नशा को शौक नहीं, बीमारी समझें

Jhansi Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
झांसी। नशा को शौक नहीं, बीमारी समझें। मेडिकल कालेज के नशा मुक्ति केंद्र में इसी थीम पर नशा करने वालों का उपचार किया जाता है। यहां आने वाले नब्बे प्रतिशत मरीज पूरी तरह से ठीक होकर नशा से मुक्ति पा जाते हैं और नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में तीन साल पूर्व डी- एडिक्शन वार्ड (नशा मुक्ति केंद्र) शुरू किया गया था। जागरूकता के अभाव में यह केंद्र साल भर तक उपेक्षा का शिकार रहा। धीरे- धीरे यहां मरीजों का आना शुरू हो गया। नशा करने वालों को बताया जाता है कि नशा न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि बीमारी भी है। जिस प्रकार बुखार, मलेरिया या दूसरे प्रकार के रोग होते हैं, उसी प्रकार नशा भी रोग है, जिसे बेहतर मानसिक व शारीरिक इलाज से ठीक किया जा सकता है। यहां कई चरणों में इलाज होता है। पहला चरण पंद्रह दिनों का होता है। इसमें डॉक्टरों की टीम मरीज की काउंसलिंग करती है। चिकित्सक यह जानने का प्रयास करते हैं कि मरीज किस परिस्थिति के कारण नशा की ओर झुका। बाद में मरीज को दवाइयां दी जाती हैं, जो नशा छोड़ने के दौरान होने वाले नुकसान को कम करके नशा के प्रति उदासीनता पैदा करती हैं। वार्ड में रोगी को ऐसे मरीजों के साथ रखा जाता है, जो नशा के कारण अपना काफी कुछ बर्बाद कर चुके होते हैं। ऐसे मरीज नए रोगी के सामने अपनी बर्बादी का चित्रण कर नशा के दुष्प्रभाव बताते हैं। इसके बाद रोगी को नशा छोड़ कर स्वस्थ जिंदगी जीने के तरीके जैसे व्यायाम, संगीत, खेलकूद, किताबें पढ़ने या दूसरे कामों में रुचि पैदा करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
पहले चरण के बाद मरीज यहां हर सप्ताह, पंद्रह दिन या महीने में आकर काउंसलिंग और दवाइयों के माध्यम से इलाज कराता रहता है। सामान्य तौर पर इलाज की प्रक्रिया एक माह से लेकर एक साल तक चलती है। केंद्र में हर माह करीब पांच मरीज आते हैं, जिनमें से नब्बे प्रतिशत तक नशा से छुटकारा पा जाते हैं। नशा मुक्ति केंद्र के इंचार्ज व मनोचिकित्सक डा. ज्ञानेंद्र की मानें तो नशा को सिर्फ शौक के तौर पर लेना बड़ी भूल है। नियमित उपचार और काउंसलिंग कर नशा पूरी तरह छुड़ाया जा सकता है।

नशा के सामान्य लक्षण
- रात में नींद नहीं आना
- आंखें लाल होना
- शरीर में थकान
- भोजन कम खाना
- चिड़चिड़ापन
- कमजोरी महसूस करना
- एकाग्रता की कमी
- कार्यक्षमता में कमी
- नशा करने की व्याकुलता

नशा छुड़ाने की प्रक्रिया
- व्यक्ति के साथ काउंसलिंग
- दवाओं के माध्यम से नशा के प्रति उपेक्षा
- नशा छोड़ने वाले व्यक्तियों के साथ ग्रुप डिस्कशन
- नशा के प्रति उदासीन रहने की सीख

नशा के प्रकार
- एल्कोहल - शराब
- ओपाइड - अफीम, मार्फीन, कोडीन, स्मैक, हेरोइन, कोकीन
- ड्रग्स एंड सब्सटेंट - नाइट्रोजिटफार्म, डाइनिफार्म, डाक्सोप्रोफार्म, पेट्राजोसीन
- टोबैको - बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, पान मसाला, खैनी, हुक्का
- कैनाबिस - चरस, गांजा, भांग, हसीस
- सोल्यूशन - थिनर, स्प्रिट, ईथर, पेट्रोल, नेल पॉलिश, इंक रिमूवर

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