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कचरा से बनेगी कंपोस्ट खाद-DHT

Updated Mon, 05 Jun 2017 07:55 PM IST
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कचरा से बनेगा कंपोस्ट खाद
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झांसी।
महानगर से निकलने वाले गीले कचरा से खाद बनाई जाएगी। खाद से कचरा का सदुपयोग होगा और पेड़-पौधों को यूरिया रहित जैविक खाद मिलेगा। इससे पर्यावरण साफ-सुथरा रहेगा। नगर निगम इस योजना पर डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करेगा।
पर्यावरण साफ-सुथरा रहे, इसके लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक कचरा को बेकार समझ कर फेंक दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सूखा व गीला कचरा में बांट कर अलग-अलग कचरे का स्टोर किया जाएगा तथा हरे डस्टबिन में डाला जाएगा या नीले में, इस बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा, ताकि वह कचरा निर्धारित स्थल पर डालें। गीला कचरा का उपयोग कंपोस्ट खाद बनाने में किया जाएगा।

मसीहागंज में नगर निगम की खंती के पास लगने वाले प्लांट में गीला कचरा इकट्ठा कर उससे कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित इंडोगल्फ कंपनी से नगर निगम ने टाईअप किया है। सर्वे के मुताबिक शहर से प्रतिदिन 10 से 12 टन गीला कचरा इकट्ठा किया जाएगा।

गीला कचरा
लोगों को जागरूक किया जाएगा कि हरे डस्टबिन में पकाया या बिना पकाया बेकार का भोजन रखा जाए। अंडे के छिलके और हड्डियां, फूल, माला, फल, सब्जियाें के छिलके और बेकार सब्जियां, जूस, भोजन व शौचालय के लिए इस्तेमाल किया जाना वाला टिश्यू, टायलेट पेपर, चाय के बैग, कॉफी पाउडर, पत्ता की प्लेटें, घरेलू बगीचे और पौधों का कचरा हरे डस्टबिन में डाला जाएगा। यह कचरा डोर-टू-डोर आने वाले कचरा कलेक्शन कर्मचारियों द्वारा इकट्ठा किया जाएगा।

सूखा कचरा
प्लास्टिक के लिफाफे, कवर, बोतलें, बक्से, टॉफी रेफर, कागज के कप-प्लेट, दूध और दही के पैकेट, अखबार, पत्रिका, गत्ता के डिब्बे, कागज का बाक्स, पैकिंग, पन्नी, कंटेनर, टिन पैक, बोतलें, जार, बेकार फूलदान, रबड़, चमड़ा, पुराना सामान, थर्र्मोकोल, प्रसाधन की सामग्री, स्पंज, पुराने कपड़े, ब्रश, रेजर, बैटरियां, ट्यूबलाइट, सीएफएल, एलईडी बल्ब आदि सूखा कचरा नीली डस्टबिन में रखा जाएगा। ये कचरा भी डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने वाले कर्मचारियों को दिया जाएगा।

जागरूकता आएगी और सफाई रहने लगेगी
कंपोस्ट खाद का उत्पादन शुरू होने के बाद से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने के प्रति लोगों में जागरूकता आएगी। इसका असर स्वच्छता पर भी पड़ेगा, क्योंकि अभी फल और सब्जी वाले इनके सड़ जाने पर फेंक देते हैं, लेकिन कंपोस्ट खाद बनने लगेगा तो वह फेंकेंगे नहीं, बल्कि सहेजकर रखेंगे।
- डा. राकेश बाबू
नगर स्वास्थ्य अधिकारी

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