विज्ञापन

ये खोजी कुत्ता किस काम का

Jhansi Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
झांसी। पुलिस विभाग द्वारा हजारों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी खोजी कुत्ता अब तक एक भी मामले में सुराग नहीं दे सका है। वह डरपोक भी है। ट्रैकिंग के दौरान दूसरे जानवरों को देख वह दुबकने लगता है, जिससे जगहंसाई अलग से होती है।
विज्ञापन
यूं तो झांसी में पुलिस विभाग के पास खोजी तीन कुत्ते हैं। इनमें विस्फोटक का पता लगाने के लिए एक्समा और रैनी हैं, जबकि पद चिह्न व खुशबू से अपराधी का सुराग देने के लिए जमीरा है। चूंकि कई वर्षों से झांसी में विस्फोट जैसी ऐसी कोई घटना नहीं हुई, इसलिए इन दोनों का प्रयोग बाहरी जनपदों में ज्यादा होता है। हां, पद चिह्न व खुशबू से अपराधी का सुराग पाने के लिए 30 नवंबर 2008 को लाई गई सात वर्षीय जमीरा कई बार घटना स्थल पर ले जाई गई, जिसने सफलता तो दूर, जगहंसाई ही करवाई है। जमीरा जब से झांसी में है, तब से कोई भी सुराग पुलिस को नहीं दे सकी है।
विगत दिनों सीपी मिशन कंपाउंड में एक दवा विक्रेता के घर पर हुई लाखों की चोरी के मामले में तो अजीब स्थिति रही। पुलिस अधिकारियों ने जमीरा को बुलाया। जमीरा घटनास्थल से खुशबू लेकर बाहर की ओर दौड़ी, मगर जैसे ही उसके सामने गाय आई, वैसे ही वह डरकर उल्टे पांव लौट ली। साथ आए ट्रेनर हरिदास और सहायक हरेंद्र सिंह ने तमाम कोशिश की, मगर वह एक भी कदम आगे नहीं बढ़ी। मजबूरन, उन्हें उसे लेकर लौटना पड़ा। यह स्थिति तो तब है, जब पुलिस महकमा इसकी समुचित व्यवस्था के लिए हजारों रुपये खर्च कर रहा है। प्रत्येक कुत्ता की देखरेख के लिए एक-एक ट्रेनर व सहायक की चौबीसों घंटे ड्यूटी रहती है।



यह मिलती है खुराक
एक कुत्ते के खानपान के लिए सरकार 150 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से देती है। उन्हें प्रतिदिन आधा किलो बकरे का मांस, 475 ग्राम आटा, 250 ग्राम हरी सब्जी और आधा लीटर दूध देना होता है। जानकारों का कहना है कि इस बजट में कुत्तों को निर्धारित खुराक मिलना मुश्किल है। 150 रुपये में केवल आधा किलो बकरे का मांस ही आता है।


जमीरा भीड़भाड़ से काफी डरती है
ट्रेनर हरीदास भी मानते हैं कि जमीरा के खाते में अभी तक एक भी सफलता दर्ज नहीं है। उसका स्वभाव ऐसा है कि वह न सिर्फ भीड़ बल्कि गाय व अन्य जानवरों से भी डरती है। यही वजह है कि ट्रैकिंग के दौरान जैसे ही कोई जानवर उसके सामने आता है, वैसे ही वह डरकर इधर-उधर भागने लगती है। उनका कहना है कि ट्रेनिंग के दौरान वह सौ फीसदी अच्छा परिणाम देती है, लेकिन जैसे ही पब्लिक प्लेस पर जाती है, वैसे ही डरने लगती है।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Jhansi

डाकघरों से मिलेंगी एलईडी लाइट और पंखे-Dehat

डाकघरों से मिलेंगी एलईडी लाइट और पंखे-Dehat

26 सितंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

VIDEO: स्कूल में पढ़ाई की बजाए बच्चों से करवाया जा रहा ये काम

देश के प्रधानमंत्री ने लोगों से स्वच्छता अभियान से जुड़ने की बात कही। लेकिन झांसी के एक स्कूल में बच्चों से सफाई करवाने के नाम पर झाड़ू लगवाई जा रही है।

25 सितंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree