वन्य जीव विहीन होती जा रही बुंदेली धरा

Jhansi Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
झांसी। लगातार कम होते वन क्षेत्रों ने केवल पर्यावरण को ही असंतुलित नहीं किया है, वन्य जीवों के ठिकानों को भी नष्ट कर दिया है। आजादी के पूर्व तक बुंदेलखंड के जंगलों में जिन प्राणियों की चहलकदमी रहती थी, वे अब गायब हो चुके हैं। जो वन्य जीव बचे हैं वे भी विलुप्त होने के कगार पर हैं। तेंदुआ, हाथी और लोमड़ी जैसे जीव तो काफी सालों से गायब हो चुके हैं, अब खरगोश, सांभर, चीतल, चिंकारा का भी अस्तित्व खतरे में है।
बुंदेलखंड के जंगल कभी वन्य प्राणियों के लिए वरदान माने जाते थे। शीशम, नीम, महुआ, खैर, बबूल के घने पेड़ और बेतवा, पहूज, सोन, बबेड़ी, यमुना जैसी नदियों का पानी वन्य प्राणियों के लिए अनुकूल साबित हुआ। यहां के जंगलाें में तेंदुआ और हाथी भी पाए जाते थे। सत्तर के दशक तक इन प्राणियों को देखा गया। वन विभाग के रिकार्ड के अनुसार 1971 - 72 में झांसी, ललितपुर व जालौन के जंगलों में दो तेंदुए और चार हाथी थे। अब इनका नामोनिशान नहीं है। उस दौर में खरगोश, बाहरसिंघा, लकड़बग्घा, लोमड़ी, ऊदबिलाव, सांभर, चीतल, चिंकारा, सियार, नीलगाय, सुअर, बंदर, लंगूरों की संख्या अनगिनत थी। 1980 का दशक आते - आते लकड़बग्घा, लोमड़ी, तेंदुआ, हाथी और ऊदबिलाव खत्म हो गए। अन्य वन्य जीवों की संख्या भी कम होती गई। वर्ष 2000 तक स्थिति और खराब हो गई। इस दशक में नीलगाय और सुअर छोड़कर अन्य वन्य जीवों की संख्या काफी कम हो गई।
वन विभाग ने वर्ष 2011-12 में वन्य जीवों की जो गणना की है, वह चौंकाने वाली है। इस समय बुंदेलखंड के सभी वन रेंजाें में नीलगाय और सुअर ही सलामत बचे हैं। अन्य वन्य जीव कुछ वन रेंजों में ही पाए गए।

वन रेंजों में वन्य जीवों की स्थिति
झांसी के बबीना में 698, मऊरानीपुर में 3129 व झांसी वन रेंज में 82, ललितपुर के ललितपुर में 145, मड़ावरा में 697, बार में 400, तालबेहट में 400, महरौनी में 455 व जालौन के माधौगढ़ वन रेंज में मात्र एक लंगूर है। झांसी वनरेंज में 24 बंदर, ललितपुर के ललितपुर वनरेंज में 162, मड़ावरा में 526, बार में 120 व महरौनी में 410 तथा जालौन के कोंच में 48 व माधौगढ़ में दो बंदर हैं। मड़ावरा में 140 एवं माधौगढ़ में चार सांभर बचे हैं। झांसी जिले के किसी भी वनरेंज में सांभर नहीं हैं। झांसी व जालौन के जंगल चीतल विहीन हैं जबकि ललितपुर के मड़ावरा में 200 व महरौनी में 15 चीतल ही बचे हैं। चिंकारा भी केवल मड़ावरा वन रेंज में हैं। सियार केवल जालौन जिले में हैं। यहां के कालपी में 313, कदौरा में 122, कोंच में 162 व माधौगढ़ में 190 सियार चिह्नित किए गए। वन विभाग ने मंडल में केवल 28 खरगोश होना पाया है। यह सभी खरगोश जालौन के एट वनरेंज में हैं। इसी तरह वन विभाग केवल माधौगढ़ वनरेंज में ही दो बारहसिंघा होना मान रहा है।

मंडल में वन्य जीवों की स्थिति
वन्य जीव झांसी ललितपुर जालौन
नीलगाय 7587 3208 2726
सुअर 758 810 1139
लंगूर 3211 2097 01
बंदर 24 1218 50
सांभर 00 140 04
चीतल 00 215 215
चिंकारा 00 190 190
सियार 00 00 787
खरगोश 00 00 28
बारहसिंघा 00 00 02

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