स्मारकों से छटेंगे बदहाली के बादल

Jhansi Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
झांसी। विभागों में आपसी समन्वय नहीं होने के कारण उपेक्षित पड़े संरक्षित स्मारकों के दिन बहुरने वाले हैं। मंडलायुक्त की पहल पर केंद्र/ राज्य पुरातत्व, पर्यटन विभाग एवं नगर निगम ऐतिहासिक स्मारकों के सुंदरीकरण के लिए मिलकर हाथ बंटाने को तैयार हो गए हैं।
बुधवार को मंडलायुक्त सत्यजीत ठाकुर ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग, क्षेत्रीय पर्यटन विभाग एवं नगर निगम के अधिकारियों के साथ कार्यालय में बैठक करते हुए कहा कि भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में झांसी के 26, ललितपुर के 68 एवं जालौन के 09 स्मारक हैं, जबकि राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में झांसी के 02 व ललितपुर के 27 स्मारक हैं। इनको सहेजकर सुंदर बनाना सभी का दायित्व है, पर विभाग एक - दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। समाजसेवी मुकुंद मेहरोत्रा ने मिनर्वा से किला मार्ग तक लगे कूड़े के ढेर, मोहन नेपाली ने किले के अंदर शौचालय व पेयजल की कमी व नगर आयुक्त जे पी चौरसिया ने किले के मैदान में लोगाें द्वारा शौच करने का मुद्दा उठाया। भारतीय पुरातत्व विभाग ने झांसी दुर्ग स्थित रानी के आमोद उद्यान के रखरखाव के लिए स्टाफ और बजट की कमी बताई।
मंडलायुक्त ने उद्यान के रखरखाव, किला मार्ग की नियमित सफाई कराने, किले में शौचालय और पेयजल सुविधा, मैदान में शौच पर रोक के लिए सुरक्षा कर्मी तैनात करने तथा कुमायूं रेजीमेंट से झांसी का राजदंड वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किले में कैंटीन, रानी की प्रतिमाएं व साहित्य बेचने की दुकान खुलवाने की भी व्यवस्था की जाए, लेकिन इससे किले का मूल स्वरूप नष्ट नहीं होना चाहिए। कोई दिक्कत हो तो भारतीय पुरातत्व विभाग के हेडक्वार्टर से इजाजत ले ली जाए। सभी विभागों ने इस पर सहमति जताई।

कहां गए तोप के गोले?
बैठक में वरिष्ठ पत्रकार मोहन नेपाली ने मुद्दा उठाया कि उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी राजनारायण ने एक बार उन्हें तोप के वह गोले दिखाए थे, जो अंग्रेजों द्वारा किले पर दागे गए थे। इन गोलों को रानीमहल में रखा गया था। अब कोई अधिकारी गोलों के बारे में बताने को तैयार नहीं है। इस पर मंडलायुक्त ने क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी आर के रावत से पूछा तो उन्होंने कहा कि अभी चार्ज लिया है, पता करेंगे। कमिश्नर ने कहा कि गोले ढूंढकर संग्रहालय में रखवाए जाएं।

जिले के प्रमुख स्मारक
रानी झांसी का किला, रानीमहल, महाराजा गंगाधर राव की छतरी, रघुनाथ राव का महल, गजरा बाई का मकबरा, लक्ष्मी मंदिर, कुत्ते की मजार, झोकनबाग की सेमेट्री, चंदेल मंदिर, गुसाईं मंदिर, बरुआसागर का किला, जराय का मठ, जराय की मड़िया, मऊरानीपुर का मेड़ा मंदिर, एरच की जामा मसजिद व बामौर का गैराहा मंदिर जनपद के चुनिंदा स्मारक हैं।

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