिक लोगों को बिल जमा किए बिना ही वापस लौटना पड़ा। इस दौरान उपभोक्ता निर्मल कुशवाहा, राहुल परिहार, राजेश श्रीवास्तव, नरेंद्र कुशवाहा, डॉनी खान, एस के श्रीवास्तव, बृजेंद्र कुमार का आरोप था कि बिल जमा करने का समय दस बजे से चार बजे तक है, जबकि यहां के कर्मचारी समय से काउंटर तो नहीं खोलते, लेकिन उन्हें समय से जाने की जल्दी रहती है।


मेडिकल कालेज में नहीं खुल सका काउंटर
झांसी। मेडिकल कालेज में कलेक्शन काउंटर नहीं खुलने से आस पास क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरन उपभोक्ताओं को गल्ला मंडी सब स्टेशन पर बने काउंटर पर आना पड़ रहा है। कंपनी अफसर की मानें को मेडिकल कालेज पर काउंटर खुलने में अभी समय लगेगा, तब तक उपभोक्ता अपना बिल गल्ला मंडी काउंटर पर जमा करें।

गंदगी में खड़े होने को मजबूर उपभोक्ता
झांसी। सुकुवां ढुकुवां कालोनी में बने बिल काउंटर पर खड़ा होना उपभोक्ता के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। यहां वर्षों पुराना टूटा फूटा टिन शेड है, बारिश होते ही इसमें जगह जगह पानी टपकने लगता है। वहीं, टिन शेड के नीचे मिट्टी है, जिसने बारिश के कारण कीचड़ का रूप ले लिया है। पास में पानी भरा होने से मच्छरों का साम्राज्य है। इस कारण कतार में लगे लोगों को बदबू तो आती ही है, मच्छरों के प्रकोप का भी सामना करना पड़ता है। उपभोक्ता इस परेशानी से उच्च अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।



तीन दिन में बनाने हैं 50 हजार बिल
झांसी। नई कंपनी के काम संभालने के बाद बिजली बिल बनाने का काम पटरी से उतर गया है। अगस्त माह में पचास हजार उपभोक्ताओं के बिल नहीं बन सके हैं, जबकि बिल तिथि खत्म होने को है। विभागीय खामियों के बावजूद इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा।
महानगर में नब्बे हजार से अधिक विद्युत उपभोक्ता हैं। इनमें विद्युत वितरण खंड एक में अड़तालीस हजार व दूसरे में बयालीस हजार से अधिक उपभोक्ता हैं। प्रथम खंड में दो सौ चालीस लाख व खंड दो में एक लाख साठ हजार से अधिक यूनिट रीडिंग का उपभोग होता है। बाइस अगस्त से एचसीएल कंपनी ने बिल बनाने का जिम्मा संभाल लिया है। कंपनी सूत्रों की मानें तो पचास मशीनों के साथ साठ रीडरों को लगाया गया, बावजूद इसके अब तक मात्र चालीस हजार उपभोक्ताओं के ही बिल बन सके हैं। हालांकि अभी बिल बनाने के लिए तीन दिन शेष हैं, लेकिन इस अवधि में अधिकतम आठ से दस हजार बिल ही बनने की उम्मीद है। ऐसे में उन उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़नी तय है, जिनके यहां पिछले तीन से पांच महीनों से बिल नहीं बने हैं। विद्युत अफसर भी उपभोक्ताओं की परेशानी को समझ रहे हैं, लेकिन कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
समय पर बिल न मिलने पर यह होती है परेशानी
- दो तीन माह लगातार बिल न बनने पर उपभोक्ता की बिल राशि दो हजार से ऊपर पहुंच जाती है। दो हजार से अधिक राशि होने पर विभाग उपभोक्ता को बकायेदार मान लेता है और उससे तीन सौ रुपये ( संयोजन कटने व संयोजन जुड़वाने) के अतिरिक्त जमा करवाए जाते हैं
- बिल की राशि अधिक होने पर उपभोक्ताओं के समक्ष एक साथ बड़ी राशि जमा करना मुश्किलों भरा हो जाता है
- समय पर बिल न मिलने पर उपभोक्ताओं को लंबी कतारों में लगने को मजबूर होना पड़ता है
- हर माह उपभोग हो रही यूनिट रीडिंग का पता करना मुमकिन नहीं हो पाता है
- शत प्रतिशत बिलिंग न होने पर विद्युत विभाग का मासिक राजस्व घट जाता है

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