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फोटो: रेलवे: नई कोच फैक्ट्री के लिए तोड़े जाएंगे-Lalitpur

Jhansi Bureau Updated Sun, 14 Oct 2018 04:44 AM IST
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नई कोच फैक्ट्री के लिए तोड़े जाएंगे 160 क्वार्टर
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झांसी। प्रेमनगर हाट के मैदान में बनने वाली नई कोच फैक्ट्री के लिए 160 क्वार्टर तोड़े जाएंगे। प्रेमनगर के लोगों के लिए 30 फीट का रास्ता दिया जाएगा, जो काठ के पुल पर जाकर मिलेगा। रेलवे विकास निगम लिमिटेड ने जमीन की नापतौल करने के लिए सर्वे शुरू कर दिया गया है। दिसंबर में रेलमंत्री फैक्ट्री का शिलान्यास करने के लिए आ सकते हैं।
रेल मंत्रालय नगरा हाट के मैदान के पास नई फैक्ट्री (रिफर्बिशमेंट) स्थापित करने जा रहा है। फैक्ट्री को स्थापित करने के लिए 500 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है। फैक्ट्री में लिंके हॉफमेन बुश कोच (एलएचबी) को सजाने (नवीनीकरण) का काम होगा। यह कोच शताब्दी और गतिमान एक्सप्रेस में लगे हैं। नगरा हाट के मैदान से कैथड्रिल स्कूल के पीछे तक खाली पड़ी रेलवे की जमीन पर फैक्ट्री बननी है। फैक्ट्री के लिए 80 एकड़ जमीन चाहिए।
रेलवे विकास निगम लिमिटेड को फैक्ट्री बनाने का काम सौंपा गया है। कानपुर कैंप कार्यालय में बैठने वाले चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर राजीव श्रीवास्तव की देखरेख में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। 80 एकड़ जमीन के दायरे में 160 क्वार्टर आ रहे हैं, जिनको तोड़ा जाएगा। इन क्वार्टरों में रहने वाले कर्मचारियों को पश्चिमी रेलवे कालोनी के खाली पड़े क्वार्टरों में शिफ्ट किया जाएगा। प्रेमनगर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए तीस फीट का रास्ता निकाला जाएगा, जो काठ के पुल के पास खुलेगा। इस संबंध में पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने आरवीएनएल को फैक्ट्री बनाने का काम सौंपा है। सर्वे शुरू कर दिया गया है।
मालूम हो कि, विगत 22 फरवरी 2018 को लखनऊ में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने झांसी में नई कोच रेल फैक्ट्री बनाने की घोषणा की थी। फैक्ट्री में प्रतिमाह पचास कोचों के नवीनीकरण की योजना है।

ये भी जानिए
लिंके हॉफमेन बुश (एलएचबी) डिब्बों में ऐसी आधुनिक प्रौद्योगिकी है, जो ट्रेन के पटरी से उतरने के दौरान डिब्बों को पलटने से रोकती है। रेल मंत्रालय पारंपरिक आईसीएफ डिब्बों का निर्माण 2019 तक पूरी तरह बंद कर देगा। सिर्फ एलएचबी डिब्बों का प्रयोग होगा। इन कोचों की गति 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। इनमें एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होता है, जिसके कारण यह डिब्बे आसानी से पटरी से नहीं उतर पाते। यह डिब्बे स्टेलनेस स्टील और एल्युमीनियम के बने होते हैं, जबकि आईसीएफ डिब्बे माइल्ड स्टील के बने होते हैं। यह डिब्बे अलग तरह की कपलिंग से जोड़े जाते हैं। इन दिनों कोच कारखानों में एलएचबी डिब्बों को बनाने का काम तेजी से चल रहा है।

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