धूल, धुएं के बादलों से सांसों का संकट

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 30 Oct 2020 11:44 PM IST
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नईगंज हाईवे पर बड़ी गाड़ियों के गुजरने से उड़ रही धूल।
नईगंज हाईवे पर बड़ी गाड़ियों के गुजरने से उड़ रही धूल। - फोटो : JAUNPUR

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जौनपुर। सर्दी की दस्तक के साथ ही प्रदूषण की समस्या फिर गंभीर रूप लेने लगी है। निर्माणाधीन सड़कों पर उड़ती धुल, वाहनों से निकलता धुआं और धुंध ठंड के चलते खतरनाक साबित हो रहा है। कॉकटेल सेहत के लिए खतरनाक हो रहा है। आलम यह है कि सर्दी की शुरुआत में ही वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से ऊपर पहुंच गया है। दीपावली पर पटाखों से हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। कोरोना और सांस की बीमारियों के लक्षण एक जैसे होने के कारण ऐसे मरीजों के इलाज में भी दिक्कत पेश आ रही है।
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वायु प्रदूषण के लिहाज से पिछले कुछ वर्षों से जिले की आबोहवा लगातार बिगड़ती जा रही है। सड़कों पर वाहनों की बढ़ती भीड़ के कारण उनसे निकलने वाला धुंआ तो प्रदूषण फैला ही रहा है, निर्माणाधीन सड़कों व भवनों पर उड़ने वाली धूल ज्यादा परेशान कर रही है। शहर से होकर गुजरे लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग पर नईगंज तिराहे से जगदीशपुर रेलवे क्रॉसिंग तक का हाल इतना बुरा है कि कदम रखते ही लोग धुल से नहा ले रहे हैं। यहां हर वक्त धुल उड़ती रही है, जो सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज को बढ़ा रही है। पहले से ही प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे जिले में दीपावली पर पटाखों से उठने वाला धुंआ परेशानी और बढ़ाएगा। इसके साथ ही धान की कटाई के बाद डंठल (पराली) जलाने पर समस्या और बढ़ेगी। लिहाजा इस पर अभी से रोक लगा दी गठई है। कोरोना काल में धुल, धुंआ और धुंध का मेल सेहत के लिए खतरनाक है। चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना में भी सांस की तकलीफ होती है और प्रदूषण से भी। ऐसे में इस साल बीमारियों पहचानने में भी नई चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
शुक्रवार को 160 एक्यूआई रहा प्रदूषण स्तर
कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक डॉ. पंकज जायसवाल के मुताबिक शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 160 पर रहा। इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। सोमवार तक इसके 170 तक पहुंचने का अनुमान है। धान की कटाई अभी चल रही है। खेत खाली होने किसानों ने डंठल जलाना शुरू किया तो प्रदूषण का स्तर और बढ़ेगा। दीपावली पर पटाखों के धुएं और सर्दी में धुंध को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है। खेतों में पराली हरगिज न जलाएं। यह हर तरह से नुकसानदायक है। इससे जहां खेत में मौजूद मित्र किट मर जाते हैं, वहीं वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और मिथेन गैसों की मात्रा बढ़ जाती है। जिससे त्वचा और सांस संबंधी तकलीफें बढ़ती हैं।
पराली जलाने वाले दो किसानों पर केस दर्ज करने का आदेश
जौनपुर। शासन की लाख मनाही के बावजूद पराली जलाने पर रोक नहीं लग पा रही। बृहस्पतिवार की शाम सतहरिया क्षेत्र में दो किसानों को पराली जलाते पकड़ा गया। डीएम ने उनके विरुद्ध केस दर्ज करने का आदेश दिया है। डीएम ने बताया कि एसडीएम-सीओ के भ्रमण के दौरान सतहरिया गांव में पिंटू प्रजापति और बाबूलाल बिंद खेतों में पराली जलाते पाए गए। दोनों के विरुद्ध जुर्माना व वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उधर, बदलापुर क्षेत्र के बछाड़ी गांव में शुक्रवार को सड़क के किनारे पराली जलता पाया गया। एडीओ कृषि ने संबंधित किसानों पर केस दर्ज कराने की चेतावनी दी। उधर मछलीशहर इलाके के पंवारा थाने में एसडीएम अंजनी कुमार सिंह व सीओ विजय सिंह ने किसानों को पराली न जलाने की हिदायत दी।
वायु प्रदूषण का सर्वाधिक प्रभाव श्वसन तंत्र पर पड़ता है। इससे सर्दी-खांसी, ब्रोकांइटिस, निमोनिया, गले का दर्द, एलर्जी, अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। वाहनों के धुएं में उपस्थित कण यकृत, आहार नली और बच्चों में मस्तिष्क विकार व हड्डी की बीमारियों का कारण बनते हैं। -डॉ. विकास उपाध्याय, एमडी फिजिशियन।
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