सूखा की आहट पर प्रबंधन में जुटे विभाग

Jhansi Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
झांसी। बुंदेलखंड में कमजोर मानसून के चलते सरकार ने भी सूखे की संभावना मान ली है। शासन के निर्देश पर विभागों ने सूखा से राहत दिलाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। कृषि, ग्राम्य विकास, पशुपालन, सिंचाई व नलकूप विभाग ने कार्ययोजना तैयार कर ली है। यदि अगस्त के पहले सप्ताह तक मानसून कमजोर रहा तो सूखा तय हो जाएगा।
बुंदेलखंड एग्रो क्लाइमेटिक जोन में आता है। इस क्षेत्र के झांसी जनपद के 4.608 हेक्टेअर में फसलें बोई जाती हैं, जिसमें से 1.448 हेक्टेअर में खरीफ, 3.07 हेक्टेअर में रबी और 0.09 हेक्टेअर में जायद की बुआई होती है। जनपद में सिंचाई के मुख्य स्रोत नहरें हैं, लेकिन मानसूनी बारिश न होने से जलाशय खाली रहते हैं और नहरों का संचालन नहीं हो पाता। इसका असर खरीफ पर तो पड़ता ही है, रबी फसल भी प्रभावित होती है। जिले में जून से सितंबर तक 865.76 मिलीमीटर औसत बारिश होने पर ही अच्छी स्थिति मानी जाती है। यह स्थिति भी तब बनती है जब जून व जुलाई में औसतन 290 मिलीमीटर बारिश हो जाए। इस साल अभी तक लगभग 150 मिलीमीटर औसत बारिश हो सकी है, जो औसत से काफी कम है। इससे सूखा की आशंका बढ़ गई है। माना जा रहा है कि अगस्त के पहले सप्ताह तक 300 मिलीमीटर औसत बारिश हो गई तो सूखा के आसार कम हो जाएंगे वर्ना सूखा तय है। इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर विभागों ने सूखा प्रबंधन से निपटने की फौरी तैयारी कर ली है। कार्ययोजना बना ली गई है और सूखा घोषित होते ही इस पर अमल शुरू हो जाएगा।

किसकी क्या तैयारी
कृषि: उरद, मूंग, मूंगफली और सोयाबीन की बुआई का समय निकल चुका है। अब जो फसलें बोने से बची हैं उसमें से धान का रकबा 3815 हेक्टेअर से घटाकर 1500 हेक्टेअर, मक्का का रकबा 2318 से घटाकर 1000 हेक्टेअर, बाजरा का रकबा 170 हेक्टेअर से घटाकर 82 हेक्टेअर, अरहर का रकबा 4210 से घटाकर 1000 हेक्टेअर कर दिया गया है। इसके बदले अगस्त के पहले पखवारे तक बोई जाने वाली कम अवधि की तिल का रकबा 69312 हेक्टेअर से बढ़ाकर 89800 एवं ज्वार का रकबा 296 हेक्टेअर से बढ़ाकर 2000 हेक्टेअर कर दिया गया है। साथ ही कम अवधि में अधिक उत्पादन वाली प्रजातियों के साथ सह फसली खेती की तैयारी की जा रही है।
नलकूप: खरीफ में सिंचाई के लिए क्षेत्रवार नलकूप आवंटित नहीं किए जाते, लेकिन इस बार कम पानी चाहने वाली तिल व अरहर की खेती के लिए एक नलकूप से तीन हेक्टेअर क्षेत्रफल सिंचाई का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है।
सिंचाई: सिंचाई विभाग ने ढाल के विपरीत जुताई करने, पूर्व में निर्मित जल भराव बांध व जल संचय बांध की मरम्मत कराने, बांधों से जुड़े नालों को काटने पर रोक लगाने एवं स्प्रिंकलर या ड्रिप इरीगेशन के माध्यम से बौछारी सिंचाई कराने पर बल दिया है।
पशुपालन: सूखे में पशु चारा की समस्या खड़ी हो सकती है। इससे बचने के लिए पशुपालन विभाग ने दस हजार क्विंटल भूसा स्टोर कर लिया है। इसका आवंटन पशु चिकित्सालयों में करने की योजना है।
ग्राम्य विकास: सूखे के कारण छोटे मजदूर किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। इसके लिए ग्राम्य विकास विभाग ने मनरेगा में चार लाख दस हजार मानव दिवस सृजित करने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर चार करोड़ बानवे लाख रुपये का बजट आंका गया है।

केंद्र सरकार की योजना
केंद्र सरकार ने सूखे की स्थिति में सरकारी राशन की दुकानों पर ज्यादा सब्सिडी देकर सस्ते दर पर दाल बेचने, कम बारिश वाले क्षेत्रों में सिंचाई के लिए अतिरिक्त बिजली और डीजल मुहैया कराने तथा कम पानी में बेहतर फसल देने वाले बीज मुहैया कराने की योजना बनाई है।

Spotlight

Most Read

Varanasi

बिरहा प्रतियोगिता के चयन पर उठ रहे सवाल

बिरहा प्रतियोगिता के चयन पर उठ रहे सवाल

22 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: यूपी के इस टोल प्लाजा पर MLA के रिश्तेदार का तांडव!

यूपी में टोल प्लाजा पर मारपीट की घटना कोई नई बात नहीं है। झांसी में टोल टैक्स मांगने पर खुद को विधायक का रिश्तेदार बताया और टोल कर्मियों की पिटाई कर दी। हालांकि ये साफ नहीं है कि ये कौन लोग हैं।

4 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper