मनरेगा मजदूर को 150 दिन काम!

Jhansi Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
झांसी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के मजदूरों को काम के ज्यादा अवसर मिल सकेंगे। जल्द ही एक साल में सौ दिन रोजगार की बाध्यता खत्म कर 150 दिन करने की तैयारी चल रही है। इस संबंध में उच्च स्तर पर मंथन हो चुका है। शासनादेश जारी होते ही जिला स्तर पर इसे लागू कर दिया जाएगा।
मनरेगा में हर जॉब कार्ड धारक को इस समय साल में 100 दिन रोजगार की गारंटी का प्रावधान है। नियम के अनुसार दिनाें की गणना परिवार के कुल सदस्यों द्वारा किए गए कार्य से की जाती है। यदि एक परिवार के चार सदस्यों ने 25 - 25 दिन काम किया तो उसे 100 दिन का रोजगार माना जाता है। किसी भी परिवार को 100 दिन से अधिक रोजगार देने पर संबंधित ग्राम पंचायत सचिव व मनरेगा स्टाफ से अतिरिक्त वसूली की जा सकती है। मनरेगा लागू होने से अभी तक 100 दिन रोजगार का नियम चल रहा है, जिसे कई बार कम माना जाता रहा। कई स्तर से कहा गया कि रोजगार दिवस कम होने से मजदूरों को मनरेगा का लाभ नहीं मिल पा रहा है और वे पलायन को मजबूर हैं। इसे देखते हुए वित्तीय वर्ष के आरंभ में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन ने मनरेगा में रोजगार दिवस बढ़ाने का मसौदा तैयार किया था। अब इसे अमली जामा पहनाने की तैयारी चल रही है।
पिछले दिनों लखनऊ में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय एवं उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश के सभी मंडलों के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर रोजगार दिवस बढ़ाने पर विचार विमर्श किया था। सभी ने 100 दिन की जगह 150 दिन का रोजगार देने पर सहमति जताई है। इस संबंध में जल्द ही शासनादेश जारी होने वाला है।
जिला ग्राम्य विकास विभाग के परियोजना निदेशक जीपी गौतम ने बताया कि वर्तमान में जिले के एक लाख चालीस हजार जॉब कार्ड धारक परिवारों में से लगभग 216 परिवारों को 100 दिन का रोजगार दिया जा चुका है। जैसे ही नया शासनादेश जारी होगा 150 दिन रोजगार का नियम लागू कर दिया जाएगा।

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