ढाई हजार प्रोजेक्ट में पूरे हुए सिर्फ 58

Jhansi Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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झांसी। पहले चुनाव की आपाधापी, फिर बारिश और अब खेतों में व्यस्तता ने मनरेगा की परियोजनाओं को प्रभावित कर दिया है। जिले में इस वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृत 12271 में से ढाई हजार परियोजनाएं जुलाई तक पूरी हो जाना चाहिए थी, लेकिन अभी तक महज 58 प्रोजेक्ट ही मूर्तरूप ले सके हैं। सबसे खराब स्थिति गुरसरांय विकासखंड की है जहां एक भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी है, जिससे गांवों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत जनपद में वर्ष 2012-13 में 12271 परियोजनाओं पर काम कराने का लक्ष्य रखा गया था। उद्देश्य यह था कि ज्यादा परियोजनाएं होने से जॉब कार्ड धारकों को रोजगार की कमी नहीं रहेगी और लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। इसके लिए 1396 स्थानों पर संपर्क मार्ग का निर्माण, 4764 स्थानों पर जल संरक्षण के लिए चेकडैम, बंधियों का निर्माण, 757 स्थानों पर सूखारोधन, 247 स्थानों पर कूपों का जीर्णोद्धार, 2240 स्थानों पर भूमि विकास, 295 स्थानों पर पारंपरिक जल निकासी तथा 2572 स्थानों पर अन्य कार्य कराए जाने हैं। इनमें से लगभग ढाई हजार (33 प्रतिशत) परियोजनाएं जुलाई तक पूरी करनी थी। 12 जुलाई तक उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के अनुसार अब तक ग्रामीण संपर्क मार्ग की 22, जल संरक्षण की छह, सूखारोधन की चार, लघु सिंचाई विभाग की आठ, भूमि विकास की नौ, पारंपरिक जल निकासी के आठ तथा दो अन्य परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं। गुरसरांय में कुल स्वीकृत 1577 में से एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है।
परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण जीपी गौतम ने बताया कि जितने ज्यादा जॉब कार्ड धारक काम करेंगे उतनी ही अधिक परियोजनाओं पर काम चलेगा। अप्रैल से जुलाई तक 29,756 परिवारों को रोजगार दिया जा चुका है और वर्तमान में 12,299 परिवार काम कर रहे हैं। इसके अलावा जो भी जॉब कार्ड धारक रोजगार की मांग करेगा उसे काम अवश्य दिया जाएगा।

मनरेगा परियोजनाओं की ब्लाकवार स्थिति

ग्रामीण संपर्क मार्ग:
बबीना में 86 के सापेक्ष एक, बड़ागांव में 77 के सापेक्ष पांच, बामौर में 238 के सापेक्ष शून्य, बंगरा में 57 के सापेक्ष एक, चिरगांव में 162 के सापेक्ष छह, गुरसरांय में 161 के सापेक्ष शून्य, मऊरानीपुर में 101 के सापेक्ष शून्य, मोंठ में 514 के सापेक्ष छह परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं।
जलसंरक्षण:
बबीना में 1905 के सापेक्ष शून्य, बड़ागांव में 745 के सापेक्ष चार, बामौर में 344 के सापेक्ष एक, बंगरा में 69 के सापेक्ष शून्य, चिरगांव में 599 के सापेक्ष एक, गुरसरांय में 620 के सापेक्ष शून्य, मऊरानीपुर में 268 के सापेक्ष शून्य, मोंठ में 214 के सापेक्ष शून्य परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं।
सूखारोधन:
बबीना में 89 के सापेक्ष एक, बड़ागांव में 71 के सापेक्ष एक, बामौर में 93 के सापेक्ष शून्य, बंगरा में 80 के सापेक्ष शून्य, चिरगांव में 90 के सापेक्ष शून्य, गुरसरांय में 111 के सापेक्ष शून्य, मऊरानीपुर में 118 के सापेक्ष दो, मोंठ में 105 के सापेक्ष शून्य परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं।
लघु सिंचाई:
बबीना में 4 के सापेक्ष शून्य, बड़ागांव में 44 के सापेक्ष एक, बामौर में 21 के सापेक्ष शून्य, बंगरा में छह के सापेक्ष शून्य, चिरगांव में 27 के सापेक्ष शून्य, गुरसरांय में 27 के सापेक्ष शून्य, मऊरानीपुर में 48 के सापेक्ष छह, मोंठ में 70 के सापेक्ष एक परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं।
भूमि विकास:
बबीना में 163 के सापेक्ष एक, बड़ागांव में 164 के सापेक्ष दो, बामौर में 636 के सापेक्ष दो, बंगरा में 199 के सापेक्ष शून्य, चिरगांव में 158 के सापेक्ष चार, गुरसरांय में 333 के सापेक्ष शून्य, मऊरानीपुर में 316 के सापेक्ष शून्य, मोंठ में 271 के सापेक्ष शून्य परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं।
पारंपरिक जल निकासी:
बबीना में 45 के सापेक्ष पांच, बड़ागांव में 26 के सापेक्ष तीन, बामौर में 37 के सापेक्ष शून्य, बंगरा में 2 के सापेक्ष शून्य, चिरगांव में 4 के सापेक्ष शून्य, गुरसरांय में 141 के सापेक्ष शून्य, मऊरानीपुर में 22 के सापेक्ष शून्य, मोंठ में 18 के सापेक्ष शून्य परियोजनाएं पूर्ण र्हुइं हैं।

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