दूसरे दिन भी लटके रहे बैंकों में ताले

Jhansi Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
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झांसी। अधिकारी - कर्मचारियों की हड़ताल के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी बैंकों में ताले लटके रहे। क्लियरिंग हाउस भी बंद रहा। ज्यादातर प्राइवेट बैंकों में भी बंदी छाई रही। इस दौरान बैंक कर्मियों ने सभा कर केंद्र सरकार की नीतियों को कोसा। हड़ताल से कारोबार जगत भी खासा प्रभावित रहा।
दो दिवसीय हड़ताल के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को बैंक कर्मियों की भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के पास सभा हुई, जिसकी अध्यक्षता संयुक्त रूप से एनसीबीई के जिलाध्यक्ष जे पी आनंद, एआईबीओसी के जिलाध्यक्ष हरगोविंद सिंह परिहार व अधिकारी संगठन के अध्यक्ष पुनीत सिंह ने की।
इस दौरान एआईबीईए के जिला सचिव विजय शंकर सिंह ने कहा कि सरकार विश्व बैंक व इंटरनेशनल मोनेटरी फंड के हाथों कठपुतली बनी हुई है, जिससे विदेशी व निजी बैंकों को बढ़ावा दे रही है। इलाहाबाद बैंक स्टाफ एसोसिएशन के सचिव अशोक महावर ने बैंकों की ग्रामीण शाखाओं को बंद न किए जाने की मांग दोहराई। एआईबीओसी के जिलामंत्री एस ए सैय्यद ने कहा कि पूंजीपतियों के चंगुल से छुड़ाने के लिए 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था, जिससे बैंक के दरवाजे सभी के लिए खुल गए थे। लेकिन, सरकार अब इसे बदलने जा रही है।
सभा में प्रताप सिंह, अनिल खत्री, जयसिंह सेंगर, आर पी खरे, सुरेश चंद्र अग्रवाल, त्रिलोक चंद्र, बी बी मेहता, सुभाष बाधवा, अंसार अहमद कुरैशी, आर के सब्बरवाल, पी के शेषा, अनिल तिवारी, पी सी बिजौलिया, बी एस बेदी, जे पी जाटव, दिनेश पाठक, पी के सेठी, हरीशंकर यादव, अनिल खड्डर, आर के जुनेजा, अनिल समाधिया, राजीव कुदेशिया, सोमराज यादव, कमल किशोर, सुंदर राजन, ज्ञानेंद्र मोहन अवस्थी, रामलखन गौतम आदि उपस्थित रहे। इस दौरान बैंक कर्मियों ने प्राइवेट बैंकों को नारेबाजी करते हुए बंद कराया।

एटीएम ने छोड़ा साथ, लोग रहे परेशान
झांसी। बैंकों की हड़ताल के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को एटीएम भी साथ छोड़ गए। ज्यादातर एटीएम सिर्फ स्लिप ही उगलते रहे। यहां से लोग दिन भर मायूस होकर लौटते रहे। कई एटीएम के चक्कर काटने के बाद भी उनके हाथ खाली रहे। इससे लोगों की जरूरतें तो प्रभावित हुई हीं, साथ ही कारोबार पर भी खासा असर देखने को मिला।

केस एक
सदर बाजार स्थित यूनियन बैंक के एटीएम से मायूस होकर बाहर आते बीयू के छात्र प्रशांत जैन ने बताया कि उन्हें बीएससी के दूसरे सेमेस्टर की फीस जमा करनी है। इसके लिए एटीएम से पैसे निकालने आए थे। इससे पहले वह दो और एटीएम के चक्कर काट आए हैं। उनका कहना था कि बैंकों की हड़ताल में कम से कम एटीएम तो चालू रखने चाहिए थे।
केस दो
इलाइट चौराहे के पास एसबीआई के एटीएम से पैसे निकालने आए डिस्पोजल आइटम के थोक व्यवसायी सुनील गुप्ता को माल लेने शाम को उज्जैन जाना था, जिसके लिए रकम की आवश्यकता थी। लेकिन, बैंक बंद हैं और एटीएम से भी व्यवस्था नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि बिना रकम के जाना बेकार है। अब रविवार का जाने का प्रोग्राम बनाएंगे।
केस तीन
गुदरी मुहल्ले में रहने वाले कपड़ा व्यवसायी पंकज अग्रवाल पीएनबी के सिविल लाइन एटीएम से झल्लाते हुए बाहर आए। उनके साथ उनके मित्र सोनू भी थे। पंकज ने कहा कि बैंकों की हड़ताल से व्यापार खासा प्रभावित हुआ है। चेक का ट्रांजेक्शन नहीं हो पा रहा है। नकदी की भी व्यवस्था नहीं है। हड़ताल में बैंकों के एटीएम का विकल्प तो खुला रखना ही था।
केस चार
ग्वालियर रोड पर पीएनबी के एटीएम से रकम निकालने पहुंचे राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि वह इससे पहले तीन एटीमए और तलाश आए हैं। लेकिन, नकदी कहीं नहीं निकल रही है। उन्हें पैसों की आवश्यकता अभी है। लेकिन, यहां कल का भी भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि एटीएम के भरोसे अब लोग अपने पास ज्यादा नकदी नहीं रखते हैं। ऐसे में एटीएम का साथ छोड़ जाना खासा खल रहा है।

आज रहेगा बैंकों पर लोड
झांसी। दो दिन की हड़ताल के बाद शुक्रवार को बैंक खुलेंगे, जिससे उन पर खासा लोड रहने वाला है। इसके बाद शनिवार को बैंकों में आधा दिन काम होगा और रविवार को अवकाश। बैंक सुचारु रूप से सोमवार से काम करना शुरू करेंगे। एसबीआई की प्रमुख शाखा में स्थित क्लियरिंग हाउस में रोजाना तकरीबन साठ करोड़ रुपये का कारोबार होता है। लगातार दो दिन की बंदी के बाद खुलने पर यहां भी चेकों का अंबार लगेगा। ऐसे में चेक क्लियर होने में समय भी लग सकता है।

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