खेल बाजार पर चढ़ा महंगाई का रंग

Jhansi Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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झांसी। लगातार बढ़ती महंगाई ने रोजमर्रा की वस्तुओं को ही नहीं, खेल बाजार को भी चपेट में ले लिया है। एक साल पहले तक 1150 रुपये में मिलने वाला क्रिकेट प्रशिक्षण का बैट अब 1500 रुपये का आ रहा है। मध्यम आकार के कैरम बोर्ड की कीमत में भी दो सौ रुपये का उछाल आया है। क्रिकेट सामग्री या कैरम ही नहीं, खेलों के अन्य सामानों में भी बीस प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है। इससे निमभन व मध्य आय वर्ग के खिलाड़ियों की जेब पर बोझ बढ़ा है, दुकानदारों को भी ग्राहकी कम होने से नुकसान झेलना पड़ रहा है।
खेल बाजार इन दिनों मंदी के दौर से गुजर रहा है। लकड़ी और रैगजीन के दामों में इजाफा होने से खेल सामग्रियों के दाम भी बढ़ गए हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में दाम वृद्धि का सबसे अधिक असर पड़ा है। इस क्षेत्र में 70 प्रतिशत खेल बाजार पर गरीब या मध्यम तबके का कब्जा है। इसी वर्ग के सबसे अधिक खिलाड़ी होने से उनके ऊपर दाम वृद्धि का असर पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि सबसे अधिक बिक्री क्रिकेट, हाकी और कैरम के सामान की होती है। इन के दामों में सबसे अधिक अंतर आया है। खासकर प्रतिष्ठित कंपनियों के सामान ज्यादा महंगे हुए हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बनने वाले सामानों के दाम भी बढ़े हैं, लेकिन उनकी वृद्धि दर पांच से सात प्रतिशत ही है। दुकानदार कहते हैं कि जो शौकिया खिलाड़ी हैं वे तो कम गुणवत्ता वाले सस्ते सामान से समझौता कर लेते हैं, लेकिन नियमित प्रेक्टिस करने वालों को अच्छी क्वालिटी के ब्रांडेड सामान ही चाहिए। ऐसे में उन्हें जेब ढीली करना मजबूरी है।
क्रिकेट कोच अरुण राय एवं परवेज खान का कहना है कि पहले उनके पास प्रशिक्षण लेने आने वाले खिलाड़ी अच्छी क्वालिटी का सामान लेकर आते थे, अब कामचलाऊ सामान लाने लगे हैं। यह सामान जल्दी खराब होने से हर दो - तीन माह में खरीदना पड़ता है। हाकी खिलाड़ी सलीम एवं बाक्सिंग खिलाड़ी अखिलेश व अब्दुल हमीद भी सामानों के दाम बढ़ने से चिंतित हैं। वे कहते हैं कि खिलाड़ियों की पोशाक भी महंगी हो गई है। हर साल पहले तीन जोड़ी पोशाक खरीदनी पड़ती थी, अब दो जोड़ी से काम चलाना पड़ रहा है।

हमारे यहां सिर्फ ब्रांडेड कंपनियों के सामान मिलते हैं। मंहगाई के कारण ग्राहकों में कमी आई है। अक्तूबर 2011 के पहले तक जहां दस से बारह ग्राहक रोज आते थे, अब यह संख्या छह से सात तक रह गई है।
गीता वर्मा संचालिका, अपूर्वा स्पोर्ट्स।

हम हर क्वालिटी का सामान रखते हैं। पहले खिलाड़ी ब्रांडेड सामान ज्यादा मांगते थे, अब लोकल सामान पसंद कर रहे हैं। लोकल सामान में मुनाफा ज्यादा है, लेकिन कभी ग्राहकों को लोकल सामान खरीदने की सलाह नहीं देते क्योंकि इसकी गुणवत्ता खराब होती है।
संजय साहू, संचालक, नवभारत स्पोर्टिंग ।

खेल सामग्रियों के दामों में आया अंतर
खेल सामग्री मात्रा 2011 2012
फुटबाल एक 400-580 450-650
वालीबाल एक 420-1300 470-1400
वालीबाल नेट एक 300-800 450-900
बास्केटबाल एक 390-440 425-700
बैडमिंटन रैकेट एक 150-1900 200-2100
शटल कॉक प्लास्टिक एक डिब्बा 700 950
शटल कॉक फेदर एक डिब्बा 160-550 200-700
क्रिकेट बैट कश्मीरी एक 300-1150 450-1500
क्रिकेट बैट इंग्लिश एक 1450-13000 1750-18000
बैटिंग ग्लब्स एक 150-550 225-700
क्रिकेट पैड एक जोड़ी 350-1500 450-2000
लेदर बाल फोर पीस एक 150-350 200-450
टेनिस बाल एक 30-45 45-75
टेटे बैट एक 200-1700 250-2200
टेटे बाल छह पीस डिब्बा 80-250 100-350
कैरम बोर्ड मध्यम 350 550
कैरम बोर्ड बड़ा 700-1500 800-2000
कैरम बोर्ड क्वाइन लकड़ी एक डिब्बा 30-200 60-400
कैरम बोर्ड क्वाइन प्लास्टिक एक डिब्बा 30-50 45-80
बॉक्सिंग ग्लब्स एक जोड़ी 450-600 600-1200
बॉक्सिंग माउथ गार्ड एक 500-700 700-950
हाकी स्टिक एक 525-1200 700-2200
हाकी बाल एक 50-75 75-120
स्पोर्ट्स मोजे एक जोड़ी 35-65 65-125

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