304 बी नहीं, 302 के दोषी हैं ससुराली

Jhansi Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
झांसी। एक युवती की जलाकर की गई हत्या के मामले में मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तीन की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पति समेत पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दहेज हत्या के इस मामले में उन्होंने अभियुक्तों को 304 बी का नहीं, हत्या 302 का दोषी पाते हुए अपना फैसला सुनाया।
कानपुर देहात जिले के ग्राम पुरैनी थाना भोगनीपुर निवासी मनमोहन सिंह ने 01 नवंबर 2006 को एरच थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पुत्री अनीता यादव (26) की शादी छह वर्ष पूर्व ग्राम डिकौली के स्व. नत्थू यादव के पुत्र सुनील कुमार यादव के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही उसे दहेज की खातिर प्रताड़ित किया जाने लगा था। 31 अक्तूबर 2006 की रात को अनीता की उसके पति सुनील कुमार यादव, सास रजोला, देवर राजकुमार उर्फ मझले व नीतू उर्फ रामकुमार तथा देवरानी रामदुलारी उर्फ उमा पत्नी राजकुमार उर्फ मझले ने मिलकर मारपीट कर आग लगाकर हत्या कर दी है। एरच थाने की पुलिस ने पांचों के खिलाफ धारा 498ए, 304बी तथा भारतीय दंड संहिता व धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत किया।
इस मामले की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तीन आदर्श कुमार सिंह कनौजिया की अदालत में बहस हुई। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अनीता की शादी छह वर्ष पूर्व नहीं, बल्कि 1998 में हुई थी, इसलिए दहेज के लिए हत्या का कोई केस नहीं बनता है। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद पाया कि यह सही है कि मामला धारा 304 बी भारतीय दंड संहिता में सिद्ध नहीं होता, लेकिन हत्या तो हुई ही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनिल सिंह के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले में की गई टिप्पणी का उल्लेख करते हुए अभियुक्तों को धारा 302 सपठित धारा 34 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दोषी पाया। सभी अभियुक्तों को आजीवन कारावास तथा दस - दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 498 ए के तहत तीन वर्ष के कारावास व दो - दो हजार के अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत एक वर्ष के कारावास तथा हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। सभी अभियुक्तों को न्यायालय से जेल भेज दिया गया है। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) संतोष कुमार दोहरे ने की।

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