33 फीसदी फसलें खरपतवार की गिरफ्त में

Jhansi Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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झांसी। मानसून के देर से मेहरबान होने पर किसानाें ने खेतों में खरीफ फसलों की बुआई तो कर ली, लेकिन उन पर अब खरपतवार ने कब्जा कर लिया है। तैंतीस फीसदी फसल खरपतवार की गिरफ्त में आ गई है। इससे फसलों की वृद्धि दर रुक गई है। किसान अब कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ले रहे हैं।
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इस साल जिले को खरीफ में 2,05,491 हेक्टेअर में बुआई का लक्ष्य दिया गया। अब तक धान 10,590 हेक्टेअर के सापेक्ष 8,085 हेक्टेअर में, मक्का 2,698 हेक्टेअर के सापेक्ष 2,700 हेक्टेअर में, ज्वार 2,629 हेक्टेअर के सापेक्ष 2,670 हेक्टेअर में, बाजरा 29 हेक्टेअर के सापेक्ष 32 हेक्टेअर में, उरद 55,872 हेक्टेअर के सापेक्ष 50,570 हेक्टेअर में, मूंग 10,188 हेक्टेअर के सापेक्ष 10,010 हेक्टेअर में, मूंगफली 21,424 हेक्टेअर के सापेक्ष 21,205 हेक्टेअर में, सोयाबीन 1,370 हेक्टेअर के सापेक्ष 1,480 हेक्टेअर में, तिल 96,766 हेक्टेअर के सापेक्ष 90,720 हेक्टेअर में एवं अन्य फसलें 24 हेक्टेअर के सापेक्ष 310 हेक्टेअर में बोई गई हैं। जिला प्रशासन द्वारा कराए गए बुआई के सर्वे में पाया गया है कि तैंतीस फीसदी फसलों में खरपतवार का प्रकोप बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार 62,900 हेक्टेअर में बोई गई फसल खरपतवार की गिरफ्त में है।
कृषि अनुसंधान केंद्र के नोडल प्रभारी डा. वीके सिंह ने कहा कि खरपतवार को केवल तभी नियंत्रित किया जा सकता है जब शुरुआती दौर में उखाड़ दिया जाए। इसके बाद भी खरपतवार बढ़ जाए जाए तो इमेजाथाइपर दवा को शैंपू की तरह छिड़कना चाहिए। यह मिश्रण उरद, मूंग, सोयाबीन व मूंगफली की फसल पर दो सौ लीटर पानी में घोलकर स्प्रिंकलर से छिड़कना उचित रहता है। दवा का मिश्रण हर दो - तीन दिन के अंतर पर छिड़कने से खरपतवार को खत्म किया जा सकता है।
खरपतवार से यह है नुकसान
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खरपतवार तेजी से बढ़ता है और फसलों के ऊपर छा जाता है, जिससे फसलों को बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता। इससे फसल कमजोर हो जाती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।
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