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झांसी में धरा गया आरपीएफ जवान बना नटवरलाल

Jhansi Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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झांसी। रेलवे स्टेशन पर खड़ी कुशीनगर नगर एक्सप्रेस में यात्रियों को धौंस- पट्टी देकर चूना लगा रहे आरपीएफ वर्दीधारी नटवरलाल को आरपीएफ ने संदेह के आधार पर दबोच लिया। छानबीन के दौरान उससे फर्जी आई कार्ड, रेलवे पास व चार मोबाइल फोन बरामद किए गए। पूछताछ के बाद आरपीएफ ने उसे जीआरपी के हवाले कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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बृहस्पतिवार की रात लोकमान्य तिलक से गोरखपुर जाने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस प्लेटफार्म एक पर खड़ी थी। तभी प्लेटफार्म पर चेकिंग के दौरान आरपीएफ के उपनिरीक्षक अमित मीणा, एएसआई वी के राय, आरक्षी एस आर चौधरी व विनय कुमार की नजर ट्रेन के जनरल कोच पर यात्रियों से तीखी तेवर में बात कर रहे एक वर्दीधारी पर पड़ गई। अनजान चेहरा देख कर जब उन्होंने उससे पूछताछ शुरू की तो उसने बताया कि वह मुगलसराय स्टेशन पर आरपीएफ में स्कार्ट कांस्टेबल के पद पर तैनात है। उसने फोटो लगा परिचय पत्र दिखाया, जिसे देख कर इन लोगों को शंका हुई। लेकिन, उसके हावभाव बता रहे थे कि वह वाकई जवान है। इस कारण शक पूरी तरह पुख्ता नहीं हो पा रहा था। बाद में उसे थाने ले जाया गया, जहां प्रभारी निरीक्षक एस के सिंह ने मुगलसराय इंस्पेक्टर का नाम पूछा तो उसने सिद्दीकी बताया। जानकारी करने पर इस नाम का कोई इंस्पेक्टर उस मंडल में तैनात नहीं मिला। शक पुख्ता होते ही उससे गहन पूछताछ की गई तो वह टूट गया। उसने स्वीकार कर लिया कि वह आरपीएफ की वर्दी पहनकर यात्रियों पर दबाव बनाने के बाद रुपये ऐंठता है। आरोपी ने खुद को वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में स्थित दशरथ मंदिर के निकट रहने वाला रीतेश तिवारी बताया है। तलाशी में उससे आरपीएफ के दो फर्जी परिचय पत्र, चार मोबाइल, रेलवे सुविधा पास आदि मिले हैं। रेलवे सुविधा पास पर इंडियन रेलवे सीजन जर्नी पास लिखा था, जिस पर वैधता नौ फरवरी से 2012 से दस मई 2015 दर्शाई गई थी। पास में राजधानी व अन्य ट्रेनों के तृतीय श्रेणी वातानुकूलित कोच में यात्रा करने की अनुमति थी।
आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक के अनुसार इस ठग ने कानपुर, मुगलसराय, इलाहाबाद, हावड़ा आदि स्टेशनों को ठगी का केंद्र बना रखा था। आमतौर पर वह कोच के पायदान पर बैठे व बीड़ी, सिगरेट पीने वाले यात्रियों को जेल भेजने का भय दिखाकर रुपये ऐंठता था। पांच- सात सौ रुपये वसूलने के बाद उस ट्रेन से उतर जाता था। आरोपी के अनुसार वह मार्च महीने से यह काम कर रहा है। बाद में आरपीएफ ने अभियुक्त को जीआरपी के सुपुर्द कर दिया। जीआरपी ने भादंवि की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 171, 41/411 के तहत आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

आरपीएफ कर्मी से सीखा पुलिसिया अंदाज
झांसी। बारहवीं पास रीतेश तिवारी के पिता के डी तिवारी गाजियाबाद में ज्योतिषी हैं। कई वर्षों से वह घरवालों से अलग रह रहा है। पहले वह ई टिकटिंग का काम करता था। इसके बाद वह मुगलसराय में एक आरपीएफ कर्मी के यहां घरेलू कामकाज करने लगा। यहीं उसने वर्दीधारियों द्वारा आमतौर पर दिखाए जाने वाले तेवर सीखे। आरपीएफ कर्मी के सेवानिवृत्त होने के बाद उसने वहां काम छोड़ दिया। एक वर्दी सिलवाई और इसे पहनकर ट्रेनों में यात्रियों से रुपये ऐंठने का काम करने लगा।

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